मध्यमहेश्वर धाम 2026: द्वितीय केदार के कपाट 21 मई को खुले, CM धामी ने बताई इस दिव्य स्थल की महिमा

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मध्यमहेश्वर धाम 2026: द्वितीय केदार के कपाट 21 मई को खुले, CM धामी ने बताई इस दिव्य स्थल की महिमा

सारांश

पंच केदारों में द्वितीय केदार मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 21 मई 2026 को खुल गए। 3,497 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर महाभारतकालीन आस्था और हिमालय के अद्भुत सौंदर्य का संगम है। CM धामी ने एक्स पर वीडियो शेयर कर श्रद्धालुओं को दर्शन का न्योता दिया।

मुख्य बातें

मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट 21 मई 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
यह मंदिर पंच केदारों में द्वितीय केदार है, जहाँ भगवान शिव के मध्य (नाभि) भाग की पूजा होती है।
मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के गौंडार गाँव में समुद्र तल से 3,497 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर दर्शन का आह्वान किया।
मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है; मान्यता है कि भीम ने इसका निर्माण कराया था।
मंदिर के पीछे से चौखंबा और केदारनाथ पर्वत चोटियों का विहंगम दृश्य दिखता है।

पंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में विख्यात श्री मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट वर्ष 2026 में 21 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से लगभग 3,497 मीटर (11,473 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह पावन धाम महाभारतकालीन इतिहास, अटूट आस्था और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। कपाट खुलने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दिव्य स्थल की महिमा का बखान करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा किया, जिसमें मंदिर परिसर और उसके आसपास का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। उन्होंने लिखा, 'रुद्रप्रयाग जिले में स्थित श्री मध्यमहेश्वर मंदिर पंच केदारों में दूसरे केदार के रूप में प्रसिद्ध है। यह पवित्र मंदिर ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अगर आप रुद्रप्रयाग जाएं तो इस दिव्य धाम के दर्शन जरूर करें और देवभूमि की आध्यात्मिक शांति व सुंदरता का अनुभव लें।'

मंदिर का महत्व और पौराणिक पृष्ठभूमि

मध्यमहेश्वर मंदिर — जिसे मदमहेश्वर के नाम से भी जाना जाता है — गढ़वाल हिमालय की गोद में स्थित भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है। पंच केदारों की परंपरा में इस मंदिर में भगवान शिव के मध्य भाग (नाभि) की पूजा की जाती है। मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है — मान्यता है कि महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों ने अपने पापों के प्रायश्चित हेतु यहाँ भगवान शिव की उपासना की थी और भीम ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।

स्थान और प्राकृतिक सौंदर्य

यह धाम रुद्रप्रयाग जिले के गौंडार गाँव (मंसूना) में स्थित है। मंदिर के ठीक पीछे चौखंबा और केदारनाथ पर्वत चोटियों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है, जो इसे ट्रेकिंग प्रेमियों और प्रकृति के उपासकों के लिए भी एक आदर्श गंतव्य बनाता है। चौखंबा शिखर की तलहटी में बसे इस स्थान की शांत वादियाँ और हिमाच्छादित चोटियाँ देश-विदेश के श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचती हैं।

कपाट खुलने की परंपरा

मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट प्रतिवर्ष सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं और ग्रीष्म ऋतु के आगमन पर पुनः खोले जाते हैं। वर्ष 2026 में कपाट 21 मई को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। गौरतलब है कि पंच केदार यात्रा उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के समानांतर चलती है और इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई ऊँचाई देती है।

श्रद्धालुओं के लिए जानकारी

मध्यमहेश्वर धाम तक पहुँचने के लिए रांसी बेस कैंप से लगभग 24 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना होता है। यह यात्रा रुद्रप्रयाग होते हुए उखीमठ और फिर रांसी तक सड़क मार्ग से पहुँचकर शुरू होती है। आने वाले सप्ताहों में यात्रा सीजन के पूरे जोर पकड़ने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की सुविचारित रणनीति का हिस्सा भी है। चार धाम यात्रा की रिकॉर्ड भीड़ के बाद अब पंच केदार जैसे कम-चर्चित किंतु उतने ही महत्वपूर्ण तीर्थों को केंद्र में लाना ज़रूरी है। हालाँकि बढ़ते पर्यटन के साथ पर्यावरणीय संतुलन और बुनियादी ढाँचे की चुनौतियाँ भी उतनी ही वास्तविक हैं, जिन पर सरकारी नीति को समान गंभीरता से ध्यान देना होगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्यमहेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
मध्यमहेश्वर मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के गौंडार गाँव में समुद्र तल से लगभग 3,497 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह पंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में पूजित है और यहाँ भगवान शिव के मध्य (नाभि) भाग की आराधना की जाती है।
2026 में मध्यमहेश्वर धाम के कपाट कब खुले?
वर्ष 2026 में मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 21 मई को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मंदिर के कपाट प्रतिवर्ष सर्दियों में बंद होते हैं और ग्रीष्म ऋतु में पुनः खोले जाते हैं।
CM पुष्कर सिंह धामी ने मध्यमहेश्वर मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह मंदिर ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि रुद्रप्रयाग जाएं तो इस दिव्य धाम के दर्शन अवश्य करें।
मध्यमहेश्वर मंदिर का महाभारत से क्या संबंध है?
मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों के प्रायश्चित के लिए यहाँ भगवान शिव की उपासना की थी। परंपरा के अनुसार भीम ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।
मध्यमहेश्वर धाम तक कैसे पहुँचें?
मध्यमहेश्वर धाम तक पहुँचने के लिए रुद्रप्रयाग होते हुए उखीमठ और फिर रांसी बेस कैंप तक सड़क मार्ग से जाना होता है। रांसी से लगभग 24 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करके मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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