क्या सयाजी शिंदे अपनी जान देंगे, लेकिन पेड़ों को कटने नहीं देंगे?

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क्या सयाजी शिंदे अपनी जान देंगे, लेकिन पेड़ों को कटने नहीं देंगे?

सारांश

नासिक में कुंभ मेले की तैयारियों के बीच 1800 पेड़ों की कटाई का मामला गरमा गया है। शहरवासी और सामाजिक कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं। फिल्म अभिनेता सयाजी शिंदे भी इस मुहिम में शामिल हुए और पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी जान देने की बात कही। जानें इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है!

Key Takeaways

  • सयाजी शिंदे ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी जान देने की बात कही।
  • नासिक में 1800 पेड़ों की कटाई पर विरोध हो रहा है।
  • पेड़ हमारे पर्यावरण के लिए आवश्यक हैं।
  • सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।
  • सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।

नासिक, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कुंभ मेले की तैयारियों के बीच तपोवन में लगभग 1800 पेड़ों की कटाई को लेकर बवाल मच गया है। शहरवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और कई संगठन पेड़ काटने के खिलाफ आवाज़ उठाने लगे हैं। इसी क्रम में फिल्म अभिनेता और 'सह्याद्री देवराई' संगठन के नेता सयाजी शिंदे ने नासिक पहुंचकर पेड़ों की कटाई का दृढ़ विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अपनी जान दे देंगे, लेकिन एक भी पेड़ को कटने नहीं देंगे।

सयाजी शिंदे ने कहा कि वे यहां पर्यावरण प्रेमियों का समर्थन करने आए हैं, क्योंकि जो कार्य लोग पेड़ों को बचाने के लिए कर रहे हैं, वही सही है। उन्होंने कहा कि तुकाराम महाराज और शिवाजी महाराज जैसे महान व्यक्तियों ने हमेशा प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की बात कही है, और वे भी उसी विचार के अनुयायी हैं। उनके अनुसार, पेड़ हमारे मां-बाप के समान हैं। यदि कोई हमारे मां-बाप को नुकसान पहुंचाता है, तो हम चुप कैसे रह सकते हैं?

उन्होंने यह भी कहा कि यदि पेड़ बचे रहेंगे, तो हम भी बचे रहेंगे। इसमें कोई जटिलता नहीं है। शिंदे ने कहा कि अभी फॉर्म भरने या कानूनी प्रक्रिया में समय नहीं है, लेकिन जो लोग कानूनी तरीके से पेड़ बचाने का प्रयास कर रहे हैं, वे उनके साथ हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर साधुग्राम बनाना है, तो इसे किसी खाली स्थान पर बनाया जाए, न कि पेड़ काटकर। इससे प्रकृति और लोगों दोनों का भला होगा।

महाराष्ट्र के जल संसाधन और आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन और अन्य नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को गलतफहमियों में मत डालिए, और झूठ मत बोलिए। राज्य का कार्य शांतिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने नासिक वासियों से अपील की कि एक भी पेड़ कटने न दें।

सयाजी शिंदे ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे अपनी जान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पेड़ों को कटने नहीं देंगे। उन्होंने लोगों को विश्वास दिलाया कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो वे नासिक के लोगों के साथ खड़े होंगे।

Point of View

बल्कि यह सामाजिक जागरूकता का भी प्रतीक है। सयाजी शिंदे का यह कदम दर्शाता है कि लोग अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए कितने गंभीर हैं। हमें इस दिशा में आगे बढ़ने और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

क्या सयाजी शिंदे ने सच में अपनी जान देने का बयान दिया?
हां, सयाजी शिंदे ने कहा है कि वे पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी जान देने के लिए भी तैयार हैं।
पेड़ों की कटाई का विरोध क्यों हो रहा है?
क्योंकि पेड़ हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी कटाई से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
क्या सिर्फ सयाजी शिंदे ही इस विरोध में शामिल हैं?
नहीं, शहर के कई लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन भी इस विरोध में शामिल हैं।
क्या सरकार इस मुद्दे पर कुछ कर रही है?
सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और लोगों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
पेड़ बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
लोगों को जागरूक करना, कानूनी कार्रवाई करना और जन आंदोलन करना बहुत महत्वपूर्ण है।
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