23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुरादाबाद एमएलसी चुनाव में फर्जी मतदान का आरोप, सपा नेता एसटी हसन ने उठाए गंभीर सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुरादाबाद एमएलसी चुनाव में फर्जी मतदान का आरोप, सपा नेता एसटी हसन ने उठाए गंभीर सवाल

सारांश

सपा नेता डॉ. एसटी हसन ने मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में फर्जी मतदान का आरोप लगाया — हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज में गैर-शिक्षक के नाम पर वोट पड़ने का ठोस उदाहरण देते हुए उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए।

मुख्य बातें

एसटी हसन ने 23 अक्टूबर 2026 को मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में फर्जी मतदान के आरोप लगाए।
हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज में न पढ़ाने वाले प्रवेश पाल का नाम मतदाता सूची के क्रमांक 304 पर दर्ज होने और उनके द्वारा मतदान करने का दावा किया गया।
एक शिक्षक का नाम सूची में दो बार दर्ज होने की अनियमितता भी सामने आई।
हसन ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP के खिलाफ जनता की नाराजगी — महंगाई, बेरोजगारी, खाद की किल्लत — का हवाला दिया।
चीन द्वारा पिछले पाँच वर्षों से अरुणाचल प्रदेश के गाँवों पर दावे और सीमा अतिक्रमण को लेकर केंद्र सरकार से जवाब माँगा।

समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने 23 अक्टूबर 2026 को मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में कथित अनियमितताओं और फर्जी मतदान के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं जो संबंधित शिक्षण संस्थानों में शिक्षक ही नहीं हैं, जिससे चुनाव की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठता है।

मुख्य आरोप और उदाहरण

हसन ने हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज का ठोस उदाहरण देते हुए कहा कि प्रवेश पाल नाम का कोई शिक्षक उस संस्थान में कार्यरत नहीं है, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची के क्रमांक 304 पर दर्ज है और उन्होंने मतदान भी किया। उन्होंने यह भी बताया कि एक शिक्षक का नाम सूची में दो बार दर्ज होने जैसी अनियमितताएं भी सामने आई हैं।

हसन के अनुसार, जो गड़बड़ियाँ लोगों की नजर में आई हैं, वे पूरी समस्या का केवल एक हिस्सा हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कई और अनियमितताएं भी हो सकती हैं जिन पर अभी तक ध्यान नहीं गया।

चुनावी विश्वसनीयता पर सवाल

डॉ. हसन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतदान होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है — चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी भी होनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि चुनाव आयोग सुनिश्चित करे कि केवल पात्र शिक्षक ही मतदान करें, अन्यथा पूरी प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

चुनाव आयुक्त और विपक्षी रणनीति

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान पर भी हसन ने प्रतिक्रिया दी जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया की तुलना सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया से की गई थी। विपक्ष द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव लाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि संसद में बहुमत की स्थिति का विपक्ष को भली-भांति पता है। उन्होंने जोर दिया कि प्रस्ताव लाने का उद्देश्य केवल उसे पारित कराना नहीं, बल्कि यह स्पष्ट करना है कि कौन निष्पक्षता के पक्ष में है और कौन इसके विरुद्ध।

उत्तर प्रदेश चुनाव और जनता की समस्याएं

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में हसन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हिंदू-मुस्लिम मुद्दे उठाकर असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और खाद की किल्लत जैसी ज़मीनी समस्याओं से जूझ रही है। गेहूं की बुवाई के मौसम में खाद की उपलब्धता न होना और डीजल की ऊंची कीमतें किसानों पर दोहरा बोझ डाल रही हैं।

अन्य राजनीतिक मुद्दे और चीन सीमा विवाद

सपा नेता आजम खान की स्थिति के लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराने वाले ओम प्रकाश राजभर के बयान पर हसन ने असहमति जताई और कहा कि अखिलेश यादव आजम खान के समर्थन में लगातार खड़े रहे हैं।

आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के दिल्ली विरोध-प्रदर्शन की फंडिंग संबंधी आरोपों पर हसन ने कहा कि प्रदर्शन में कोई बड़ी फंडिंग नहीं थी — लोगों ने अपने स्तर पर खर्च उठाया और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर भोजन की व्यवस्था की। उन्होंने पलटवार करते हुए सवाल किया कि क्या आरएसएस की फंडिंग का कभी ऑडिट हुआ है।

देश के विभाजन संबंधी इंद्रेश कुमार के बयान पर हसन ने कहा कि उनके अनुसार विभाजन में मुहम्मद अली जिन्ना और सावरकर की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण थी, जबकि गांधी और नेहरू विभाजन के विरुद्ध थे।

चीन सीमा विवाद पर डॉ. हसन ने आरोप लगाया कि पिछले पाँच वर्षों से चीन भारतीय सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा है और अरुणाचल प्रदेश के कुछ गाँवों पर दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की कि वह सीमा की स्थिति के बारे में देश को स्पष्ट जानकारी दे और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे।

गौरतलब है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अनियमितताओं के आरोप उत्तर प्रदेश में नए नहीं हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के आरोप राजनीतिक महत्व ग्रहण कर लेते हैं। यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग इन शिकायतों की जाँच कितनी गंभीरता से करता है। क्रमांक 304 जैसे ठोस उदाहरण की जाँच अगर सार्वजनिक नहीं हुई, तो यह मामला महज राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगा। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पारदर्शिता की माँग दलगत नहीं, संस्थागत होनी चाहिए।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुरादाबाद एमएलसी चुनाव में फर्जी मतदान का आरोप क्या है?
सपा नेता डॉ. एसटी हसन ने आरोप लगाया है कि मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं जो संबंधित कॉलेज में शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज में प्रवेश पाल नाम के व्यक्ति का उदाहरण दिया जो वहाँ शिक्षक नहीं है, फिर भी उनका नाम क्रमांक 304 पर दर्ज है और उन्होंने मतदान भी किया।
डॉ. एसटी हसन कौन हैं?
डॉ. एसटी हसन समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हैं। वे मुरादाबाद क्षेत्र में पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और अक्सर चुनाव प्रक्रिया एवं सरकारी नीतियों पर मुखर रहते हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र एमएलसी चुनाव में मतदान कौन कर सकता है?
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में केवल वही शिक्षक मतदान कर सकते हैं जो संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कार्यरत हों। हसन के आरोप के अनुसार इस पात्रता की जाँच में गंभीर चूक हुई है।
हसन ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर क्या कहा?
हसन ने कहा कि जनता महंगाई, बेरोजगारी, खाद की किल्लत और डीजल की ऊंची कीमतों से परेशान है। उनके अनुसार भाजपा हिंदू-मुस्लिम मुद्दे उठाकर इन ज़मीनी समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और इसका असर आगामी चुनाव में दिखाई देगा।
हसन ने चीन सीमा विवाद पर क्या आरोप लगाए?
हसन ने आरोप लगाया कि पिछले पाँच वर्षों से चीन भारतीय सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा है और अरुणाचल प्रदेश के कुछ गाँवों पर दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की कि वह सीमा की स्थिति के बारे में देश को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी दे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 8 घंटे पहले
  3. 10 घंटे पहले
  4. कल
  5. 5 दिन पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले