क्या 'विकसित भारत-जी राम जी' बिल से मजदूरों का रोजगार छिन रहा है?
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नई दिल्ली, 19 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और जेबी माथेर ने आरोप लगाया है कि ‘विकसित भारत-जी राम जी’ के माध्यम से सरकार मजदूरों के रोजगार को छीनने का प्रयास कर रही है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने प्रदूषण पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन सरकार के पास इसके लिए समय नहीं था। जानबूझकर सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई, लेकिन जब गरीबों और मजदूरों के खिलाफ यह बिल लाया गया, तब रात को डेढ़ बजे भी इसे पास करा दिया गया। यह इस सरकार की असली प्राथमिकताएं हैं।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बिल के जरिए करोड़ों मजदूरों के अधिकारों को छीनने की साजिश की जा रही है। पहले राज्यों को 10 प्रतिशत धनराशि प्राप्त होती थी, लेकिन अब यह बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। सरकार ने राज्य सरकारों पर अधिक भार डाल दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकारें पहले से ही लाखों करोड़ों के कर्ज में डूबी हुई हैं, ऐसे में यह योजना सफल नहीं हो सकेगी। यूपीए की सरकार ने देश के मजदूरों को रोजगार की गारंटी दी थी, जिसे यह सरकार छीनना चाहती है। कांग्रेस ने संसद में इसका विरोध किया और सड़क पर भी इसका विरोध जारी रखेगी। जिस तरह किसानों से जुड़े तीन काले कानून वापस लिए गए थे, वैसे ही इसे भी वापस लेना होगा।
प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि प्रदूषण इस सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। इस पर चर्चा होनी थी, लेकिन इससे पहले सदन को स्थगित कर दिया गया। यह एक शर्मनाक स्थिति है, दिल्ली का दम घुट रहा है।
जेबी माथेर ने कहा कि यूपीए सरकार ने गरीबों को रोजगार की गारंटी दी थी, जिसे हटा दिया गया है। महात्मा गांधी का अपमान हुआ है, और यह सब एनडीए की असलियत को उजागर कर रहा है। वे इस योजना को समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन किसान बिल की तरह इसे भी वापस लेना होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत की रोजगार और बेरोजगारी की दर क्या है? युवाओं को अन्य देशों में जाना पड़ रहा है। एक हजार पदों के लिए कितने लोग आवेदन करते हैं, यह आपने देखा है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने यह भी बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अजमेर दरगाह शरीफ में पारंपरिक चादर भेजी है। इस चादर को अल्पसंख्यक समुदाय ले जाएगा। अमन, शांति, और भाईचारे के लिए यह चादर वहां भेजी जा रही है।