लखनऊ में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना से वंदना यादव ने बदली अपनी तक़दीर
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना ने वंदना यादव को आत्मनिर्भर बनाया।
- योजना के तहत बैंक ऑफ इंडिया से ऋण प्राप्त कर ऑयल मिल की स्थापना की।
- स्थानीय ब्रांड के जरिए उत्पाद की मांग बढ़ रही है।
- युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- राज्य सरकार का लक्ष्य हर वर्ष एक लाख नए उद्यमियों का निर्माण करना।
लखनऊ, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना’ का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। इस योजना के माध्यम से लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र की वंदना यादव ने अपनी ऑयल मिल स्थापित कर खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आस-पास के ग्रामीण इलाकों में रोजगार और शुद्ध सरसों के तेल की आपूर्ति का एक नया रास्ता खोला है।
मोहनलालगंज के मजरा खुजेहटा की निवासी वंदना यादव बताती हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री युवा योजना के तहत बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लेकर अपने उद्यम की शुरुआत की। आर्थिक सहायता मिलने के बाद, उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर ऑयल मिल स्थापित की, जहां सरसों का शुद्ध तेल उत्पादित किया जाता है।
वंदना ने अपने उत्पाद के लिए एक स्थानीय ब्रांड भी पेश किया है, जिसकी मांग आस-पास के गांवों और जिलों में लगातार बढ़ रही है। उनकी ऑयल मिल से तैयार सरसों का तेल अब क्षेत्र के कई बाजारों में पहुंच चुका है। इस उद्यम के माध्यम से वंदना केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं हुईं, बल्कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए हैं।
वंदना का कहना है कि राज्य सरकार की इस योजना ने उन्हें आर्थिक सहायता के साथ-साथ उद्यम शुरू करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया है। उनका मानना है कि यदि सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर मिले और उनका लाभ उठाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं बड़े पैमाने पर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को अपने व्यवसाय की शुरुआत के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के पहले चरण में योग्य युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। समय पर ऋण चुकाने वाले उद्यमियों को दूसरे चरण में 10 लाख रुपये तक का ऋण भी दिया जाने की व्यवस्था है। राज्य सरकार का उद्देश्य हर वर्ष एक लाख नए उद्यमियों को तैयार करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिले और प्रदेश में स्वरोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।