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मिजोरम में ₹846 करोड़ की ड्रग्स जब्त, 8 महीनों में 930 तस्कर गिरफ्तार

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मिजोरम में ₹846 करोड़ की ड्रग्स जब्त, 8 महीनों में 930 तस्कर गिरफ्तार

सारांश

₹846 करोड़ की ड्रग्स, 930 गिरफ्तारियाँ और 45 मौतें — सिर्फ 8 महीनों में। मिजोरम 910 किलोमीटर बिना बाड़ की सीमा और 'गोल्डन ट्राएंगल' की छाया में नशे की तस्करी से जूझ रहा है। सरकार ने 'स्टेट एक्शन प्लान' लॉन्च किया है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

जनवरी-अगस्त 2026 में मिजोरम में ₹846 करोड़ से अधिक की नशीली दवाएं जब्त की गईं, जिनमें मेथामफेटामाइन और हेरोइन शामिल हैं।
930 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 111 विदेशी नागरिक थे — अधिकांश म्यांमार के।
NDPS अधिनियम के तहत इस अवधि में 635 मामले दर्ज किए गए।
अगस्त 2026 तक ड्रग्स से 45 मौतें (7 महिलाएं); 2025 में पूरे साल 118 मौतें (18 महिलाएं) हुई थीं।
गवर्नर (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने 'स्टेट एक्शन प्लान' को औपचारिक रूप से लॉन्च किया।
मिजोरम-मणिपुर की म्यांमार के साथ 910 किमी बिना बाड़ की सीमा तस्करी का प्रमुख मार्ग बनी हुई है।

मिजोरम पुलिस और सुरक्षा बलों ने जनवरी से अगस्त 2026 के बीच ₹846 करोड़ से अधिक मूल्य की विभिन्न प्रकार की नशीली दवाएं जब्त की हैं, जिनमें अत्यधिक नशे की लत लगाने वाली मेथामफेटामाइन टैबलेट और हेरोइन प्रमुख हैं, और 930 ड्रग तस्करों को हिरासत में लिया है। आइजोल में जारी गृह विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा पूर्वोत्तर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी की गंभीरता को रेखांकित करता है।

गिरफ्तारियाँ और दर्ज मामले

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार 930 लोगों में से 111 विदेशी नागरिक थे, जिनमें से अधिकांश म्यांमार के थे। इसी अवधि में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत कुल 635 मामले दर्ज किए गए।

गौरतलब है कि इन आंकड़ों में विदेशी तस्करों की उल्लेखनीय हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि तस्करी नेटवर्क सीमा पार तक फैला हुआ है और इसे केवल घरेलू प्रवर्तन से नियंत्रित करना सीमित रहेगा।

ड्रग्स से मौतें: चिंताजनक आंकड़े

अधिकारी के अनुसार, अगस्त 2026 तक मिजोरम में नशीली दवाओं के सेवन से 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं। तुलनात्मक रूप से, पूरे 2025 में राज्य में ड्रग्स के कारण 118 लोगों की जान गई थी, जिनमें 18 महिलाएं थीं।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य नशे की बढ़ती लत से जूझ रहे हैं और युवा आबादी सबसे अधिक प्रभावित है।

सरकार की प्रतिक्रिया और 'स्टेट एक्शन प्लान'

मिजोरम के गृह मंत्री के. सपडांगा ने आइजोल में एक जागरूकता अभियान को संबोधित करते हुए कहा कि ड्रग्स बेचने और ले जाने वालों के साथ-साथ इस कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति की कड़ी जांच होनी चाहिए और उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

उन्होंने एनजीओ, चर्च और प्रवर्तन एजेंसियों को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि मिजोरम के गवर्नर (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को औपचारिक रूप से 'स्टेट एक्शन प्लान' लॉन्च किया, जिसे प्रभावी ढंग से लागू करने पर सरकार का विशेष जोर है।

सपडांगा ने यह भी स्पष्ट किया कि नशे की लत से पीड़ित लोगों के साथ सहानुभूति और देखभाल का व्यवहार किया जाना चाहिए ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। उन्होंने त्लांगमावी गांव के निवासियों के नशा-मुक्ति प्रयासों को पूरे राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

सीमा की भौगोलिक चुनौती

मिजोरम और मणिपुर, म्यांमार के साथ 910 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं — मिजोरम के 6 जिले और मणिपुर के 5 जिले इस सीमा से लगे हैं। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े अवैध नशीले पदार्थ उत्पादन क्षेत्र 'गोल्डन ट्राएंगल' के निकट है, जो इसे तस्करी का प्रमुख मार्ग बनाता है।

अधिकारियों के अनुसार, म्यांमार सीमा पर सुरक्षा अभियानों को और तेज करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि ड्रग्स की आवक पर अंकुश लगाया जा सके।

आगे की राह

गृह मंत्री ने शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियानों को विस्तार देने और माता-पिता को बच्चों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। राज्य सरकार का जोर अब केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी को मादक पदार्थ-विरोधी मोर्चे का केंद्र बनाने पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बिना बाड़ की 910 किलोमीटर सीमा को सील किए बिना तस्करी पर स्थायी अंकुश कैसे लगेगा। 'गोल्डन ट्राएंगल' से भौगोलिक निकटता एक संरचनात्मक कमजोरी है जिसे केवल प्रवर्तन से नहीं, बल्कि केंद्र-राज्य समन्वय और सीमा-प्रबंधन में बड़े निवेश से ही दूर किया जा सकता है। यह Nवीं बार है जब 'स्टेट एक्शन प्लान' जैसे दस्तावेज लॉन्च हुए हैं — जब तक इनमें सत्यापन-योग्य लक्ष्य और समयसीमा नहीं होगी, ये आंकड़े हर साल बढ़ते रहेंगे।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिजोरम में 2026 में कितनी ड्रग्स जब्त की गई और कितने लोग गिरफ्तार हुए?
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच मिजोरम में ₹846 करोड़ से अधिक मूल्य की नशीली दवाएं जब्त की गईं और 930 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इनमें मेथामफेटामाइन टैबलेट और हेरोइन प्रमुख नशीले पदार्थ थे।
मिजोरम में ड्रग्स तस्करी इतनी बड़ी समस्या क्यों है?
मिजोरम म्यांमार के साथ 910 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है और दुनिया के प्रमुख अवैध नशीले पदार्थ उत्पादन क्षेत्र 'गोल्डन ट्राएंगल' के निकट है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण यह राज्य तस्करी का बड़ा मार्ग बन गया है।
गिरफ्तार 930 लोगों में विदेशी नागरिक कितने थे?
गृह विभाग के अनुसार 930 गिरफ्तार लोगों में से 111 विदेशी नागरिक थे, जिनमें से अधिकांश म्यांमार के नागरिक थे। यह आंकड़ा सीमापार तस्करी नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है।
मिजोरम में ड्रग्स के सेवन से कितनी मौतें हुई हैं?
अगस्त 2026 तक राज्य में ड्रग्स के सेवन से 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 7 महिलाएं शामिल हैं। इससे पहले पूरे 2025 में 118 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 18 महिलाएं थीं।
मिजोरम का 'स्टेट एक्शन प्लान' क्या है और इसे किसने लॉन्च किया?
यह मिजोरम सरकार का मादक पदार्थ-विरोधी कार्य योजना दस्तावेज है जिसे गवर्नर (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने औपचारिक रूप से लॉन्च किया। इसमें सीमा पर अभियान तेज करने, शिक्षण संस्थानों में जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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