सीता नवमी 2025: अभिजित और विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ-अशुभ समय की पूरी सूची
सारांश
Key Takeaways
- सीता नवमी 2025 का पर्व 25 अप्रैल, शनिवार को मनाया जाएगा।
- अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:53 से 12:46 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:23 बजे तक रहेगा।
- राहुकाल प्रातः 9:03 से 10:41 बजे तक — इस दौरान शुभ कार्य वर्जित।
- ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:19 से 5:02 बजे तक और अमृत काल सायं 6:29 से 8:04 बजे तक रहेगा।
- गंड मूल पूरे दिन और मृत्यु बाण दोपहर 3:51 बजे तक रहेगा।
- माता सीता का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था और उनका विवाह भगवान राम से हुआ था।
नई दिल्ली। सीता नवमी 2025 का पावन पर्व 25 अप्रैल, शनिवार को देशभर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। बैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष इस तिथि पर अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त का दुर्लभ एवं अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है, जो पूजा-अर्चना और शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
सीता नवमी का धार्मिक महत्व
माता सीता पवित्रता, त्याग, सहनशीलता और धैर्य की अद्वितीय प्रतीक हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी सीता का जन्म मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में हुआ था। उनका विवाह भगवान श्रीराम से हुआ, जिनका जन्म चैत्र शुक्ल नवमी अर्थात रामनवमी को हुआ था।
रामनवमी के लगभग एक माह पश्चात आने वाली सीता जयंती पर विवाहित महिलाएं व्रत रखकर अपने पतियों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की मनोकामना करती हैं। माता सीता का आशीर्वाद दांपत्य जीवन को मधुर, परिवार में सुख-शांति और पति-पत्नी के बंधन को सुदृढ़ बनाने वाला माना जाता है।
25 अप्रैल का सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
शनिवार, 25 अप्रैल 2025 को सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 46 मिनट पर होगा और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 53 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 1 बजकर 9 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 26 अप्रैल की रात्रि 2 बजकर 31 मिनट पर होगा।
सीता नवमी के शुभ मुहूर्त
इस वर्ष सीता नवमी पर शुभ मुहूर्तों का विशेष संयोग है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इन दोनों मुहूर्तों में पूजा, व्रत-आरंभ, मंत्र जाप अथवा किसी भी मांगलिक कार्य को करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 19 मिनट से 5 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त सायं 6 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 13 मिनट तक और अमृत काल सायं 6 बजकर 29 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ये सभी समय पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत उत्तम माने जाते हैं।
अशुभ समय — इन घड़ियों में शुभ कार्य न करें
राहुकाल प्रातः 9 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा — इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य या पूजा आरंभ करना वर्जित माना जाता है। यमगंड दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 36 मिनट तक और गुलिक काल प्रातः 5 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
दुर्मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 46 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक तथा 6 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। वर्ज्य समय प्रातः 8 बजकर 57 मिनट से 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।
योग और बाण विचार
आडल योग प्रातः 5 बजकर 46 मिनट से सायं 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। विडाल योग सायं 8 बजकर 4 मिनट से 26 अप्रैल प्रातः 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। गंड मूल पूरे दिन रहेगा। बाण विचार के अनुसार दोपहर 3 बजकर 51 मिनट तक मृत्यु बाण और उसके पश्चात अग्नि बाण रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सीता नवमी पर अभिजित और विजय मुहूर्त का एक साथ आना अत्यंत दुर्लभ और शुभ संकेत है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे राहुकाल और वर्ज्य समय से बचते हुए शुभ मुहूर्तों में ही पूजा-अर्चना और व्रत का संकल्प लें। 26 अप्रैल को नवमी तिथि की समाप्ति के साथ ही दशमी तिथि का शुभारंभ होगा।