8 अगस्त 2026
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मराठी सीखें, पर हिंसा नहीं: CM फडणवीस की महाराष्ट्र दिवस पर दो-टूक चेतावनी

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मराठी सीखें, पर हिंसा नहीं: CM फडणवीस की महाराष्ट्र दिवस पर दो-टूक चेतावनी

सारांश

महाराष्ट्र दिवस पर CM फडणवीस का दोहरा संदेश — मराठी सीखना ज़रूरी है, लेकिन भाषा की आड़ में हिंसा नहीं चलेगी। रिक्शा चालकों पर मराठी अनिवार्यता के विवाद और राज ठाकरे की आक्रामक माँगों के बीच यह बयान राज्य की भाषाई राजनीति में एक नई लकीर खींचता है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस पर हुतात्मा चौक से भाषाई हिंसा के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी।
सरकार ने रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता की समय सीमा यूनियन विरोध के बाद अगस्त तक बढ़ाई।
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने नियम न मानने वाले चालकों के परमिट तुरंत रद्द करने की माँग की।
फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र धर्म' बहिष्कार का समर्थन नहीं करता।
मुख्यमंत्री ने कहा — मराठी 'सुंदर और सरल' भाषा है, जबरदस्ती नहीं, प्रोत्साहन से सिखाई जाएगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर मुंबई के हुतात्मा चौक पर मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन भाषाई गौरव की आड़ में हिंसा या डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को राज्य सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। मराठी अनिवार्यता को लेकर रिक्शा यूनियनों के विरोध और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की आक्रामक माँगों के बीच यह बयान महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देता है।

रिक्शा चालकों पर मराठी अनिवार्यता और विवाद

राज्य सरकार ने रिक्शा चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य कर दिया था और जो चालक भाषा नहीं जानते, उन्हें सीखने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के विरोध में रिक्शा यूनियनों ने आंदोलन छेड़ा, जिसके दबाव में सरकार को अनुपालन की समय सीमा अगस्त तक बढ़ानी पड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में भाषाई पहचान को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है।

राज ठाकरे की आलोचना और सरकार का जवाब

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि किसी में मराठी बोलने से इनकार करने की 'हिम्मत' कैसे हो सकती है? उन्होंने सरकार की नरमी की आलोचना करते हुए माँग की कि नियमों का पालन न करने वाले चालकों के परमिट तुरंत रद्द किए जाएँ। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र कभी भी 'संकीर्ण सोच वाला' राज्य नहीं रहा है और राज्य की परंपरा प्रवासियों के बहिष्कार की नहीं रही।

छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र धर्म' किसी के बहिष्कार का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ प्रवासी समुदायों और विपक्ष को आश्वासन कि जबरदस्ती नहीं होगी। लेकिन असली सवाल यह है कि जब अगस्त की समय सीमा आएगी और MNS कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे, तब सरकार किस तरफ खड़ी होगी। महाराष्ट्र में भाषाई राजनीति का इतिहास बताता है कि नरम बयानबाजी अक्सर कठोर जमीनी हकीकत से टकराती है। बिना स्पष्ट प्रवर्तन तंत्र के, यह चेतावनी महज़ एक बयान बनकर रह सकती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM फडणवीस ने मराठी भाषा पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस पर कहा कि राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा या भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मराठी को 'सुंदर और सरल' भाषा बताया जिसे प्रोत्साहन से सिखाया जा सकता है।
रिक्शा चालकों पर मराठी अनिवार्यता का विवाद क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने रिक्शा चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य किया था। रिक्शा यूनियनों के विरोध के बाद सरकार ने अनुपालन की समय सीमा अगस्त तक बढ़ा दी। MNS प्रमुख राज ठाकरे ने इस नरमी की आलोचना करते हुए नियम न मानने वाले चालकों के परमिट तुरंत रद्द करने की माँग की।
राज ठाकरे ने सरकार की आलोचना क्यों की?
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि किसी में मराठी बोलने से इनकार करने की 'हिम्मत' कैसे हो सकती है। उन्होंने सरकार की नरम नीति की आलोचना करते हुए माँग की कि नियम न मानने वाले रिक्शा चालकों के परमिट तुरंत रद्द किए जाएँ।
फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज का संदर्भ क्यों दिया?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र धर्म' प्रवासियों के बहिष्कार का समर्थन नहीं करता। यह बयान MNS की कट्टर भाषाई राजनीति के विपरीत एक समावेशी संदेश था।
रिक्शा चालकों के लिए मराठी सीखने की नई समय सीमा क्या है?
यूनियन विरोध के बाद राज्य सरकार ने रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनुपालन की समय सीमा बढ़ाकर अगस्त 2026 कर दी है। इससे पहले यह समय सीमा पहले ही निर्धारित की गई थी, लेकिन व्यापक विरोध के कारण इसे संशोधित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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