29 सितंबर 2026
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गोरेगांव गैस लीक: संजय निरुपम का बीएमसी पर हमला, अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट बंद करने की माँग

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गोरेगांव गैस लीक: संजय निरुपम का बीएमसी पर हमला, अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट बंद करने की माँग

सारांश

मुंबई के गोरेगांव पूर्व में एक अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से एसिड गैस रिसने से दो युवाओं की मौत ने प्रशासनिक विफलता को उजागर किया। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने BMC पर निशाना साधा — आरोप है कि अवैध फैक्ट्रियाँ छोड़ी गईं और बेगुनाहों के घर तोड़े गए।

मुख्य बातें

गोरेगांव पूर्व, मुंबई में एक अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से जहरीली एसिड गैस रिसने से दो युवाओं की मौत हो गई।
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 29 सितंबर को घटनास्थल का दौरा कर BMC पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।
निरुपम के अनुसार, पिछले 3-4 वर्षों में BMC की नज़रों के सामने 40-50 अवैध झोपड़े खड़े हुए, जिनमें खतरनाक फैक्ट्रियाँ चल रहीं हैं।
हादसे के बाद BMC की तोड़फोड़ कार्रवाई में कथित तौर पर 50 साल पुराना शिव मंदिर ढहाया गया, जबकि अवैध फैक्ट्रियाँ चलती रहीं।
निरुपम ने अतिरिक्त नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को एक्स पर टैग कर तत्काल कार्रवाई, मुआवजे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की।

मुंबई के गोरेगांव पूर्व में एक अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से जहरीली एसिड गैस रिसने के कारण दो युवाओं की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद शिवसेना नेता संजय निरुपम ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मंगलवार, 29 सितंबर को निरुपम ने घटनास्थल पर पहुँचकर स्थानीय नागरिकों से मुलाकात की और मीडिया के सामने अपनी माँगें रखीं।

हादसे का घटनाक्रम

निरुपम ने पत्रकारों को बताया कि गोरेगांव पूर्व स्थित इस फैक्ट्री से खतरनाक एसिड गैस रिसकर बगल के बाथरूम में फैल गई। उन्होंने कहा, 'कल-परसों गोरेगांव पूर्व की इस फैक्ट्री से खतरनाक एसिड गैस बनकर लीक हुआ और बगल के बाथरूम में गया। दो नौजवान बाथरूम के अंदर थे। अंदर ही घुटकर मर गए। बाहर एक बिल्ली थी, वह भी मर गई।' यह हादसा रिहायशी इलाके में चल रही अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों के खतरे को उजागर करता है।

BMC पर लापरवाही के आरोप

निरुपम ने आरोप लगाया कि BMC की आँखों के सामने पिछले 3-4 वर्षों में 40-50 झोपड़े खड़े हो गए, जिनमें इलेक्ट्रोप्लेटिंग की फैक्ट्रियाँ धड़ल्ले से चल रही हैं। उनके अनुसार इन्हीं अवैध ढाँचों में अवैध क्लब और जुए के अड्डे भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिक BMC की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।

तोड़फोड़ की कार्रवाई पर विवाद

निरुपम ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद BMC ने जो तोड़फोड़ अभियान चलाया, उसमें जहर उगलने वाली अवैध फैक्ट्रियों को बख्शा गया और बेगुनाह निवासियों के घर ढहा दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में 50 साल पुराना एक शिव मंदिर भी तोड़ दिया गया, जबकि असली दोषी इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयाँ और अवैध धंधे अब भी बेरोकटोक जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि यह प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

निरुपम की माँगें

निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अतिरिक्त नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को टैग करते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की। उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखीं — रिहायशी इलाकों में चल रही सभी अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिटों को तुरंत बंद किया जाए; लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो; और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।

आगे क्या होगा

यह हादसा मुंबई में रिहायशी क्षेत्रों के भीतर चल रहे अवैध औद्योगिक प्रतिष्ठानों की व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएँ पहले भी मुंबई के घनी आबादी वाले इलाकों में सामने आ चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि BMC और महाराष्ट्र सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती हैं और क्या दोषी फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कार्रवाई तब हुई जब दो जानें चली गईं — और वह कार्रवाई भी विवादास्पद रही। मंदिर तोड़ना और बेगुनाहों के घर ढहाना, जबकि असली दोषी फैक्ट्रियाँ चलती रहें — यह प्रशासनिक जवाबदेही की नहीं, बल्कि दिखावटी कार्रवाई की तस्वीर पेश करता है। जब तक रिहायशी इलाकों में खतरनाक उद्योगों की नियमित और पारदर्शी निगरानी नहीं होगी, ऐसी मौतें महज आँकड़े बनती रहेंगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोरेगांव गैस लीक हादसा क्या है?
मुंबई के गोरेगांव पूर्व में एक अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से जहरीली एसिड गैस रिसकर बगल के बाथरूम में फैल गई, जिससे दो युवाओं की दम घुटने से मौत हो गई। यह हादसा रिहायशी इलाकों में चल रही खतरनाक औद्योगिक इकाइयों के गंभीर खतरे को उजागर करता है।
संजय निरुपम ने BMC पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि BMC की आँखों के सामने पिछले 3-4 वर्षों में 40-50 अवैध झोपड़े बने और उनमें खतरनाक इलेक्ट्रोप्लेटिंग फैक्ट्रियाँ चलती रहीं। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे के बाद की तोड़फोड़ कार्रवाई में अवैध फैक्ट्रियों को छोड़कर बेगुनाहों के घर और एक पुराना मंदिर तोड़ा गया।
निरुपम ने क्या माँगें रखी हैं?
निरुपम ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — रिहायशी इलाकों में सभी अवैध इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिटों को तुरंत बंद किया जाए, लापरवाह अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो, और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
BMC की तोड़फोड़ कार्रवाई विवादास्पद क्यों है?
निरुपम के अनुसार, BMC ने हादसे के बाद जो अभियान चलाया उसमें जहरीली गैस छोड़ने वाली अवैध फैक्ट्रियों को नहीं छुआ गया, बल्कि स्थानीय निवासियों के घर और 50 साल पुराना एक शिव मंदिर तोड़ दिया गया। इसी वजह से स्थानीय नागरिक BMC की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।
इस हादसे में कार्रवाई की माँग किससे की गई है?
निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर BMC की अतिरिक्त नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को टैग करते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने प्रशासन से अवैध इकाइयाँ बंद करने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया है।
राष्ट्र प्रेस
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