महिला आरक्षण विधेयक: आभा सिंह की बडी बात, 'महिलाएं अब राजनीति में कर सकेंगी भागीदारी'

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महिला आरक्षण विधेयक: आभा सिंह की बडी बात, 'महिलाएं अब राजनीति में कर सकेंगी भागीदारी'

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक पर आभा सिंह ने महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह विधेयक कई बार लैप्स हुआ, लेकिन अब इसका समय आ गया है।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना है।
  • यह विधेयक 2010 से चर्चा में है और कई बार लैप्स हो चुका है।
  • इससे लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 813 हो जाएगी।
  • महिलाओं को संसद में अपने मुद्दों पर कानून बनाने का अवसर मिलेगा।
  • विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद, आभा सिंह ने विधेयक का समर्थन किया है।

मुंबई, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रसिद्ध अधिवक्ता आभा सिंह ने महिला आरक्षण विधेयक पर समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा कि यह मुद्दा 2010 से चल रहा है। इस विधेयक को तीन बार लैप्स किया गया है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे लागू किया जाए। यह देश की महिलाओं के लिए एक बड़ी खुशी की बात है।

उन्होंने यह भी कहा कि अब महिलाओं को राजनीति में भागीदारी का मौका मिलेगा। मुझे विश्वास है कि देश की महिलाएं खुश हैं कि वे अब संसद में अपने मुद्दों पर कानून बना सकेंगी। इस विधेयक के प्रभाव से लोकसभा की 543 सीटों से बढ़कर 813 सीटें हो जाएंगी। जिस तरह से भाजपा का माहौल है, ऐसा लगता है कि भाजपा से अधिक महिलाएं जीतकर संसद में आएंगी।

आभा सिंह ने कहा कि विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस विधेयक में केवल एससी-एसटी आरक्षण की बात की गई है, जबकि इसमें ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है। इस मुद्दे को उठाकर विपक्षी पार्टियां वोट प्राप्त करने की कोशिश करेंगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं एक पिछड़े समुदाय का हिस्सा हैं, और उस समुदाय को और तोड़ना सही नहीं है। महिला आरक्षण में कोई अन्य कोटा नहीं होना चाहिए।

वर्तमान में जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वे सभी शिक्षित प्रदेश हैं। केरल और तमिलनाडु ने अपनी जनसंख्या पर नियंत्रण कर लिया है। यदि यह विधेयक लागू होता है, तो इससे जनसंख्या में राहत मिलेगी। इससे महिला आरक्षण में यूपी और बिहार को अधिक सीटें मिल सकती हैं, और जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण किया है, उन्हें नुकसान हो सकता है। हालांकि, राजनीतिक पार्टियों को एकजुट होकर महिलाओं को शक्ति देनी चाहिए।

एनसीपी (एसपी) की नेता और पूर्व सांसद फौजिया खान ने कहा कि जब यह विधेयक पहले संसद में पारित हुआ था, तो हमने एकजुट होकर इसका समर्थन किया था। इसके लिए हम वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।

फौजिया खान ने यह भी कहा कि महिलाओं को संसद में अपने मुद्दे रखने का कितना समय दिया जाता है? यह सबसे बड़ा प्रश्न है।

Point of View

इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। एकजुटता के साथ नारी शक्ति को सशक्त बनाना आवश्यक है।
NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
यह विधेयक कब से चल रहा है?
यह विधेयक 2010 से चल रहा है और इसे कई बार लैप्स किया गया है।
इस विधेयक से लोकसभा में सीटों की संख्या कितनी बढ़ जाएगी?
इस विधेयक के लागू होने से लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 813 हो जाएंगी।
क्या विपक्षी पार्टियों की चिंताएं सही हैं?
विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस विधेयक में केवल एससी-एसटी आरक्षण की बात की गई है, लेकिन आभा सिंह का मानना है कि यह महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
महिला आरक्षण में अन्य कोटा क्यों नहीं होना चाहिए?
आभा सिंह का मानना है कि महिलाएं पहले से ही एक पिछड़े समुदाय का हिस्सा हैं, और उनके लिए कोई अन्य कोटा नहीं होना चाहिए।
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