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क्या मदर टेरेसा की करुणा और सेवा आज भी जीवित है?

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क्या मदर टेरेसा की करुणा और सेवा आज भी जीवित है?

सारांश

मदर टेरेसा, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, ने अपने जीवन को गरीबों और असहायों की सेवा में समर्पित किया। उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। जानिए उनकी करुणा और सेवा की अमर विरासत के बारे में।

मुख्य बातें

मदर टेरेसा का जीवन मानवता की सेवा में समर्पित था।
उन्होंने कोलकाता में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की।
उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।
उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार और भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
उनका जीवन एक मिसाल है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

नई दिल्ली, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। आन्येज़े गोंजा बोयाजियू को पूरे विश्व में मदर टेरेसा के नाम से जाना जाता है। मैसेडोनिया के स्कोप्जे में २६ अगस्त, १९१० को जन्मी इस महान मानवतावादी और भारत रत्न से सम्मानित मदर टेरेसा ने अपने जीवन का अधिकांश समय गरीबों, असहायों और बीमारों की सेवा में समर्पित किया।

१९५० में, उन्होंने कोलकाता में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की, जो आज भी जरूरतमंदों की सहायता में सक्रिय है। उनके कार्यों ने लाखों लोगों के जीवन में उजाला भर दिया।

कोलकाता की झुग्गियों में कुष्ठ रोगियों, अनाथों और बेघरों की सहायता के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। उनकी सादगी, करुणा और निस्वार्थ सेवा ने उन्हें वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया।

१९७९ में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया, और २००३ में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।

मदर टेरेसा की दी गई शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा था, "हमें बड़े काम करने की आवश्यकता नहीं है, बस छोटे-छोटे कार्यों को बड़े प्रेम से करना चाहिए।" उनकी यह सोच आज भी लोगों को प्रेरित करती है।

कोलकाता में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' के मुख्यालय में उनकी जयंती के अवसर पर विशेष प्रार्थना सभाएं और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश भर में उनके अनुयायी जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। साथ ही, विभिन्न संगठनों द्वारा रक्तदान शिविर, मुफ्त चिकित्सा शिविर और शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

हालांकि, मदर टेरेसा के कार्यों पर कुछ विवाद भी हुए हैं। कुछ आलोचकों ने उनके संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, लेकिन उनकी निस्वार्थ सेवा और गरीबों के प्रति समर्पण को कोई नकार नहीं सकता। उनकी मृत्यु १९९७ में हुई, लेकिन उनकी शिक्षाएं और मिशन आज भी जीवित हैं। २०१६ में वेटिकन ने उन्हें 'संत' की उपाधि दी, जिसने उनके कार्यों को वैश्विक स्तर पर और अधिक सम्मान दिलाया।

आज भी कोलकाता में उनके स्मारक 'निर्मल हृदय' पर हजारों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। आज के इस युग में, जब दुनिया सामाजिक और आर्थिक असमानताओं का सामना कर रही है, मदर टेरेसा का जीवन एक मिसाल है। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आज भी समाज में प्रासंगिक हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदर टेरेसा का असली नाम क्या था?
मदर टेरेसा का असली नाम आन्येज़े गोंजा बोयाजियू था।
मदर टेरेसा ने कब और कहाँ 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की?
मदर टेरेसा ने 1950 में कोलकाता में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की।
उन्हें कब नोबेल शांति पुरस्कार मिला?
मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
मदर टेरेसा का दर्शन क्या था?
उनका दर्शन था कि बड़े काम करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि छोटे कामों को बड़े प्यार से करना चाहिए।
मदर टेरेसा का निधन कब हुआ?
मदर टेरेसा का निधन 1997 में हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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