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क्या मुंबई में एक जालसाज ने खुद को आईपीएस बताकर लोगों को ठगा?

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क्या मुंबई में एक जालसाज ने खुद को आईपीएस बताकर लोगों को ठगा?

सारांश

मुंबई में एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया गया है, जिसने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर कई लोगों को ठगा। जानिए कैसे पुलिस ने इस मामले का पर्दाफाश किया और आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

मुख्य बातें

सतर्क रहना आवश्यक है, खासकर जब कोई अनजान व्यक्ति संपर्क करता है।
फर्जी पहचान का इस्तेमाल गंभीर अपराध है।
पुलिस की तत्परता से अपराधियों को पकड़ा जा सकता है।
सच्चाई का पता लगाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
सामाजिक जागरूकता जरूरी है ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके।

मुंबई, 9 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 2 ने एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो खुद को सीनियर आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था। आरोपी की पहचान संदीप नारायण गोसावी उर्फ संदीप कार्णिक उर्फ दिनेश बोदुलाल दीक्षित के रूप में हुई है। उसे 8 जुलाई को आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204, 318(1)(4), 319(1), 316(2), और 337 के तहत केस दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि वह कई बार अलग-अलग नामों और पहचान के साथ लोगों को ठग चुका है।

पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी किया गया मोबाइल फोन और एक नकली आधार कार्ड भी बरामद किया, जिस पर आरोपी की फोटो और फर्जी नाम "दिनेश बोदुलाल दीक्षित" लिखा था। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे 11 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने कितने और लोगों को ठगा है, उसके कोई साथी थे या नहीं, और फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए। आगे की जांच जारी है।

शिकायतकर्ता नाजिम कासिम ने बताया कि करीब एक साल पहले उनकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को सीनियर आईपीएस अधिकारी बताया और अपना नाम संदीप कार्णिक बताया। वह अक्सर नाजिम की दुकान पर आता था और दावा करता था कि मुंबई पुलिस कमिश्नर ऑफिस के कई अफसर उसे जानते हैं। इससे नाजिम का उस पर विश्वास बढ़ गया।

5 जून को आरोपी ने नाजिम से कहा कि वह नागपुर में अपनी कार में मोबाइल फोन भूल आया है और अस्थायी रूप से इस्तेमाल के लिए एक फोन मांगा। भरोसे में आकर नाजिम ने उसे अपना पुराना फोन दे दिया, लेकिन बाद में जब नाजिम ने अपना फोन वापस मांगा तो आरोपी ने बहाने बनाने शुरू कर दिए और धीरे-धीरे बातचीत बंद कर दी।

आरोपी ने यह भी वादा किया था कि वह फोन के बदले 14 हजार रुपये देगा, लेकिन उसने वह पैसा भी नहीं लौटाया। नाजिम को शक हुआ और जब उसने खुद जानकारी इकट्ठा की, तो पता चला कि वह व्यक्ति असली पुलिस अधिकारी नहीं है और उसने इस तरह से और भी लोगों को ठगा है।

7 जुलाई की रात नाजिम को सूचना मिली कि आरोपी पुलिस कमिश्नर कार्यालय के गेट नंबर 5 के बाहर मौजूद है। उसने तुरंत अपने जान-पहचान के पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को वहीं से पकड़ लिया और क्राइम ब्रांच ऑफिस ले जाया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो हम ऐसे अपराधियों को बेनकाब कर सकते हैं। हमें हमेशा सचेत रहना चाहिए और अपनी पहचान की सुरक्षा करनी चाहिए।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस जालसाज ने कितने लोगों को ठगा?
अभी तक आरोपी ने कितने लोगों को ठगा है, इसकी जांच की जा रही है।
क्या आरोपी ने नकली दस्तावेज बनाए थे?
हां, आरोपी के पास एक नकली आधार कार्ड बरामद किया गया है।
पुलिस ने आरोपी को कब गिरफ्तार किया?
आरोपी को 8 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
क्या आरोपी ने फोन के लिए पैसे लौटाने का वादा किया था?
जी हां, आरोपी ने फोन का बदला 14 हजार रुपये लौटाने का वादा किया था, लेकिन उसने पैसे नहीं लौटाए।
क्या आरोपी के और साथी थे?
पुलिस जांच कर रही है कि आरोपी के कोई साथी थे या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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