मन की बात: पीएम मोदी ने कच्छ की 'फ्लेमिंगो सिटी' को सराहा, राजहंस पक्षियों को बताया 'लाखा जी के बाराती'
सारांश
Key Takeaways
- पीएम नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2025 को मन की बात के 133वें एपिसोड में पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित चर्चा की।
- कच्छ के रण में हर साल मानसून के बाद लाखों फ्लेमिंगो आते हैं, जिससे यह क्षेत्र 'फ्लेमिंगो सिटी' कहलाता है।
- पीएम ने फ्लेमिंगो पक्षियों को 'लाखा जी के बाराती' बताया, जो कच्छ की लोक परंपरा से जुड़ा संबोधन है।
- पूर्वोत्तर भारत में बांस क्षेत्र में हो रही प्रगति को पीएम ने महिला सशक्तीकरण से जोड़ा।
- छत्तीसगढ़ में संरक्षण प्रयासों के कारण काले हिरण एक बार फिर खुले मैदानों में दिखने लगे हैं।
- उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में 'गज मित्र' पहल के जरिए मानव-हाथी संघर्ष कम करने की कोशिश हो रही है।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 26 अप्रैल 2025 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में कच्छ के रण में आने वाले फ्लेमिंगो (राजहंस) पक्षियों की खूबसूरती और उनके संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस क्षेत्र को 'फ्लेमिंगो सिटी' बताते हुए इन पक्षियों को 'लाखा जी के बाराती' की संज्ञा दी, जो कच्छ की लोक परंपरा से जुड़ा एक भावनात्मक संबोधन है।
कच्छ का रण बनता है फ्लेमिंगो का घर
पीएम मोदी ने कहा, "बरसात खत्म होते ही कच्छ के रण की धरती जीवंत हो जाती है। हर साल लाखों फ्लेमिंगो यहां आते हैं और पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है, इसीलिए इसे 'फ्लेमिंगो सिटी' कहा जाता है।" उन्होंने बताया कि ये पक्षी यहीं अपने घोंसले बनाते हैं और अपने बच्चों को पालते-पोसते हैं।
प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोक संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि कच्छ के लोग इन फ्लेमिंगो पक्षियों को 'लाखा जी के बाराती' कहकर पुकारते हैं। यह संबोधन दर्शाता है कि स्थानीय समुदाय ने इन पक्षियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बना लिया है। पीएम मोदी ने कहा कि अब ये पक्षी कच्छ में पर्यावरण संरक्षण के सबसे सुंदर प्रतीक बन चुके हैं।
पूर्वोत्तर की बांस क्रांति और महिला सशक्तीकरण
मन की बात में पीएम मोदी ने पूर्वोत्तर भारत को 'अष्टलक्ष्मी' बताते हुए वहां की प्राकृतिक संपदा और प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से बांस क्षेत्र में पूर्वोत्तर की सफलता का जिक्र किया। उनके अनुसार, जिस बांस को कभी बोझ समझा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और नवाचार का माध्यम बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बांस क्रांति की सबसे बड़ी लाभार्थी माताएं और बहनें हैं, जो इससे आजीविका कमा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह टिप्पणी महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ में काले हिरण की वापसी और UP की 'गज मित्र' पहल
पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ से एक उत्साहजनक खबर साझा की — काले हिरण एक बार फिर खुले मैदानों में दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इनकी संख्या पहले काफी घट गई थी, लेकिन निरंतर संरक्षण प्रयासों के चलते अब इनकी आबादी में वृद्धि हो रही है।
उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री ने 'गज मित्र' जैसी पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि फसल कटाई के मौसम में हाथियों के झुंड गांवों के करीब आ जाते हैं, जिससे टकराव का खतरा रहता है। इस पहल के जरिए इंसानों और हाथियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण की बड़ी तस्वीर
मन की बात का यह 133वां एपिसोड मुख्य रूप से वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन और मानव-प्रकृति सहअस्तित्व पर केंद्रित रहा। कच्छ के फ्लेमिंगो से लेकर छत्तीसगढ़ के काले हिरण और उत्तर प्रदेश के हाथियों तक — प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न कोनों से पर्यावरण सफलता की कहानियां सुनाईं।
उल्लेखनीय है कि कच्छ का रण पहले से ही UNESCO की संभावित विश्व धरोहर स्थलों की सूची में चर्चा में रहा है। फ्लेमिंगो पक्षियों का यहां बड़ी संख्या में आना पारिस्थितिकी स्वास्थ्य का संकेतक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन पक्षियों की उपस्थिति यह बताती है कि क्षेत्र का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है।
आने वाले महीनों में मन की बात के अगले एपिसोड में और भी ऐसी प्रेरक कहानियों की उम्मीद है, जो देश के पर्यावरण, संस्कृति और विकास को एक साथ रेखांकित करें।