नाना पटोले ने उरण के जेएनपीए बंदरगाह पर कंटेनरों का किया निरीक्षण, सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- नाना पटोले ने उरण के जेएनपीए बंदरगाह पर कंटेनरों का निरीक्षण किया।
- ईरान, इजराइल और अमेरिका के युद्ध का भारत के आयात-निर्यात पर असर।
- किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का आश्वासन।
- विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने का निर्णय।
- गैस संकट के कारण मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्री पर प्रभाव।
नवी मुंबई, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण अब भारत के आयात-निर्यात पर असर दिखने लगा है। बड़ी मात्रा में सामान कंटेनरों में फंसा हुआ है, जो उरण स्थित जेएनपीए बंदरगाह पर खड़े हैं। इस स्थिति का जायजा लेने के लिए कांग्रेस विधायक नाना पटोले सीधे बंदरगाह पहुंचे और वहां कंटेनरों में अटके सामान का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों स्तर की सरकारें वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं बता रही हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरी जानकारी देंगे और प्रभावित किसानों के नुकसान की भरपाई की मांग करेंगे।
पटोले ने यह भी कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर वह कल विधानसभा में भी चर्चा करेंगे और सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे, ताकि प्रभावित किसानों और व्यापारियों को सहायता मिल सके।
इस बीच, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण गैस और तेल संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। गैस संकट के चलते मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर है। सिरेमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोजभाई ने बताया कि अब तक 100 यूनिट बंद हो चुकी हैं, और अगर गैस की सप्लाई में समस्या जारी रही, तो सभी यूनिट को बंद करना पड़ेगा।
9 मार्च को, विपक्ष ने सरकार से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की बढ़ती कीमतों पर चर्चा की मांग की। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने कहा कि यह मुद्दा सीधे आम लोगों और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, इसलिए इसे संसद में गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा हालात की गंभीरता को देखते हुए संसद में चर्चा आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, ताकि सदन में तुरंत चर्चा हो सके। पार्टी ने लोकसभा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी पेश किया है, लेकिन फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आम लोगों पर पड़ रहा प्रभाव है।