क्या मंत्री राम मोहन नायडू के हस्तक्षेप से म्यांमार में फंसे भारतीयों की सफल वापसी हुई?
सारांश
Key Takeaways
- नागरिकों की सुरक्षित वापसी
- मंत्री का त्वरित हस्तक्षेप
- विदेश मंत्रालय की सक्रियता
- सुरक्षा और गरिमा की प्रतिबद्धता
- संकट में भारतीयों को सहायता
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। म्यांमार में फंसे 27 भारतीय नागरिकों की शनिवार को सुरक्षित स्वदेश वापसी संभव हुई। यह नागरिक उड्डयन मंत्री और श्रीकाकुलम के सांसद राम मोहन नायडू के त्वरित हस्तक्षेप का परिणाम है।
राम मोहन नायडू ने इस संदर्भ में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक पत्र भेजकर म्यांमार में फंसे भारतीयों की सुरक्षा के लिए तत्काल राजनयिक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके बाद विदेश मंत्रालय और यांगून स्थित भारतीय दूतावास ने तत्परता से कदम उठाते हुए समन्वित प्रयास किए, जिसके फलस्वरूप सभी प्रभावित नागरिक शनिवार को सुरक्षित रूप से भारत लौट आए।
अपने पत्र में, राम मोहन नायडू ने उन भारतीय नागरिकों की गंभीर स्थिति का उल्लेख किया, जिन्हें झूठे नौकरी के वादों का लालच देकर म्यांमार ले जाया गया और फिर वहां तस्करी की गई। उन्हें जबरदस्ती रोका गया, उनके साथ शारीरिक शोषण किया गया, और उन्हें साइबर स्कैम जैसे अवैध कार्यों में शामिल किया गया। मंत्री ने विदेश मंत्रालय से अपील की थी कि सभी उपलब्ध राजनयिक माध्यमों का उपयोग करते हुए इन नागरिकों के तत्काल बचाव और सुरक्षित स्वदेश वापसी को सुनिश्चित किया जाए।
विदेश मंत्रालय ने इस अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई करते हुए यांगून में भारतीय दूतावास के माध्यम से स्थानीय और संबंधित अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय किया। लगातार प्रयासों के बाद सभी 27 भारतीय नागरिकों को वहां से मुक्त कराया गया और उन्हें सुरक्षित रूप से नई दिल्ली लाया गया। शनिवार को ये सभी नागरिक पहले दिल्ली पहुंचे, जहां से वे अपने-अपने मूल स्थानों की ओर रवाना हो गए ताकि अपने परिवारों से मिल सकें।
स्वदेश लौटने वाले इस समूह में रामू गुन्नुगुकेली, साई कुमार कनकवाला, अजय डुब्बा, जगदेश साहू, ब्रह्माजी अलुगोलू, भुवनेश गंडाबोइना, दिनेश गंडाबोइना, धनुंजय राव गुव्वाला, चीनू दीपक मोरदाबुडी, श्रीहर्ष अल्लू, जयकृष्ण चटाला, जी. रामा कृष्णा, एसए नजमा बेगम, अरुणेंद्र माथी, मस्तान गग्गुतुरी, जेसवंत कुमार रेड्डी, चैतन्य कुमार रेड्डी बंदी, जॉय विग्नन सलगाला, विजय कुमार इसुकापति, साई निकेश देवारा, रमेश पल्लेबोना, राकेश मांटी, तेजस्वसी तुंगा, मुरली, बी. चिन्ना मल्लैया, एम. सुमा लक्ष्मी, और जे. शेखर बाबू शामिल हैं।
इस अवसर पर मंत्री राम मोहन नायडू ने विदेशों में रह रहे प्रत्येक भारतीय नागरिक की सुरक्षा, गरिमा और भलाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संकट में फंसे भारतीयों को हर संभव सहायता प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हों। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की भी सराहना की।