मोदी सरकार के 12 साल: संजय निरुपम ने गिनाईं उपलब्धियाँ, बेरोज़गारी-महंगाई को भी माना चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने मंगलवार, 26 मई 2026 को मुंबई में एक बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि जनता का मोदी पर भरोसा तीन लगातार चुनावी जनादेशों से सिद्ध होता है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बेरोज़गारी और महंगाई जैसी समस्याएँ अभी भी देश के सामने मौजूद हैं।
तीन जनादेश और जनता का भरोसा
निरुपम ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से मोदी लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं, जो उनके अनुसार जनता की स्वीकार्यता और सरकार के कामकाज पर विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि बार-बार मिले जनादेश यह दर्शाते हैं कि नागरिकों ने सरकार की नीतियों को अपना समर्थन दिया है।
आज़ादी के बाद के लंबित मुद्दों पर कार्रवाई
निरुपम के अनुसार स्वतंत्रता के बाद से कई मुद्दे अनसुलझे पड़े थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को 'एक देश, एक संविधान, एक निशान' की भावना को मज़बूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। नक्सलवाद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक समय देश के लगभग 120 जिलों में यह समस्या गंभीर थी, लेकिन अब इस पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है और प्रभावित इलाकों में विकास कार्य तेज़ हुए हैं। उन्होंने तीन तलाक कानून को भी एक बड़े सामाजिक सुधार के रूप में रेखांकित किया, जिसने मुस्लिम महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और अधिकार दिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इंडिया
बुनियादी ढाँचे की बात करते हुए निरुपम ने दावा किया कि पिछले वर्षों में लगभग 55 हज़ार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए हैं और करीब 99 हज़ार गाँव ग्रामीण सड़कों से जुड़े हैं। वंदे भारत ट्रेनों और एक्सप्रेसवे के विस्तार को उन्होंने देश की प्रगति का प्रतीक बताया। डिजिटल इंडिया और यूपीआई के ज़रिए व्यापक डिजिटल लेनदेन को उन्होंने एक सफल पहल करार दिया। आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आने वाले समय में तीसरे स्थान पर पहुँचने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ कई देशों को प्रभावित कर रही हैं।
यूसीसी और महाराष्ट्र की राजनीति
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता पर निरुपम ने कहा कि यह संविधान निर्माण के समय से चर्चा में रहा विषय है। उनके अनुसार विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे मामलों में पूरे देश के लिए एकसमान कानून होना चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों में इस दिशा में पहल हो चुकी है। जनजातीय समुदायों की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें इससे अलग रखने की सरकारी मंशा का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मराठी भाषा और आगामी चुनाव
महाराष्ट्र के संदर्भ में निरुपम ने कहा कि राज्य में काम करने वाले हर व्यक्ति — चाहे ऑटो चालक हो, टैक्सी ड्राइवर हो या कॉर्पोरेट कर्मचारी — को मराठी भाषा की बुनियादी समझ होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने की पहल चल रही है। आगामी स्थानीय निकाय और विधान परिषद चुनावों के बारे में उन्होंने कहा कि गठबंधन की रणनीति और सीटों के बंटवारे पर सहयोगी दल मिलकर निर्णय लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया रिपोर्टों के आधार पर उम्मीदवारों पर अभी कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की रणनीति आने वाले महीनों में निर्णायक भूमिका निभाएगी।