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क्या शुभांशु शुक्ला अपने घर पहुंचे? माता-पिता बोले 'हमारी बात का बेटे ने रखा मान'

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क्या शुभांशु शुक्ला अपने घर पहुंचे? माता-पिता बोले 'हमारी बात का बेटे ने रखा मान'

सारांश

लखनऊ में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के घर पहुंचने पर माता-पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बेटे के आने को लेकर अपनी भावनाएं साझा कीं। शुभांशु की भावुकता और घर के खाने की यादें भी सुनने को मिलीं। जानिए इस दिलचस्प कहानी के बारे में।

मुख्य बातें

शुभांशु शुक्ला का घर लौटना एक भावुक पल है।
परिवार के बीच का प्यार और समर्थन महत्वपूर्ण है।
घर का सामान्य खाना भी खास बन जाता है।
एक भाई की भूमिका परिवार के लिए महत्वपूर्ण होती है।
लखनऊ में एक एयरशो की जरूरत है।

लखनऊ, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने घर पहुंचे। अपने बेटे को देखकर उनके माता-पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा, "हमने बेटे से आने को कहा था और उसने अपनी व्यस्तता के बावजूद समय निकाला, हमारी बात को माना और हमारी मान बढ़ाई।" शुभांशु भी अपने शुभचिंतकों से घिरे हुए काफी भावुक नजर आए।

इस खास मौके पर शुभांशु के माता-पिता ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत की। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पिता शंभु दयाल शुक्ला ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लगा कि मेरा बेटा घर आया। उसके आने के बाद सभी के चेहरे खिल उठे। जैसे ही आसपास के लोगों को पता लगा, सब उससे मिलने के लिए आए। उसने सभी लोगों से बात की। उसका घर आना जरूरी था। हमें बहुत खुशी है। मेरे बेटे से कई विषयों पर चर्चा हुई। जैसे ही उसका कार्यक्रम पूरा होगा, हम बेंगलुरु जाएंगे।

शुभांशु की माता आशा ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लगा कि हमारा बेटा घर आया। मैं लंबे समय से इंतजार कर रही थी। ऐसी स्थिति में हमें लग रहा था कि शायद उसका आना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन, जैसे ही हमें पता लगा कि वह आया है, तो हमारी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। गुरुवार को मैंने अपने बेटे से कहा था कि कैसे भी करके समय निकालकर घर आए और उसने हमारी बात का मान रखा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या आपने अपने बेटे के लिए खास पकवान बनाया था, तो उन्होंने कहा कि नहीं, ऐसा कुछ मैंने नहीं बनाया। हमारे घर में जो भी सामान्य तौर पर बनता है, वही बनाया था। वो तो मेरा बेटा है। जैसा मेरे लिए पहले था, वैसे ही आज भी है। हमें बहुत खुशी हुई कि वो समय निकालकर हमारे बीच आया। हम अपनी खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं।

शुभांशु शुक्ला के चचेरे भाई आशीष ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लगा कि शुभांशु हमारे बीच में आए और अपनी मां का बनाया खाना खाया। उसके लिए मठरियां बनाई गई थीं, जिसे उसने बहुत चाव से खाया। हमने रुकने के लिए कहा, तो उसने कहा कि उसे किसी जरूरी काम से कहीं जाना है। ऐसी स्थिति में उसके लिए अभी यहां पर रुक पाना मुश्किल है। एक भाई होने के नाते मुझे लगता है कि उसे यहां पर आना चाहिए था। वह आया, और हमें बहुत खुशी मिली है। इस दौरान हमने उससे कहा कि लखनऊ में एक एयरशो की जरूरत है। अगर ऐसा करते हैं, तो निश्चित तौर पर इससे आने वाली पीढ़ियों को व्यापक स्तर पर फायदा पहुंचेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस प्रेम और संबंध को भी दर्शाती है जो परिवार के बीच होता है। शुभांशु शुक्ला का घर लौटना उनके परिवार के लिए एक खास पल है। ऐसे क्षण हमारे समाज में पारिवारिक मूल्यों की महत्वपूर्णता को उजागर करते हैं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुभांशु शुक्ला कौन हैं?
शुभांशु शुक्ला एक अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने अंतरिक्ष यात्रा की है।
कब शुभांशु अपने घर पहुंचे?
शुभांशु शुक्ला 29 अगस्त को अपने घर पहुंचे।
उनके माता-पिता ने उनके लौटने पर क्या कहा?
उनके माता-पिता ने उनकी वापसी पर खुशी जाहिर की और कहा कि उन्होंने उनकी बात का मान रखा।
क्या शुभांशु ने कोई विशेष पकवान खाया?
नहीं, उन्होंने सामान्य घर का खाना खाया।
लखनऊ में क्या खास हुआ?
लखनऊ में शुभांशु की घर वापसी पर उनके परिवार और दोस्तों ने उनका स्वागत किया।
राष्ट्र प्रेस
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