मराठी सीखें, पर हिंसा नहीं: CM फडणवीस की महाराष्ट्र दिवस पर दो-टूक चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर मुंबई के हुतात्मा चौक पर मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन भाषाई गौरव की आड़ में हिंसा या डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को राज्य सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। मराठी अनिवार्यता को लेकर रिक्शा यूनियनों के विरोध और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की आक्रामक माँगों के बीच यह बयान महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देता है।
रिक्शा चालकों पर मराठी अनिवार्यता और विवाद
राज्य सरकार ने रिक्शा चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य कर दिया था और जो चालक भाषा नहीं जानते, उन्हें सीखने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के विरोध में रिक्शा यूनियनों ने आंदोलन छेड़ा, जिसके दबाव में सरकार को अनुपालन की समय सीमा अगस्त तक बढ़ानी पड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में भाषाई पहचान को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है।
राज ठाकरे की आलोचना और सरकार का जवाब
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि किसी में मराठी बोलने से इनकार करने की 'हिम्मत' कैसे हो सकती है? उन्होंने सरकार की नरमी की आलोचना करते हुए माँग की कि नियमों का पालन न करने वाले चालकों के परमिट तुरंत रद्द किए जाएँ। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र कभी भी 'संकीर्ण सोच वाला' राज्य नहीं रहा है और राज्य की परंपरा प्रवासियों के बहिष्कार की नहीं रही।
छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र धर्म' किसी के बहिष्कार का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा,