27 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नालंदा की वैश्विक विरासत पर यूनेस्को हाउस में 'कॉन्वर्सेशंस ऑन नालंदा', अभय के. ने गिनाई प्राचीन विश्वविद्यालय की खूबियाँ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नालंदा की वैश्विक विरासत पर यूनेस्को हाउस में 'कॉन्वर्सेशंस ऑन नालंदा', अभय के. ने गिनाई प्राचीन विश्वविद्यालय की खूबियाँ

सारांश

नालंदा महाविहार — बोलोनिया से 600 साल पुराना, दक्षिण-पूर्व एशिया की वास्तुकला और दर्शन का जनक — आज भी आधुनिक शिक्षा को दिशा दे सकता है। यूनेस्को हाउस में हुई इस परिचर्चा ने उस विरासत को नए सिरे से रेखांकित किया।

मुख्य बातें

27 अगस्त को नई दिल्ली के यूनेस्को हाउस में 'कॉन्वर्सेशंस ऑन नालंदा' कार्यक्रम आयोजित हुआ।
राजनयिक एवं लेखक अभय के.
ने नालंदा की बहुविषयक शिक्षण प्रणाली और योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परंपरा को आधुनिक शिक्षा के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
नालंदा को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में मानदंड 4 (वास्तुकला परंपरा) और मानदंड 6 (मठ से विश्वविद्यालय का विकास) के आधार पर मान्यता मिली है।
भारत में कुल 45 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें नालंदा भी शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर ने बताया कि नालंदा, बोलोनिया विश्वविद्यालय (स्थापना 1088 ईस्वी) से लगभग 600 वर्ष पुराना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया था।

राजनयिक एवं लेखक अभय के. की पुस्तक 'नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड' पर केंद्रित विशेष परिचर्चा 'कॉन्वर्सेशंस ऑन नालंदा' का आयोजन 27 अगस्त को नई दिल्ली स्थित यूनेस्को हाउस में किया गया। यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में राजनयिकों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और छात्रों ने प्राचीन नालंदा महाविहार की वैश्विक विरासत और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए

दक्षिण एशिया के लिए यूनेस्को प्रमुख टिम कर्टिस ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अज़रबैजान में भारत के राजदूत अभय के., नालंदा विश्वविद्यालय के भाषा एवं साहित्य विद्यालय के प्रोफेसर डी. वेंकट राव, और भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर का स्वागत किया। चर्चा का केंद्र रहा — नालंदा की बहुविषयक शिक्षण परंपरा और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के लिए उससे मिलने वाली प्रेरणा।

अभय के. ने क्या बताया

लेखक अभय के. ने बताया कि नालंदा की शैक्षणिक परंपरा असाधारण रूप से व्यापक थी — यहाँ खगोल विज्ञान, गणित, चिकित्सा, दर्शन और कविता जैसे अनेक विषयों का एक साथ अध्ययन और शोध होता था। उन्होंने कहा कि नालंदा की शिक्षा प्रणाली बहुविषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) थी, जहाँ विविध पृष्ठभूमि के विद्वान पढ़ाते थे और योग्यता के आधार पर छात्रवृत्तियाँ दी जाती थीं। उनके अनुसार, ये विशेषताएँ आज की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती हैं।

यूनेस्को की विश्व धरोहर मान्यता का महत्व

टिम कर्टिस ने रेखांकित किया कि भारत में 45 विश्व धरोहर स्थल हैं और नालंदा को उसके 'असाधारण सार्वभौमिक महत्व' के आधार पर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान दिया गया है। यह मान्यता दो प्रमुख मानदंडों पर आधारित है।

मानदंड 4 के अंतर्गत, नालंदा ने संस्थानों की स्थापना, स्थल नियोजन, वास्तुकला और कलात्मक परंपराओं के ऐसे सिद्धांत स्थापित किए — विशेष रूप से चौकोर विहार संरचना, पंचबिंदु शैली वाले चैत्य, स्टुको कला और धातु कला — जिन्हें बाद में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के अनेक संस्थानों ने अपनाया। मानदंड 6 के अंतर्गत, नालंदा महाविहार उस उच्चतम चरण का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ एक मठवासी संस्था विकसित होकर विश्वविद्यालय बनी — बौद्ध दर्शन, तर्कशास्त्र और गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए।

कर्टिस ने यह भी कहा कि विश्व धरोहर सूची में शामिल होना केवल सम्मानजनक पहचान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।

संयुक्त राष्ट्र का नज़रिया

भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर ने कहा कि नालंदा संयुक्त राष्ट्र के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सीमाओं के पार ज्ञान के आदान-प्रदान की उस शक्ति को दर्शाता है जो समाजों के विकास को आकार देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि यूरोप का सबसे पुराना विश्वविद्यालय बोलोनिया विश्वविद्यालय की स्थापना 1088 ईस्वी में हुई थी, जबकि नालंदा उससे लगभग 600 वर्ष पुराना है।

नालंदा का आधुनिक पुनर्जीवन

चर्चा में राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का भी उल्लेख हुआ, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 में किया था। इसे प्राचीन नालंदा की विरासत को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है। यूनेस्को के असाधारण सार्वभौमिक महत्व के बयान में भी कहा गया है कि नालंदा आज भी क्षेत्र के आधुनिक विश्वविद्यालयों को प्रेरित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना को वैश्विक शैक्षणिक विमर्श से जोड़ती है। हालाँकि असली प्रश्न यह है कि क्या नया नालंदा विश्वविद्यालय अपने प्राचीन पूर्वज की बहुविषयक, खुली-सीमा वाली शिक्षण परंपरा को व्यवहार में उतार पाएगा, या यह महज एक प्रतीकात्मक पुनर्जीवन बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड' पुस्तक किसने लिखी है?
यह पुस्तक भारतीय राजनयिक एवं लेखक अभय के. ने लिखी है, जो वर्तमान में अज़रबैजान में भारत के राजदूत हैं। इस पुस्तक में नालंदा महाविहार की वैश्विक शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत का विस्तार से वर्णन किया गया है।
नालंदा को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा क्यों मिला है?
नालंदा को यूनेस्को ने उसके 'असाधारण सार्वभौमिक महत्व' के आधार पर विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। यह मान्यता दो मानदंडों पर आधारित है — वास्तुकला एवं संस्थागत परंपराओं का क्षेत्रीय प्रसार (मानदंड 4), और मठवासी संस्था से विश्वविद्यालय बनने की अनूठी यात्रा (मानदंड 6)।
नालंदा विश्वविद्यालय का आधुनिक पुनर्जीवन कब और कहाँ हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 में बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। इसे प्राचीन नालंदा की शैक्षणिक विरासत को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
नालंदा, बोलोनिया विश्वविद्यालय से कितना पुराना है?
इटली के बोलोनिया विश्वविद्यालय की स्थापना 1088 ईस्वी में हुई थी, जिसे यूरोप के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। नालंदा उससे लगभग 600 वर्ष पुराना है, जो इसे विश्व के प्राचीनतम उच्च शिक्षा केंद्रों में से एक बनाता है।
'कॉन्वर्सेशंस ऑन नालंदा' कार्यक्रम में किन विषयों पर चर्चा हुई?
इस कार्यक्रम में नालंदा की बहुविषयक शिक्षण प्रणाली, उसकी यूनेस्को विश्व धरोहर मान्यता, आधुनिक शिक्षा के लिए उसकी प्रेरणा, और राजगीर में नए नालंदा विश्वविद्यालय की भूमिका पर विचार साझा किए गए। राजनयिकों, शिक्षाविदों और छात्रों ने इसमें भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले