वाराणसी में 'नमो बुक फेस्ट' शुरू: PM मोदी पर लिखी 500+ किताबें एक मंच पर, 25 साल के सफर का लेखा-जोखा
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 7 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय 'नमो बुक फेस्ट : जेन वी फेस्टिवल' का आगाज़ हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व और सरकारी नीतियों पर लिखी 500 से अधिक पुस्तकें एक ही छत के नीचे प्रदर्शित की गई हैं। यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया है — क्योंकि 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार संवैधानिक पद की शपथ ली थी।
महोत्सव में क्या है खास
इस पुस्तक महोत्सव में केवल जीवनी-शैली की किताबें ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटलाइजेशन और आध्यात्मिकता जैसे विविध विषयों पर लिखे गए ग्रंथ भी शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, इन पुस्तकों को 'डिजिटल इंडिया', 'विकसित भारत' और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई नीतिगत पहलुओं के ब्लू-प्रिंट के रूप में देखा जा रहा है।
फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य इन पुस्तकों में दर्ज विचारों और योजनाओं को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना है। इसीलिए इसे 'जेन वी फेस्टिवल' नाम दिया गया है — यानी वह पीढ़ी जिसके पास दीर्घकालिक राष्ट्रीय विजन है।
आयोजक का उद्देश्य
फेस्टिवल के आयोजक डॉ. पवन विजय ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी पर 500 से अधिक किताबें लिखी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'ये किताबें केवल जीवनी नहीं, बल्कि उनकी योजनाओं का ब्लू-प्रिंट हैं।' डॉ. विजय के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य इन सभी कृतियों का एकीकृत आकलन करते हुए युवाओं को सरकारी नीतियों और दृष्टिकोण से सीधे जोड़ना है।
उन्होंने 7 और 8 अक्टूबर की तारीख चुने जाने के पीछे के कारण का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार संवैधानिक पद संभाला था, और इस प्रकार यह बुक फेस्ट उनके 25 साल के सार्वजनिक जीवन का एक प्रतीकात्मक लेखा-जोखा भी है।
प्रमुख वक्ता और प्रतिभागी
दो दिनों में आयोजित विभिन्न सत्रों में कई लेखक और विशेषज्ञ भाग लेंगे। इनमें प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी, विशाल सहाय और अशोक श्रीवास्तव शामिल हैं, जो विभिन्न पैनल चर्चाओं का हिस्सा बनेंगे। साहित्य के अलावा सिनेमा और रोमांच का भी इस आयोजन में संगम देखने को मिलेगा — फिल्म 'हनुमान अंश' की निर्माता अनुप्रिया नागर और प्रसिद्ध बाइकर कंचन भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी।
25 साल के सफर का प्रतीक
डॉ. विजय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के संवैधानिक कार्यकाल का असली मूल्यांकन जनता कर रही है। उन्होंने कहा, 'जनता ने ही उन्हें लगातार 25 साल तक संवैधानिक पदों पर काम करने का अवसर दिया है — यह जन-विश्वास का प्रतीक है।' यह आयोजन उसी जनविश्वास और नीतिगत विमर्श को पुस्तकों के माध्यम से केंद्रित करने का प्रयास है।
यह महोत्सव 8 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा, जिसके बाद आयोजक इसे अन्य शहरों में भी ले जाने की योजना पर विचार कर रहे हैं।