महिला आरक्षण विधेयक: भारत सरकार का एक दूरदर्शी और सराहनीय प्रयास - टी.एन. सिंह
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक को 33%25 आरक्षण का प्रावधान है।
- यह विधेयक नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
- सामाजिक व राजनीतिक निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देगा।
- आईआईटी पटना ने वैश्विक रैंकिंग में सुधार किया है।
- प्लेसमेंट प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है।
पटना, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आईआईटी पटना के निदेशक टी.एन. सिंह ने महिला आरक्षण विधेयक पर समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह विधेयक वास्तव में भारत सरकार का एक सराहनीय और दूरदर्शी कदम है। इस विधेयक को वर्ष 2008 में 108वें संविधान संशोधन के रूप में पेश किया गया था, लेकिन सहमति के अभाव में इसे पारित नहीं किया जा सका।
उन्होंने बताया कि अब इतने वर्षों के बाद इसे फिर से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। मेरा मानना है कि यह नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। समाज के समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि महिलाएं केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और नीतिगत निर्णयों में उनकी सक्रिय भागीदारी हो।
टी.एन. सिंह ने कहा कि यह विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि महिलाओं की सोच, अनुभव और भागीदारी कानून निर्माण की प्रक्रिया में बराबरी से शामिल हो। इसलिए यह कदम न केवल सराहनीय है, बल्कि देश के संतुलित और समावेशी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक भी है।
आईआईटी पटना के टॉप 5 में आने को लेकर उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है। यह दूसरी पीढ़ी का आईआईटी है, और हम पिछले 30-40 वर्षों के आईआईटी से थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं। यहाँ विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों का स्नेह और सौहार्द बना रहा है, जिसके कारण हम यह उपलब्धि हासिल कर सके। उन्होंने बताया कि एआई के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य यहाँ हो रहे हैं।
आईआईटी पटना के निदेशक टी.एन. सिंह ने कहा कि हमारी कोशिशों से हमें हर साल वैश्विक रैंकिंग में सुधार हो रहा है। मुझे विश्वास है कि इन संसाधनों और बेहतर प्रयोगशालाओं के विकास से, आईआईटी पटना भविष्य में वैश्विक रैंकिंग में निश्चित रूप से एक बड़ी छलांग लगाएगा।
उन्होंने कहा कि हमने प्लेसमेंट प्रक्रिया को अत्यंत सुगम बना दिया है और इसके लिए हमने एक केंद्र भी स्थापित किया है। इस केंद्र में छात्र, शिक्षक और प्रशासक मिलकर प्लेसमेंट रणनीतियाँ तैयार करते हैं। पिछले वर्ष का रिकॉर्ड है कि 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों को कैंपस से प्लेसमेंट मिला है। इस बार भी हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बड़ी कंपनियाँ कैंपस में आना शुरू कर चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि रिसर्च के क्षेत्र में फैकल्टी की पब्लिकेशन बहुत सराहनीय और उत्कृष्ट हैं। कई विभागों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित हैं। उदाहरण के लिए, हमारे पास संक्षारण और कोटिंग्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ कई प्राइवेट पार्टनर्स भी हमारे साथ काम कर रहे हैं। हम सामग्रियों की मजबूती और लचीलेपन को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि उद्योग को इसका लाभ मिल सके।