22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-म्यांमार सीमा बाड़बंदी की समीक्षा: राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने तेजी लाने के दिए निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-म्यांमार सीमा बाड़बंदी की समीक्षा: राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने तेजी लाने के दिए निर्देश

सारांश

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 22 अक्टूबर को भारत-म्यांमार सीमा बाड़बंदी की समीक्षा की और काम में तेजी के निर्देश दिए। 398 किमी लंबी खुली सीमा में से अब तक केवल 50 किमी पर बाड़ लगी है — 80 किमी का काम जारी है।

मुख्य बातें

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 22 अक्टूबर 2026 को लोकभवन, इंफाल में उच्चस्तरीय बैठक में भारत-म्यांमार सीमा बाड़बंदी की समीक्षा की।
मणिपुर के पाँच जिले म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं, जिसका अधिकांश भाग अब भी बिना बाड़ के है।
गृह मंत्रालय ने अब तक 50 किलोमीटर की बाड़बंदी पूरी की है; अगले 80 किलोमीटर का कार्य जारी है।
25 BRTF के कमान अधिकारी कर्नल देव ने बाड़बंदी प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
मणिपुर और मिजोरम गोल्डन ट्रायंगल की निकटता के कारण मादक पदार्थ तस्करी के प्रमुख गलियारे बने हुए हैं।

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 22 अक्टूबर 2026 को लोकभवन, इंफाल में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर भारत-म्यांमार सीमा पर जारी बाड़बंदी कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। लोकभवन के अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल ने इस दौरान सीमा सुरक्षा परियोजना में और गति लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहे

इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह और राज्य गृह आयुक्त एन. अशोक कुमार सहित अतिरिक्त मुख्य सचिव उपस्थित थे। सीमा सड़क कार्य बल (BRTF) और असम राइफल्स के अधिकारी तथा उखरुल के उपायुक्त भी बैठक में शामिल रहे।

चुराचंदपुर, चंदेल और तेंगनुपाल के अतिरिक्त उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से इस बैठक से जुड़े। 25 BRTF के कमान अधिकारी कर्नल देव ने सीमा पर चल रहे बाड़बंदी कार्यों की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

सीमा की वर्तमान स्थिति

मणिपुर के पाँच जिले — चुराचंदपुर, तेंगनुपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जिसका अधिकांश हिस्सा अब तक बिना बाड़ के है। यह खुली सीमा दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।

गौरतलब है कि मिजोरम के छह जिलों और मणिपुर के पाँच जिलों को मिलाकर म्यांमार के साथ कुल 910 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसका अधिकतर भाग बिना बाड़ के होने से तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए संवेदनशील बना रहा है।

बाड़बंदी में अब तक की प्रगति

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक में बताया कि गृह मंत्रालय ने भारत-म्यांमार सीमा पर 50 किलोमीटर की बाड़बंदी पूरी कर ली है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अगले 80 किलोमीटर की बाड़बंदी का कार्य शुरू हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने नीति आयोग को सीमा के बेहतर प्रबंधन, उन्नत निगरानी प्रणालियों और मादक पदार्थों, हथियारों तथा मानव तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया।

गोल्डन ट्रायंगल और तस्करी का खतरा

मणिपुर और मिजोरम की म्यांमार से लगती खुली सीमाएँ तथा विश्व के प्रमुख अवैध मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्र — गोल्डन ट्रायंगल — से निकटता के कारण यह क्षेत्र नशीले पदार्थों की तस्करी का प्रमुख गलियारा बन गया है। म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के कुछ हिस्सों से मिलकर बना गोल्डन ट्रायंगल लंबे समय से मादक दवाओं और मनोरोगी पदार्थों के अवैध उत्पादन एवं तस्करी से जुड़ा रहा है।

इस क्षेत्र से तस्करी होने वाली वस्तुओं में अत्यधिक नशीले मेथम्फेटामाइन टैबलेट, हेरोइन, विदेशी सिगरेट, उर्वरक और अन्य प्रतिबंधित उत्पाद शामिल हैं। सुरक्षा बलों और मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों के लिए सीमा पार तस्करी को रोकना लगातार चुनौती बना हुआ है।

आगे की राह

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर में जातीय तनाव और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों का ध्यान बढ़ा है। 398 किलोमीटर में से अब तक मात्र 50 किलोमीटर बाड़बंदी पूरी होने के आँकड़े बताते हैं कि शेष कार्य अभी भी दूरी पर है — और तेज गति से काम न होने पर सुरक्षा खामियाँ बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्य सवाल यह है कि शेष 348 किलोमीटर के लिए कोई ठोस समयसीमा क्यों नहीं घोषित हुई। जब तक खुली सीमा बनी रहेगी, मेथम्फेटामाइन और हेरोइन की तस्करी पर लगाम लगाने के सारे प्रयास अधूरे रहेंगे — और मणिपुर में सुरक्षा स्थिरीकरण की कोशिशें भी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-म्यांमार सीमा बाड़बंदी परियोजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक सुरक्षा परियोजना है जिसके तहत मणिपुर और मिजोरम से लगती म्यांमार की 910 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाई जानी है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों, अवैध हथियारों और मानव तस्करी को रोकना है।
अब तक कितनी सीमा पर बाड़बंदी पूरी हो चुकी है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार गृह मंत्रालय ने अब तक 50 किलोमीटर की बाड़बंदी पूरी की है और अगले 80 किलोमीटर का कार्य शुरू हो चुका है। मणिपुर अकेले 398 किलोमीटर की सीमा म्यांमार से साझा करता है।
22 अक्टूबर की समीक्षा बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने की। मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह, गृह आयुक्त एन. अशोक कुमार, BRTF और असम राइफल्स के अधिकारी तथा कई जिलों के उपायुक्त उपस्थित या वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
गोल्डन ट्रायंगल और मणिपुर सीमा का क्या संबंध है?
गोल्डन ट्रायंगल — म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के कुछ हिस्सों से बना — विश्व के सबसे बड़े अवैध मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्रों में से एक है। मणिपुर की इससे निकटता और खुली सीमा के कारण यह मेथम्फेटामाइन, हेरोइन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का प्रमुख गलियारा बन गया है।
मणिपुर के किन जिलों की सीमा म्यांमार से लगती है?
मणिपुर के पाँच जिले — चुराचंदपुर, तेंगनुपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। यह पूरी सीमा अब भी मुख्यतः बाड़-रहित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले