अमेरिका की प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में फिर भारत, पेटेंट और आईपी उल्लंघन पर USTR की कड़ी चेतावनी

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अमेरिका की प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में फिर भारत, पेटेंट और आईपी उल्लंघन पर USTR की कड़ी चेतावनी

सारांश

अमेरिका ने भारत को लगातार प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में बनाए रखा है — पेटेंट में देरी, कमज़ोर प्रवर्तन और व्यापार रहस्यों पर कोई समर्पित कानून नहीं। USTR की 2026 रिपोर्ट दर्शाती है कि फार्मा और डिजिटल क्षेत्र में आईपी नीति पर दोनों देशों के बीच की खाई अभी पाटी नहीं जा सकी है।

Key Takeaways

USTR ने 1 मई 2026 को जारी 2026 स्पेशल 301 रिपोर्ट में भारत को प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल किया। भारत के साथ चीन , रूस और इंडोनेशिया भी इस सूची में हैं। पेटेंट अनुमोदन में लंबी देरी, अत्यधिक रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ और विरोध प्रक्रियाएँ प्रमुख चिंताएँ। दवा और कृषि रसायन क्षेत्र में परीक्षण डेटा सुरक्षा की प्रभावी प्रणाली का अभाव। भारत में व्यापार रहस्यों पर कोई समर्पित कानून नहीं। भारत ने 2024 में पेटेंट नियमों में संशोधन किया — USTR ने इसे सकारात्मक लेकिन अपर्याप्त बताया।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 1 मई 2026 को जारी 2026 स्पेशल 301 रिपोर्ट में भारत को एक बार फिर अपनी प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल किया है। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) के प्रवर्तन में लगातार कमियों और पेटेंट संरक्षण में दीर्घकालिक खामियों को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है। रिपोर्ट में भारत के साथ चीन, रूस और इंडोनेशिया को भी इस सूची में रखा गया है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया

USTR की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है,

Point of View

जबकि अमेरिकी फार्मा उद्योग इसे नवाचार-विरोधी मानता है। 2024 के पेटेंट नियम संशोधन एक सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन व्यापार रहस्यों पर कानून का अभाव और कमज़ोर डिजिटल प्रवर्तन दर्शाते हैं कि संरचनात्मक सुधार अभी अधूरे हैं। जब तक भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता में आईपी एजेंडे को ठोस प्रतिबद्धताओं से नहीं जोड़ा जाता, यह सूची अगले साल भी वैसी ही रहने की संभावना है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

अमेरिका की प्रायोरिटी वॉच लिस्ट क्या है और भारत को क्यों शामिल किया गया?
USTR की स्पेशल 301 रिपोर्ट के तहत प्रायोरिटी वॉच लिस्ट उन देशों की वार्षिक सूची है जहाँ आईपी संरक्षण और प्रवर्तन को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं। 2026 में भारत को पेटेंट अनुमोदन में देरी, कमज़ोर प्रवर्तन और डेटा सुरक्षा की कमी के कारण इस सूची में शामिल किया गया है।
भारत के पेटेंट संरक्षण में USTR को क्या समस्याएँ नज़र आईं?
USTR ने पेटेंट अनुमोदन में लंबी देरी, अत्यधिक रिपोर्टिंग आवश्यकताओं, लंबी विरोध प्रक्रियाओं और विशेष रूप से दवा क्षेत्र में पेटेंट योग्य विषयवस्तु पर प्रतिबंधों को प्रमुख समस्याओं के रूप में चिह्नित किया है।
क्या भारत ने आईपी सुधार के लिए कोई कदम उठाए हैं?
हाँ, भारत ने 2024 में पेटेंट नियमों में संशोधन किए जिनका उद्देश्य दक्षता सुधारना और बोझ कम करना था। USTR ने इसे सकारात्मक माना, लेकिन कहा कि समग्र प्रगति एकसमान नहीं है।
इस सूची में भारत के अलावा कौन-से देश हैं?
2026 स्पेशल 301 रिपोर्ट में भारत के साथ चीन, रूस और इंडोनेशिया को भी प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल किया गया है।
इस सूची में शामिल होने से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल देशों पर अमेरिका कड़ी निगरानी रखता है और व्यापार वार्ता तथा व्यापार नीति मंच के ज़रिए दबाव बनाता है। यह सूची फार्मास्यूटिकल्स और डिजिटल क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापार चर्चाओं को प्रभावित कर सकती है।
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