मध्य प्रदेश 'भ्रष्टाचार की राजधानी' बना: जीतू पटवारी, कफ सिरप से बच्चों की मौत पर सरकार घेरी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 30 सितंबर 2026 को नागपुर में राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अब 'भ्रष्टाचार की राजधानी' बन गया है। छिंदवाड़ा में कफ सिरप के कारण बच्चों की मौत और बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मृत्यु के मामलों को उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही ने राज्य की छवि को गहरी चोट पहुँचाई है।
कफ सिरप से मौत का मामला: क्या है पूरा विवाद
पटवारी ने बताया कि छिंदवाड़ा में कफ सिरप के सेवन से 26 बच्चों की मौत हुई है, हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 100 बताई गई है। मृतकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और स्वतंत्र सत्यापन अब तक नहीं हो सका है। कांग्रेस नेता का आरोप है कि इस घटना ने राज्य में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का 'कथित चेहरा' उजागर किया है।
कांग्रेस की चेतावनियाँ और सरकार की कथित अनदेखी
पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस ने पहले भी कई बार राज्य सरकार को संभावित खतरे के प्रति आगाह किया था और कार्रवाई की माँग की थी। कांग्रेस विधायकों तथा राष्ट्रीय नेताओं ने बालाघाट का दौरा कर स्थानीय हालात का जायजा लिया और बार-बार शिकायतें दर्ज कराईं। उनका आरोप है कि इन चेतावनियों के बावजूद बच्चों की मौत का सिलसिला नहीं रुका और सरकार ने मामले को आवश्यक गंभीरता से नहीं लिया।
राहुल गांधी का बालाघाट दौरा: 1 अक्टूबर को प्रभावित परिवारों से मुलाकात
पटवारी ने बताया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 1 अक्टूबर 2026 को बालाघाट के बैहर और बिरसा के प्रभावित आदिवासी इलाकों का दौरा करेंगे और मृत बच्चों के परिवारों से मिलेंगे। गौरतलब है कि यह 15 दिनों के भीतर उनका दूसरा मध्य प्रदेश दौरा होगा। इससे पहले 19 सितंबर को राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में भाग लेने इंदौर आए थे, जहाँ उन्होंने भी बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर चिंता जताई थी।
जवाबदेही और जाँच की माँग
पटवारी ने बालाघाट और छिंदवाड़ा दोनों मामलों में निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन की जवाबदेही तय होना अनिवार्य है और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता मिलनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पर विपक्ष पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव बना रहा है।
आगे क्या होगा
राहुल गांधी के 1 अक्टूबर के दौरे के साथ यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उठाती रहेगी। प्रभावित परिवारों तक पहुँच और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।