मुरादाबाद एमएलसी चुनाव में फर्जी मतदान का आरोप, सपा नेता एसटी हसन ने उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने 23 अक्टूबर 2026 को मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में कथित अनियमितताओं और फर्जी मतदान के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं जो संबंधित शिक्षण संस्थानों में शिक्षक ही नहीं हैं, जिससे चुनाव की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठता है।
मुख्य आरोप और उदाहरण
हसन ने हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज का ठोस उदाहरण देते हुए कहा कि प्रवेश पाल नाम का कोई शिक्षक उस संस्थान में कार्यरत नहीं है, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची के क्रमांक 304 पर दर्ज है और उन्होंने मतदान भी किया। उन्होंने यह भी बताया कि एक शिक्षक का नाम सूची में दो बार दर्ज होने जैसी अनियमितताएं भी सामने आई हैं।
हसन के अनुसार, जो गड़बड़ियाँ लोगों की नजर में आई हैं, वे पूरी समस्या का केवल एक हिस्सा हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कई और अनियमितताएं भी हो सकती हैं जिन पर अभी तक ध्यान नहीं गया।
चुनावी विश्वसनीयता पर सवाल
डॉ. हसन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतदान होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है — चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी भी होनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि चुनाव आयोग सुनिश्चित करे कि केवल पात्र शिक्षक ही मतदान करें, अन्यथा पूरी प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
चुनाव आयुक्त और विपक्षी रणनीति
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान पर भी हसन ने प्रतिक्रिया दी जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया की तुलना सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया से की गई थी। विपक्ष द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव लाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि संसद में बहुमत की स्थिति का विपक्ष को भली-भांति पता है। उन्होंने जोर दिया कि प्रस्ताव लाने का उद्देश्य केवल उसे पारित कराना नहीं, बल्कि यह स्पष्ट करना है कि कौन निष्पक्षता के पक्ष में है और कौन इसके विरुद्ध।
उत्तर प्रदेश चुनाव और जनता की समस्याएं
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में हसन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हिंदू-मुस्लिम मुद्दे उठाकर असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और खाद की किल्लत जैसी ज़मीनी समस्याओं से जूझ रही है। गेहूं की बुवाई के मौसम में खाद की उपलब्धता न होना और डीजल की ऊंची कीमतें किसानों पर दोहरा बोझ डाल रही हैं।
अन्य राजनीतिक मुद्दे और चीन सीमा विवाद
सपा नेता आजम खान की स्थिति के लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराने वाले ओम प्रकाश राजभर के बयान पर हसन ने असहमति जताई और कहा कि अखिलेश यादव आजम खान के समर्थन में लगातार खड़े रहे हैं।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के दिल्ली विरोध-प्रदर्शन की फंडिंग संबंधी आरोपों पर हसन ने कहा कि प्रदर्शन में कोई बड़ी फंडिंग नहीं थी — लोगों ने अपने स्तर पर खर्च उठाया और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर भोजन की व्यवस्था की। उन्होंने पलटवार करते हुए सवाल किया कि क्या आरएसएस की फंडिंग का कभी ऑडिट हुआ है।
देश के विभाजन संबंधी इंद्रेश कुमार के बयान पर हसन ने कहा कि उनके अनुसार विभाजन में मुहम्मद अली जिन्ना और सावरकर की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण थी, जबकि गांधी और नेहरू विभाजन के विरुद्ध थे।
चीन सीमा विवाद पर डॉ. हसन ने आरोप लगाया कि पिछले पाँच वर्षों से चीन भारतीय सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा है और अरुणाचल प्रदेश के कुछ गाँवों पर दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की कि वह सीमा की स्थिति के बारे में देश को स्पष्ट जानकारी दे और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
गौरतलब है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अनियमितताओं के आरोप उत्तर प्रदेश में नए नहीं हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के आरोप राजनीतिक महत्व ग्रहण कर लेते हैं। यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।