क्या 11 हजार रुद्राक्ष की माला और तन पर भस्म नागा साधु माघ मेले का केंद्र बन गए हैं?

Click to start listening
क्या 11 हजार रुद्राक्ष की माला और तन पर भस्म नागा साधु माघ मेले का केंद्र बन गए हैं?

सारांश

प्रयागराज में माघ मेला आस्था का अद्भुत संगम है, जहाँ 11,000 रुद्राक्ष की माला पहने नागा साधु श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। जानिए इस अद्भुत साधु की कथा और माघ मेले की खासियतें।

Key Takeaways

  • माघ मेला एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है।
  • 11,000 रुद्राक्ष की माला का विशेष महत्व है।
  • नागा साधु श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
  • केदारनाथ और वाराणसी का धार्मिक महत्व है।
  • सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क है।

प्रयागराज, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2025 के महाकुंभ के पश्चात माघ मेला वर्ष का सर्वाधिक विशाल मेला बनकर उभरा है, जहाँ प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुँच रहे हैं।

माघ मेले के संगम तट पर आस्था का एक नया रूप भी देखने को मिल रहा है। साधु और संतों का जमावड़ा तटों पर स्नान कर अनुष्ठानों में लीन दिखाई दे रहा है, और कुछ ऐसे तपस्वी भी नजर आ रहे हैं जो अपनी कठोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए माघ मेले का हिस्सा बने हैं।

हम एक नागा साधु की बात कर रहे हैं, जो 11,000 रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए हैं, ये निरंजनी पंचायती अखाड़ा के दिगंबर अजय गिरि हैं। माघ मेले में उन्हें सिर से लेकर गले तक लंबी-लंबी रुद्राक्ष की माला को धारण करते हुए देखा गया। राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं ज्यादातर केदारनाथ में निवास करता हूँ, और वाराणसी वह स्थान है जहाँ भगवान शिव ने अवतार लिया था। काशी वह नगर है जहाँ मोक्ष की प्राप्ति होती है। माघ मेले के दौरान, देश भर के श्रद्धालु भजन सुनने, गाने और आध्यात्मिक साधनाओं में भाग लेने के लिए एकत्र होते हैं।"

11,000 रुद्राक्ष की माला के विषय में दिगंबर अजय गिरि ने बताया कि 26 वर्ष पूर्व उन्होंने संन्यास लिया था और कुछ वर्षों पूर्व ही 11,000 रुद्राक्ष को धारण किया है। शिव पुराण में भी उल्लेख है कि जो 11,000 रुद्राक्ष की माला धारण करता है, वह भगवान शिव के लिए अत्यंत प्रिय होता है। इस रूप को धारण करने के लिए उन्होंने अपना पिंड दान किया और साधु बनने की राह पर आगे बढ़े हैं।

शरीर पर रमी भस्म के बारे में साधु ने कहा कि भस्म भगवान शिव को प्रिय है और भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए रुद्राक्ष और भस्म दोनों अनिवार्य हैं। भस्म हमेशा यह याद दिलाती है कि जन्म और मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। माघ मेले में नागा साधु और अघोरी बाबा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

वहीं माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अयोध्या सर्कल ऑफिसर आशुतोष तिवारी ने कहा कि अयोध्या में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सभी प्रवेश मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और पूरे मेले क्षेत्र की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है।

Point of View

NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

माघ मेला कहाँ आयोजित होता है?
माघ मेला प्रयागराज में आयोजित होता है।
नागा साधु कौन होते हैं?
नागा साधु वे साधु होते हैं जो कठोर तपस्या करते हैं और भक्ति के प्रतीक होते हैं।
11,000 रुद्राक्ष की माला का क्या महत्व है?
शिव पुराण में 11,000 रुद्राक्ष की माला को भगवान शिव के लिए प्रिय माना गया है।
माघ मेले में श्रद्धालु किस प्रकार की गतिविधियों में भाग लेते हैं?
श्रद्धालु माघ मेले में स्नान, भजन, और आध्यात्मिक साधनाओं में भाग लेते हैं।
माघ मेले में सुरक्षा कैसी होती है?
माघ मेले में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाती है, जिसमें सीसीटीवी कैमरे और पुलिस बल शामिल होते हैं।
Nation Press