मुंबई पब्लिक टॉयलेट में केमिकल गैस से 2 की मौत, पारसी पंचायत गेट के पास हादसा
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के राम मंदिर पूर्व इलाके में 27 सितंबर 2026 की सुबह एक पब्लिक टॉयलेट में केमिकल की तेज गंध से दम घुटने के कारण दो युवकों की मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा पारसी पंचायत गेट के सामने मृणालताई ब्रिज के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय में हुआ। दोनों पीड़ितों को ट्रॉमा केयर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत अवस्था में लाया गया बताया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
स्थानीय लोगों के अनुसार, 27 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे पब्लिक टॉयलेट के भीतर से केमिकल जैसी तीव्र दुर्गंध आने की शिकायत सामने आई। एक नागरिक ने घटना की सूचना संबंधित एजेंसियों को दी। अंदर जाने पर पाया गया कि दो व्यक्ति बेहोश पड़े हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों ने संभवतः केमिकल धुएँ के सीधे संपर्क में आने के कारण होश खोया।
ट्रॉमा केयर अस्पताल के डॉक्टरों ने पुष्टि की कि दोनों पीड़ितों को पहले ही मृत अवस्था में लाया गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, शनिवार रात 3:49 बजे दोनों को आधिकारिक रूप से मृत घोषित किया गया।
मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान 24 वर्षीय प्रभाकर धनिवार और 18 वर्षीय भाविन देसाई के रूप में हुई है। दोनों युवाओं की आकस्मिक मृत्यु से क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है।
राहत एवं जाँच एजेंसियाँ मौके पर
सूचना मिलते ही बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की मुंबई फायर ब्रिगेड (MFB), पुलिस, 108 एंबुलेंस सेवा, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और BMC का वार्ड स्टाफ मौके पर पहुँचा। घटनास्थल को तुरंत सील कर दिया गया और नमूने एकत्र किए जाने लगे।
पुलिस और MPCB की संयुक्त टीम फिलहाल जाँच में जुटी है। पब्लिक टॉयलेट को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
केमिकल का स्रोत अभी अज्ञात
अधिकारियों के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि टॉयलेट के भीतर कौन-सा केमिकल था और वह वहाँ कैसे पहुँचा। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह किसी पाइपलाइन या सेप्टिक टैंक से गैस रिसाव के कारण हुआ, या किसी अन्य कारण से। पुलिस ने कहा है कि जाँच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
गौरतलब है कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और रखरखाव पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में MPCB की प्रयोगशाला रिपोर्ट से केमिकल की प्रकृति और स्रोत के बारे में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।