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क्वाटरनरी हेल्थकेयर की ओर भारत: LG मनोज सिन्हा ने श्रीनगर समिट में रखा बड़ा विज़न

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क्वाटरनरी हेल्थकेयर की ओर भारत: LG मनोज सिन्हा ने श्रीनगर समिट में रखा बड़ा विज़न

सारांश

श्रीनगर की क्वाटरनरी हेल्थकेयर समिट में LG मनोज सिन्हा ने भारत के लिए एक नया स्वास्थ्य विज़न रखा — टर्शियरी से क्वाटरनरी केयर की छलांग, जिसमें रोबोटिक सर्जरी, जीनोमिक्स और AI डायग्नोस्टिक्स शामिल हों। 56 करोड़ को मुफ्त इलाज के बाद अब अगला पड़ाव एडवांस्ड केयर को हर ज़िले तक पहुँचाना है।

मुख्य बातें

LG मनोज सिन्हा ने 26 अगस्त 2026 को श्रीनगर में क्वाटरनरी हेल्थकेयर और रिसर्च समिट को संबोधित किया।
भारत में 56 करोड़ नागरिकों को मुफ्त इलाज, 7 करोड़ बच्चों का वार्षिक टीकाकरण और 37 करोड़ को ई-संजीवनी सेवा उपलब्ध।
देशभर में 23 एम्स और 2,045 मेडिकल कॉलेज ; जम्मू-कश्मीर में 2 एम्स और 10 मेडिकल कॉलेज ।
सिन्हा ने ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, रोबोटिक सर्जरी, प्रोटॉन-बीम थेरेपी और एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स को अपनाने का आह्वान किया।
जिला अस्पतालों को क्वाटरनरी केंद्रों से जोड़ने के लिए नए 'केयर कॉरिडोर' का प्रस्ताव रखा गया।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 26 अगस्त 2026 को श्रीनगर में आयोजित क्वाटरनरी हेल्थकेयर और रिसर्च समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के लिए अब टर्शियरी हेल्थकेयर की सीमाओं से आगे बढ़कर क्वाटरनरी-लेवल इलाज को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का समय आ गया है। उन्होंने इस समिट को जम्मू-कश्मीर और पूरे भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक निर्णायक मोड़ बताया।

मुख्य घटनाक्रम

सिन्हा ने 2020 में 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम के दौरान अखनूर की अपनी यात्रा का स्मरण किया, जहाँ स्थानीय डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारियों की पहचान के लिए आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता पर बल दिया था। उन्होंने कहा कि उस अनुभव ने छोटे जिला अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और वास्तविक ज़रूरतों के बीच की गहरी खाई को उजागर किया — और इस खाई को पाटना एक राष्ट्रीय दायित्व है।

भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियाँ

उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हासिल की गई स्वास्थ्य उपलब्धियों का उल्लेख किया। इनमें 56 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क इलाज, हर वर्ष 7 करोड़ बच्चों का टीकाकरण अभियान और 37 करोड़ लोगों तक ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा की पहुँच शामिल है। उन्होंने कहा कि ये आँकड़े प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी केयर में भारत की सफलता को दर्शाते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार

सिन्हा ने देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार का विवरण दिया, जिसमें 23 एम्स और 2,045 मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर में विशेष रूप से 2 एम्स, 10 मेडिकल कॉलेज, 2 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, एक बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल, एक पीडियाट्रिक हॉस्पिटल, 52 नर्सिंग कॉलेज, 23 पैरामेडिकल कॉलेज और 5 फार्मेसी कॉलेज स्थापित किए गए हैं।

क्वाटरनरी केयर का रोडमैप

उपराज्यपाल ने अस्पतालों से आग्रह किया कि वे ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, रोबोटिक और प्रिसिजन सर्जरी, एडवांस्ड जीनोमिक्स, सेलुलर थेरेपी और एआई-सपोर्टेड डायग्नोस्टिक्स जैसी अत्याधुनिक सेवाओं में सक्षम रिसर्च केंद्रों में रूपांतरित हों। उन्होंने आधुनिक ऑपरेटिंग थिएटर और प्रोटॉन-बीम थेरेपी जैसी विशेष सुविधाओं के लिए वार्षिक बजट आवंटन की सिफारिश की।

सिन्हा ने एक नए 'केयर कॉरिडोर' का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत टेलीमेडिसिन और एआई-आधारित डायग्नोस्टिक टूल्स के माध्यम से जिला अस्पतालों को सीधे क्वाटरनरी-केयर संस्थानों से जोड़ा जाए। साथ ही उन्होंने ऑन्कोलॉजी, जीनोमिक्स और क्रिटिकल केयर में फेलोशिप और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने की अपील की।

आगे की राह

सिन्हा का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा रैंकिंग में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है। उनका स्पष्ट संदेश था कि एडवांस्ड मेडिकल केयर अब केवल महानगरों का विशेषाधिकार नहीं रहनी चाहिए — इसे देश के हर कोने तक पहुँचाना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। जम्मू-कश्मीर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में प्रोटॉन-बीम थेरेपी और रोबोटिक सर्जरी की बात करना तब तक अधूरी है जब तक ग्रामीण इलाकों में बिजली, इंटरनेट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित न हो। 56 करोड़ को मुफ्त इलाज का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन गुणवत्ता और पहुँच में अभी भी बड़ा अंतर है। बिना जवाबदेही के ढाँचे और वार्षिक ऑडिट के, यह विज़न एक और महत्वाकांक्षी घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्वाटरनरी हेल्थकेयर क्या होती है और यह टर्शियरी से कैसे अलग है?
क्वाटरनरी हेल्थकेयर स्वास्थ्य सेवा का सबसे उन्नत स्तर है, जिसमें ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, जीनोमिक्स, रोबोटिक सर्जरी और प्रोटॉन-बीम थेरेपी जैसी अत्याधुनिक सेवाएँ शामिल हैं। टर्शियरी केयर विशेषज्ञ उपचार तक सीमित होती है, जबकि क्वाटरनरी केयर अनुसंधान और अत्यंत दुर्लभ या जटिल बीमारियों के इलाज पर केंद्रित होती है।
LG मनोज सिन्हा ने श्रीनगर समिट में क्या प्रस्ताव रखे?
सिन्हा ने अस्पतालों को रिसर्च केंद्रों में बदलने, प्रोटॉन-बीम थेरेपी और एआई डायग्नोस्टिक्स के लिए बजट आवंटित करने और जिला अस्पतालों को क्वाटरनरी केंद्रों से जोड़ने वाला 'केयर कॉरिडोर' बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने ऑन्कोलॉजी, जीनोमिक्स और क्रिटिकल केयर में फेलोशिप के अवसर बढ़ाने की भी अपील की।
जम्मू-कश्मीर में अभी कितना मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर है?
जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में 2 एम्स , 10 मेडिकल कॉलेज , 2 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट , एक बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल, एक पीडियाट्रिक हॉस्पिटल, 52 नर्सिंग कॉलेज , 23 पैरामेडिकल कॉलेज और 5 फार्मेसी कॉलेज हैं। यह विस्तार पिछले कुछ वर्षों में हुआ है।
भारत में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन से कितने लोग लाभान्वित हुए हैं?
सिन्हा के अनुसार, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से अब तक 37 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवा मिली है। यह सेवा दूरदराज़ के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुँच सुनिश्चित करने का एक प्रमुख माध्यम बन चुकी है।
क्वाटरनरी हेल्थकेयर का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
यदि यह विज़न लागू होता है, तो जटिल बीमारियों के लिए बड़े महानगरों में जाने की ज़रूरत कम होगी और इलाज स्थानीय स्तर पर सुलभ होगा। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि एडवांस्ड केयर अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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