नाना पटोले का ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला, एलपीजी संकट को लेकर सरकार को घेरा
सारांश
Key Takeaways
- नाना पटोले का ज्ञानेश कुमार पर विवादित बयान।
- एलपीजी संकट का मुद्दा और सरकार की नाकामी।
- कांग्रेस पार्टी का आंदोलन।
- जनता की आवाज उठाने की कोशिश।
- प्रधानमंत्री से अपील।
मुंबई, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता नाना पटोले एक बार फिर अपने विवादास्पद बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तुलना चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से की है। यह बयान उस समय आया है जब टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का नोटिस पेश किया।
मुंबई में संवाददाता सम्मेलन के दौरान नाना पटोले ने कहा कि हम और पूरा विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एकजुट हैं। उनका कहना है कि ज्ञानेश कुमार ने लोकतांत्रिक प्रणाली को कमजोर किया है। चुनाव आयोग भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए फैसले ले रहा है।
एलपीजी संकट पर नाना पटोले ने गैस सिलेंडर का कटआउट लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुंबई जैसे महानगरों में आधे से अधिक होटल बंद हो चुके हैं, और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को गैस की कमी के कारण अपने गांव लौटना पड़ा है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। घरों में गैस की भी कमी है और कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है। लोगों को 2000 रुपए में गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की सरकार में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जनता की कोई सुनने वाला नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने सभी जिलों में आंदोलन शुरू किया है। विधानसभा में हम सिलेंडर का कटआउट लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और जनहित की आवाज उठा रहे हैं।
सरकार के दावों पर नाना पटोले ने कहा कि अगर गैस की कमी नहीं है, तो मुंबई जैसे शहरों में होटल क्यों बंद हो रहे हैं? बेकरी उद्योग ठप हो गया है, वड़ा पाव पर निर्भर लोग परेशान हैं, क्योंकि दुकानें बंद हो रही हैं और सरकार केवल झूठ बोल रही है। झूठ बोलने से कुछ नहीं होगा; सरकार को वास्तविकता से अवगत कराना होगा।
कांग्रेस नेता ने यह भी चेतावनी दी कि कोरोना से भी बुरी स्थिति उत्पन्न होने वाली है और पेट्रोल-डीजल की भी कमी हो गई है, जो जल्दी ठीक नहीं होने वाली है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे जनता के सामने आएं और उन्हें संकट के समाधान के बारे में आश्वस्त करें, क्योंकि देश और महाराष्ट्र के लोग कठिनाई में हैं।