30 अक्टूबर 2026
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बनासकांठा किसान खुद आलू को 'सोना' बना रहे हैं: PM मोदी का राहुल गांधी पर सीधा तंज

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बनासकांठा किसान खुद आलू को 'सोना' बना रहे हैं: PM मोदी का राहुल गांधी पर सीधा तंज

सारांश

मोदी ने भीलड़ी की सभा को राहुल गांधी के 2017 के 'आलू से सोना' वाले बयान की याद दिलाई — और पलटवार किया कि बनासकांठा के किसान यह काम पहले से कर रहे हैं। सनादर संयंत्र का विस्तार और बागवानी क्लस्टर इस दावे की ज़मीन तैयार करते हैं।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को भीलड़ी, गुजरात में सभा को संबोधित करते हुए बनासकांठा के किसानों की कृषि सफलता की सराहना की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 12 नवंबर 2017 के 'आलू अंदर, सोना बाहर' वाले बयान पर सीधा तंज कसा।
सनादर स्थित आलू प्रसंस्करण संयंत्र (फ्रेंच फ्राइज़) के विस्तार का उद्घाटन; किसानों को अतिरिक्त बाज़ार मिलेगा।
बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत 12 क्लस्टर स्वीकृत; 2 क्लस्टर उत्तरी गुजरात में, बनासकांठा व साबरकांठा के किसानों को फायदा।
बनास डेयरी के अनुभव का लाभ अब वाराणसी सहित देश के अन्य हिस्सों तक पहुँच रहा है।
मोदी ने किसानों से पानी और बिजली के संरक्षण का आग्रह किया, नर्मदा जल व ड्रिप सिंचाई को बनासकांठा के कृषि बदलाव का श्रेय दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के भीलड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बनासकांठा जिले के किसानों ने अपनी मेहनत और आधुनिक कृषि पद्धतियों से इस क्षेत्र को देश का प्रमुख आलू उत्पादन केंद्र बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब यहाँ के किसानों को किसी ऐसे नेता की ज़रूरत नहीं जो 'आलू से सोना' बनाने का वादा करे, क्योंकि वे स्वयं अपनी उपज को सोने में तब्दील कर रहे हैं।

राजनीतिक संदर्भ: 'आलू से सोना' वाला पुराना बयान

मोदी का यह तंज सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर था, जिन्होंने 12 नवंबर 2017 को पाटन जिले में एक चुनावी भाषण के दौरान 'आलू अंदर, सोना बाहर' का उल्लेख किया था। यह बयान उस समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया था। मोदी ने अब उसी बयान को गुजरात की कृषि सफलता की कसौटी पर परखते हुए कहा, 'बनासकांठा के आलू अब पूरी दुनिया में मशहूर हैं। किसी को यहाँ आकर यह कहने की जरूरत नहीं कि वे आलू से सोना बना देंगे। यहाँ के लोग खुद कह सकते हैं कि वे पहले से ही ऐसा कर रहे हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात में कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संरचनागत बदलाव आए हैं और विपक्ष लगातार किसानों की आय पर सवाल उठाता रहा है।

नर्मदा जल और ड्रिप सिंचाई: बनासकांठा का कायापलट

प्रधानमंत्री ने बताया कि नर्मदा नदी के पानी की उपलब्धता और ड्रिप सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों ने बनासकांठा के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने स्मरण कराया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने शुरुआती वर्षों में जब उन्होंने किसानों से पानी और बिजली का सदुपयोग करने का आग्रह किया था, तब उन्हें विरोध झेलना पड़ा था।

उन्होंने कहा, 'नर्मदा के पानी की उपलब्धता और सूक्ष्म सिंचाई ने पहले की बाधाओं को दूर करने में मदद की है और क्षेत्र की कृषि संभावनाओं को बदल दिया है।' गौरतलब है कि यह क्षेत्र एक समय सिंचाई की कमी से जूझता था।

सनादर आलू प्रसंस्करण संयंत्र और फ्रेंच फ्राइज़ उद्योग

मोदी ने सनादर स्थित आलू प्रसंस्करण संयंत्र के विस्तार का भी उल्लेख किया, जहाँ फ्रेंच फ्राइज़ तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'विस्तार से संयंत्र की क्षमता बढ़ेगी और किसानों से अधिक आलू खरीदे जा सकेंगे।' यह विस्तार उनकी बनासकांठा यात्रा के दौरान उद्घाटन की गई परियोजनाओं में शामिल था।

यह सुविधा कृषि उत्पादन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़कर आलू उत्पादकों के लिए एक नया और स्थायी बाज़ार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बनास डेयरी और सहकारी आंदोलन का विस्तार

प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी सहकारी समिति की भी सराहना करते हुए कहा कि इसका कार्य अब गुजरात की सीमाओं से बाहर निकलकर देश के अन्य हिस्सों में सहकारी आंदोलन को मज़बूत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का ज़िक्र किया और कहा, 'डेयरी के अनुभव और सेवाओं से उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को भी लाभ हुआ है।'

बागवानी क्लस्टर कार्यक्रम: 12 फसलें, दो क्लस्टर उत्तरी गुजरात में

मोदी ने केंद्र सरकार के बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम की जानकारी दी, जिसके तहत टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोकोआ सहित विभिन्न फसलों के लिए 12 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से दो क्लस्टर उत्तरी गुजरात में हैं, जिनसे बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नए बाग लगाने और पुराने बागों के पुनरुद्धार में सब्सिडी के ज़रिए सहायता प्रदान करना है। इससे खेती को प्रसंस्करण और बाज़ार से जोड़ने का व्यापक प्रयास आगे बढ़ेगा।

आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन पर किसान संगठनों और विशेषज्ञों की नज़र टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आलू उत्पादक किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि उतनी ही ठोस है जितना दावा है। सनादर संयंत्र का विस्तार एक सकारात्मक कदम है, लेकिन खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और किसानों तक पहुँचने वाले मूल्य के बीच का अंतर अक्सर बड़ा रहा है। बागवानी क्लस्टर कार्यक्रम के क्रियान्वयन की गति और उससे किसानों को मिलने वाली वास्तविक सब्सिडी की पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने राहुल गांधी के 'आलू से सोना' वाले बयान पर क्या कहा?
मोदी ने भीलड़ी सभा में कहा कि बनासकांठा के किसानों को किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत नहीं जो 'आलू से सोना बनाने' का वादा करे, क्योंकि वे स्वयं पहले से यह कर रहे हैं। यह तंज राहुल गांधी के 12 नवंबर 2017 के पाटन भाषण में दिए 'आलू अंदर, सोना बाहर' वाले बयान पर था।
बनासकांठा का आलू उत्पादन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
बनासकांठा नर्मदा जल और ड्रिप सिंचाई की बदौलत देश का एक प्रमुख आलू उत्पादन केंद्र बन गया है। सनादर स्थित प्रसंस्करण संयंत्र से किसानों को फ्रेंच फ्राइज़ उद्योग के लिए सीधा बाज़ार मिलता है, जिससे उनकी उपज की माँग बढ़ी है।
सनादर आलू प्रसंस्करण संयंत्र के विस्तार से किसानों को क्या फायदा होगा?
विस्तार के बाद संयंत्र की क्षमता बढ़ेगी और वह किसानों से अधिक मात्रा में आलू खरीद सकेगा। यह कृषि उत्पादन को खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ता है और आलू उत्पादकों के लिए एक अतिरिक्त, स्थायी बाज़ार उपलब्ध कराता है।
बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम क्या है और इसमें कितने क्लस्टर हैं?
यह केंद्र सरकार का कार्यक्रम है जिसके तहत टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोकोआ जैसी फसलों के लिए 12 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 2 उत्तरी गुजरात में हैं, जिनसे बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
बनास डेयरी का वाराणसी से क्या संबंध है?
PM मोदी ने बताया कि बनास डेयरी सहकारी समिति का अनुभव और सेवाएँ अब उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी सहित देश के अन्य हिस्सों में सहकारी आंदोलन को मज़बूत करने में सहायक हो रही हैं। यह गुजरात के सहकारी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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