क्या ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं ट्रंप? कनाडा को पीछे छोड़ने की है ख्वाहिश या यह अमेरिका की परंपरा?
सारांश
Key Takeaways
- ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि अमेरिका की क्षेत्रीय विस्तार परंपरा का हिस्सा है।
- ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति इसे महत्वपूर्ण बनाती है।
- अमेरिकी इतिहास में क्षेत्रीय विस्तार राष्ट्रीय शक्ति से जुड़ा रहा है।
- आज की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में क्षेत्र खरीदने के लिए स्थानीय सहमति आवश्यक है।
- ट्रंप का यह कदम गैर-पारंपरिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ग्रीनलैंड इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पिछले एक महीने से, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऐसे बयान देते आ रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बने हुए हैं। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, अमेरिका की ग्रीनलैंड में रुचि एक अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है। यह क्षेत्रफल बढ़ाकर कनाडा को पीछे छोड़ने की कोशिशों में भी देखा जा रहा है, जो केवल ग्रीनलैंड को हासिल करके ही संभव हो सकता है।
यदि अमेरिका वास्तव में ग्रीनलैंड को अपने अधीन करता है, तो यह क्षेत्रफल के मामले में रूस के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा, और कनाडा पीछे रह जाएगा। लेकिन यह कहानी केवल विस्तार की नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की क्षेत्रीय विस्तार परंपरा से भी जुड़ी हुई है।
अगर ऐसा कोई सौदा भविष्य में होता है, तो इसे 1867 में अलास्का की खरीद के बाद अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा क्षेत्रीय विस्तार माना जाएगा। यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति की विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं, जिन्होंने देश के भौगोलिक दायरे को अपने प्रभावी अंदाज में बढ़ाया, जैसे कि जेम्स के. पोल्क और विलियम मैककिनले ने किया था!
अगर हम अमेरिकी इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह स्पष्ट होता है कि इस देश ने क्षेत्रीय विस्तार को हमेशा राष्ट्रीय शक्ति और सुरक्षा से जोड़ा है। 19वीं सदी में राष्ट्रपति जेम्स के. पोल्क के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने टेक्सास, कैलिफोर्निया और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों पर कब्जा किया। यह विस्तार मैनिफेस्ट डेस्टिनी के सिद्धांत से प्रेरित था, जिसमें यह मान लिया गया था कि अमेरिका का प्रशांत महासागर तक विस्तार उसका नैतिक अधिकार है।
इसके बाद, 1898 में राष्ट्रपति विलियम मैककिनले के शासन में स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद अमेरिका ने फिलीपींस, गुआम और प्यूर्टो रिको का अधिग्रहण किया। यह अमेरिका के महाद्वीप से वैश्विक शक्ति बनने का संकेत था। हालांकि, उस समय भी यह सवाल उठता रहा कि क्या अमेरिका को औपनिवेशिक विस्तार करना चाहिए। खास बात यह है कि ट्रंप मैककिनले के समर्थक रहे हैं और टैरिफ लगाने पर जोर देते हैं।
अब, क्षेत्रीय विस्तार के इस ऐतिहासिक संदर्भ में ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि को समझना आवश्यक है। ग्रीनलैंड की आबादी भले ही 60,000 के आसपास हो, लेकिन यह रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आर्कटिक क्षेत्र में इसकी स्थिति, दुर्लभ खनिज संसाधनों की उपलब्धता और बर्फ पिघलने के बाद खुलने वाले समुद्री मार्ग इसे अमेरिका, रूस और चीन के लिए आकर्षक बनाते हैं। अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति रखता है, लेकिन इसे औपचारिक रूप से अपने अधीन करना एक अलग मामला होगा।
आज की दुनिया 19वीं सदी से भिन्न है, और आधुनिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी क्षेत्र को 'खरीदना' केवल द्विपक्षीय सौदे तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें वहां के निवासियों की सहमति भी आवश्यक होती है; इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक संतुलन भी शामिल होता है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।'
इसलिए, ट्रंप की पोल्क या मैककिनले से तुलना ऐतिहासिक दृष्टि से दिलचस्प है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह कठिन है। फिर भी, जो बहस ट्रंप ने अपने बयानों और सोशल मीडिया पर शुरू की है, वह यह दर्शाती है कि अमेरिकी राजनीति में क्षेत्रीय शक्ति, रणनीतिक प्रभुत्व और ऐतिहासिक विरासत आज भी महत्वपूर्ण हैं।