गोरेगांव गैस लीक: संजय निरुपम का बीएमसी पर हमला, अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट बंद करने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के गोरेगांव पूर्व में एक अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से जहरीली एसिड गैस रिसने के कारण दो युवाओं की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद शिवसेना नेता संजय निरुपम ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मंगलवार, 29 सितंबर को निरुपम ने घटनास्थल पर पहुँचकर स्थानीय नागरिकों से मुलाकात की और मीडिया के सामने अपनी माँगें रखीं।
हादसे का घटनाक्रम
निरुपम ने पत्रकारों को बताया कि गोरेगांव पूर्व स्थित इस फैक्ट्री से खतरनाक एसिड गैस रिसकर बगल के बाथरूम में फैल गई। उन्होंने कहा, 'कल-परसों गोरेगांव पूर्व की इस फैक्ट्री से खतरनाक एसिड गैस बनकर लीक हुआ और बगल के बाथरूम में गया। दो नौजवान बाथरूम के अंदर थे। अंदर ही घुटकर मर गए। बाहर एक बिल्ली थी, वह भी मर गई।' यह हादसा रिहायशी इलाके में चल रही अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों के खतरे को उजागर करता है।
BMC पर लापरवाही के आरोप
निरुपम ने आरोप लगाया कि BMC की आँखों के सामने पिछले 3-4 वर्षों में 40-50 झोपड़े खड़े हो गए, जिनमें इलेक्ट्रोप्लेटिंग की फैक्ट्रियाँ धड़ल्ले से चल रही हैं। उनके अनुसार इन्हीं अवैध ढाँचों में अवैध क्लब और जुए के अड्डे भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिक BMC की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।
तोड़फोड़ की कार्रवाई पर विवाद
निरुपम ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद BMC ने जो तोड़फोड़ अभियान चलाया, उसमें जहर उगलने वाली अवैध फैक्ट्रियों को बख्शा गया और बेगुनाह निवासियों के घर ढहा दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में 50 साल पुराना एक शिव मंदिर भी तोड़ दिया गया, जबकि असली दोषी इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयाँ और अवैध धंधे अब भी बेरोकटोक जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि यह प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
निरुपम की माँगें
निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अतिरिक्त नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को टैग करते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की। उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखीं — रिहायशी इलाकों में चल रही सभी अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिटों को तुरंत बंद किया जाए; लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो; और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
आगे क्या होगा
यह हादसा मुंबई में रिहायशी क्षेत्रों के भीतर चल रहे अवैध औद्योगिक प्रतिष्ठानों की व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएँ पहले भी मुंबई के घनी आबादी वाले इलाकों में सामने आ चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि BMC और महाराष्ट्र सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती हैं और क्या दोषी फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है।