हुमायूं कबीर भाजपा के एजेंट — एसटी हसन का बड़ा आरोप, पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का इल्जाम
सारांश
Key Takeaways
- सपा नेता एसटी हसन ने हुमायूं कबीर को भाजपा का एजेंट बताया और उनके खिलाफ विरोध को उचित ठहराया।
- मुर्शिदाबाद में मतदान के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ, जबकि हुमायूं कबीर के समर्थकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- हुमायूं कबीर का 1,000 करोड़ रुपए वाला वीडियो पूरे देश में वायरल हो चुका है।
- भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद महिलाएं और पुरुष वोट डालने से वंचित रहे।
- चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस दिया, लेकिन भड़काऊ बयानबाजी करने वाले नेताओं पर चुप्पी साधी।
- एसटी हसन ने भाजपा पर बूथ स्तरीय भ्रष्टाचार और हिंदू-मुस्लिम विभाजन की राजनीति का आरोप लगाया।
मुरादाबाद, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता एसटी हसन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान मुर्शिदाबाद जिले में भड़की हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने हुमायूं कबीर को सीधे तौर पर भाजपा का एजेंट करार देते हुए कहा कि पुलिस ने इस पूरे मामले में पूरी तरह एकतरफा कार्रवाई की है। हसन ने स्पष्ट किया कि कानून किसी के भी हाथ में नहीं होना चाहिए, लेकिन सुरक्षा बलों का रवैया भी निष्पक्ष होना अनिवार्य है।
मुर्शिदाबाद हिंसा की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान के दौरान मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए नेता हुमायूं कबीर और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच तीखा टकराव हुआ। यह टकराव बूथ स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा बताया जा रहा है।
मुरादाबाद में राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में एसटी हसन ने कहा कि हुमायूं कबीर का एक वीडियो पूरे देश में वायरल हो चुका है, जिसमें वे 1,000 करोड़ रुपए लेकर मुसलमानों को बांटने की बात कर रहे थे। हसन के अनुसार, यही कारण था कि स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर सवाल
एसटी हसन ने पुलिस की भूमिका पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने केवल टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया, जबकि हुमायूं कबीर के समर्थकों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। यह पक्षपातपूर्ण रवैया लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है।
हसन ने यह भी बताया कि भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद लाठीचार्ज के भय से कई महिलाएं और पुरुष मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए, जो मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार का हनन है।
भाजपा पर भ्रष्टाचार और दादागिरी के आरोप
सपा नेता एसटी हसन ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा अब बूथ स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है और दादागिरी की राजनीति पर उतर आई है। हसन के अनुसार, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के वायरल वीडियो से साफ है कि यह पार्टी ठगों की राजनीति कर रही है।
हसन ने आरोप लगाया कि भाजपा हिंदुत्व और सनातन धर्म की आड़ में केवल हिंदू-मुस्लिम विभाजन की राजनीति कर रही है, जबकि देश के असली मुद्दे — महंगाई, रोजगार, किसान और शिक्षा — पूरी तरह नजरअंदाज हो रहे हैं।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने पर एसटी हसन ने कहा कि आयोग पक्षपाती तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बंगाल में जिन नेताओं ने भड़काऊ बयानबाजी की, उन पर कोई नोटिस क्यों नहीं गया?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार द्वारा मस्जिदों और दरगाहों पर की जा रही कार्रवाई का जिक्र करते हुए हसन ने कहा कि सरकारों को धर्मस्थलों के बजाय जनता की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिलों में मतदान के दौरान हिंसा की घटनाएं राजनीतिक ध्रुवीकरण की गहरी जड़ों को उजागर करती हैं। हुमायूं कबीर का टीएमसी से अलग होकर चुनाव लड़ना और उनके खिलाफ वायरल वीडियो — ये दोनों तथ्य मिलकर बंगाल की जटिल राजनीतिक बिसात की तस्वीर पेश करते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सुरक्षा बलों की जवाबदेही अब बड़े सवाल बनकर उभरी है। आने वाले दिनों में मुर्शिदाबाद हिंसा की न्यायिक जांच और चुनाव परिणाम — दोनों पर देश की नजर बनी रहेगी।