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ग्रेसी सिंह: 'लगान' से ऑस्कर नामांकन तक, फिर बॉलीवुड से विदाई — जानें पूरी कहानी

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ग्रेसी सिंह: 'लगान' से ऑस्कर नामांकन तक, फिर बॉलीवुड से विदाई — जानें पूरी कहानी

सारांश

'लगान' से ऑस्कर नामांकन तक पहुँचने वाली ग्रेसी सिंह ने 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'गंगाजल' जैसी ब्लॉकबस्टर दीं — फिर भी शोहरत की दौड़ से बाहर निकल गईं। उनकी कहानी यह बताती है कि सफलता का पैमाना सिर्फ बॉक्स ऑफिस नहीं होता।

मुख्य बातें

ग्रेसी सिंह ने 2001 में 'लगान' से बॉलीवुड में कदम रखा; आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी को व्यापक सराहना मिली।
'लगान' को ऑस्कर की बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म श्रेणी में नामांकन मिला — 'मदर इंडिया' और 'सलाम बॉम्बे' के बाद तीसरी भारतीय फिल्म।
'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'गंगाजल' बड़ी सफलताएँ रहीं; 'अरमान', 'चंचल', 'देशद्रोही' जैसी फिल्में फ्लॉप रहीं।
2015 में टीवी धारावाहिक 'संतोषी मां' से छोटे पर्दे पर वापसी की।
वर्तमान में ग्रेसी सिंह ब्रह्माकुमारीज से जुड़कर आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं और फिल्मी दुनिया से दूर हैं।

अभिनेत्री ग्रेसी सिंह ने 2001 में फिल्म 'लगान: वन्स अपॉन ए टाइम इन इंडिया' से बॉलीवुड में ऐसी दस्तक दी जिसे आज भी याद किया जाता है। आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी और गौरी के किरदार की सादगी ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीता। बावजूद इसके, कई सफल फिल्मों के बाद ग्रेसी सिंह धीरे-धीरे बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर होती चली गईं।

करियर की शुरुआत: मंच से माँग तक

ग्रेसी सिंह ने अपने सफर की नींव एक डांसर के रूप में रखी। वह 'द प्लैनेट्स' डांस ग्रुप के साथ अनेक स्टेज शो और टूर में शामिल रहीं। 1997 में टीवी सीरियल 'अमानत' से उन्होंने अभिनय की दुनिया में पहला कदम रखा। छोटे पर्दे पर पहचान बनाने के बाद निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने उन्हें 'लगान' में चुना, जिसे आमिर खान ने निर्मित किया था।

फिल्म न केवल बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही, बल्कि इसे ऑस्कर की बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म श्रेणी में नामांकन भी मिला — यह सम्मान पाने वाली 'मदर इंडिया' और 'सलाम बॉम्बे' के बाद तीसरी भारतीय फिल्म बनी।

मुख्य घटनाक्रम: सफलता और उतार-चढ़ाव

'लगान' की सफलता के बाद ग्रेसी सिंह ने 'मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'गंगाजल' और 'अरमान' जैसी फिल्मों में काम किया। 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'गंगाजल' दोनों बड़ी व्यावसायिक सफलताएँ रहीं, जबकि 'अरमान' बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी।

इसके बाद 'चंचल', 'देशद्रोही' और 'देख भाई देख' सहित कई फिल्में लगातार फ्लॉप रहीं। इन असफलताओं ने उनके करियर की गति को स्पष्ट रूप से प्रभावित किया और बॉलीवुड में उन्हें पहले जैसी पहचान मिलना बंद हो गई।

क्षेत्रीय सिनेमा और टीवी पर वापसी

हिंदी फिल्मों में सफलता कम होने के बाद ग्रेसी सिंह ने तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, पंजाबी और बंगाली फिल्मों की ओर रुख किया। हालाँकि, वहाँ भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

2015 में उन्होंने टीवी धारावाहिक 'संतोषी मां' से छोटे पर्दे पर वापसी की, जिसमें देवी संतोषी मां के रूप में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और नई पीढ़ी के बीच भी उन्हें पहचान मिली।

आध्यात्मिक जीवन की ओर मोड़

समय के साथ ग्रेसी सिंह आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज से गहराई से जुड़ गईं। वह अपने कई साक्षात्कारों में कह चुकी हैं कि अभिनय उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य कभी नहीं था और सुपरस्टार बनने की कोई विशेष महत्वाकांक्षा उनमें नहीं थी। वह अविवाहित हैं और फिल्मी दुनिया से दूर एक शांत, आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं।

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब बॉलीवुड में 'वापसी' की कहानियाँ अक्सर सुर्खियाँ बनती हैं — ग्रेसी सिंह ने उस रास्ते को चुना जो शोहरत से नहीं, बल्कि आत्मसंतोष से परिभाषित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उद्योग ने उन्हें लगातार फ्लॉप फिल्मों की भेंट चढ़ा दिया। यह सवाल उठता है कि क्या बॉलीवुड का स्टार-सिस्टम प्रतिभाशाली लेकिन 'ग्लैमर-फिट' न दिखने वाली अभिनेत्रियों को वाकई बराबर मौके देता है। ग्रेसी का आध्यात्मिक रास्ता चुनना विफलता नहीं, बल्कि एक सचेत निर्णय था — जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'पलायन' के रूप में पेश करती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेसी सिंह ने बॉलीवुड क्यों छोड़ा?
ग्रेसी सिंह ने कई साक्षात्कारों में कहा है कि अभिनय उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य कभी नहीं था और सुपरस्टार बनने की कोई विशेष इच्छा उनमें नहीं थी। 'अरमान', 'चंचल' और 'देशद्रोही' जैसी फिल्मों की लगातार विफलता के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ गईं।
ग्रेसी सिंह की सबसे बड़ी हिट फिल्में कौन-सी हैं?
'लगान' (2001), 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'गंगाजल' ग्रेसी सिंह की सबसे सफल फिल्में मानी जाती हैं। 'लगान' को ऑस्कर की बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म श्रेणी में नामांकन भी मिला था।
ग्रेसी सिंह ने 'लगान' में कौन-सा किरदार निभाया था?
ग्रेसी सिंह ने 'लगान: वन्स अपॉन ए टाइम इन इंडिया' में गौरी का किरदार निभाया था। आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी और सहज अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा।
ग्रेसी सिंह अब क्या कर रही हैं?
ग्रेसी सिंह अब आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी हुई हैं और फिल्मी दुनिया से दूर एक शांत जीवन जी रही हैं। वह अविवाहित हैं और आत्मसंतोष तथा आध्यात्मिकता को प्राथमिकता देती हैं।
ग्रेसी सिंह ने टीवी पर वापसी कब की?
ग्रेसी सिंह ने 2015 में टीवी धारावाहिक 'संतोषी मां' से छोटे पर्दे पर वापसी की, जिसमें उन्होंने देवी संतोषी मां का किरदार निभाया। इस भूमिका को दर्शकों ने काफी पसंद किया।
राष्ट्र प्रेस
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