मध्य पूर्व तनाव से प्रभावित, कतर से गेल की एलएनजी सप्लाई हुई बंद, भारत में गैस आपूर्ति पर पड़ेगा असर
सारांश
Key Takeaways
- गेल ने कतर से एलएनजी सप्लाई बंद की।
- भारत में गैस आपूर्ति में कमी संभावित है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन में बाधाएं।
- भारत की गैस पाइपलाइन नेटवर्क में 75%25 बाजार हिस्सेदारी।
- मध्य पूर्व तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित।
नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का प्रभाव अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने पुष्टि की है कि कतर से मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की सप्लाई इस समय पूरी तरह से बंद हो गई है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति समान रही तो डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस आपूर्ति में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनी ने अपने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके दीर्घकालिक सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) ने 3 मार्च को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कतर और भारत के बीच एलएनजी जहाजों के आवागमन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके साथ ही कतर के रास लाफान में स्थित एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट भी संचालन में रुकावट का सामना कर रहा है।
फाइलिंग के अनुसार, पेट्रोनेट के अपस्ट्रीम सप्लायर कतर एनर्जी ने भी क्षेत्र में हालिया सैन्य संघर्ष के कारण संभावित फोर्स मेजर स्थिति की जानकारी दी है। परिणामस्वरूप पेट्रोनेट द्वारा गेल को एलएनजी कोटे को 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है।
गेल ने कहा है कि वह इस स्थिति का आकलन कर रही है और आवश्यकतानुसार अपने ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती के फैसले पर विचार कर सकती है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अन्य स्रोतों से आने वाली एलएनजी सप्लाई अभी प्रभावित नहीं हुई है। कंपनी लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और किसी भी महत्वपूर्ण अपडेट की जानकारी शेयर बाजार को देती रहेगी।
भारत में, गेल लगभग 11,400 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है और देश में गैस ट्रांसमिशन के क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है। यह नेटवर्क कई गैस स्रोतों को बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और अन्य ग्राहकों से जोड़ता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद गुरुवार को थोड़ी नरम हुईं। व्यापारियों के अनुसार, एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमत लगभग 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक गिर गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में अभी भी दोगुनी से अधिक है।
ऊर्जा बाजार में यह उछाल तब आया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद क्षेत्र में तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
बाजार को सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई दुनिया भर में होती है।
रिपोर्टों के मुताबिक, कतर के रास लाफान एलएनजी प्लांट (दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात प्लांट) पर भी परिचालन रोक दिया गया है। इसके अलावा, कुछ एलएनजी टैंकरों ने यूरोप की बजाय एशिया की ओर अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और भी अस्थिर हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है।