25 पैसे में दिलाई थी जनसंघ की सदस्यता: PM मोदी के पुराने साथी अंबालाल कोष्टी की यादें
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात भाजपा की लाइब्रेरी की देखरेख करने वाले अंबालाल कोष्टी ने 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके शुरुआती राजनीतिक और संगठनात्मक जीवन की अनेक यादें साझा कीं। कोष्टी ने बताया कि उन्होंने ही छात्र जीवन में मात्र 25 पैसे सदस्यता शुल्क लेकर नरेंद्र मोदी को भारतीय जनसंघ का सदस्य बनाया था और बाद में उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ने में भी सहायता की।
पहली मुलाकात और जनसंघ में प्रवेश
कोष्टी के अनुसार, नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात तब हुई जब वे गुजरात स्टेट ट्रांसपोर्ट से जुड़े एक आंदोलन के दौरान धरने पर बैठे थे। उस दौरान मोदी गुजरात स्टेट कॉर्पोरेशन की कैंटीन में अपने परिचितों के साथ बैठा करते थे, और इसी स्थान पर दोनों के बीच पहली बातचीत हुई।
कोष्टी ने बताया, 'उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा और ज्ञान से मैं प्रभावित हुआ। मुझे लगा कि यह लड़का हमारे साथ काम करने के लिए तैयार है। इसलिए मैंने उनसे दोस्ती की और उन्हें पार्टी से जोड़ने का फैसला किया।' पहली मुलाकात के करीब 25 दिन बाद मोदी पहली बार कोष्टी के घर आए। उस समय कोष्टी कांकरिया वार्ड के महामंत्री थे और उन्होंने 25 पैसे सदस्यता शुल्क लेकर नरेंद्र मोदी को भारतीय जनसंघ का सदस्य बनाया।
RSS से जुड़ाव और संगठन के शुरुआती दिन
कोष्टी ने बताया कि जनसंघ में काम करते हुए नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने की इच्छा जताई। इसके बाद कोष्टी उन्हें संघ कार्यालय लेकर गए, जहाँ उस समय 'वकील साहब' संगठन का कामकाज देखते थे। वहाँ मोदी से बातचीत हुई और उन्हें संघ की गतिविधियों से जोड़ लिया गया।
कोष्टी ने कहा, 'मैं कांकरिया वार्ड का जनरल सेक्रेटरी था। कांकरिया में संघ कार्यालय पर शाखा चलाता था और सारंगपुर केरी पीठा में भी एक शाखा का संचालन करता था। उस समय संघ कार्यालय में नरेंद्र भाई के साथ भी काम किया। हमने साथ में कबड्डी खेली और एक ही साइकिल पर साथ-साथ यात्रा की।'
कार्यकर्ता जीवन की सादगी और समर्पण
कोष्टी ने बताया कि संघ के शुरुआती दिनों में मोदी ने संगठन के लिए व्यापक प्रवास किया। वे एक झोले में कुछ कपड़े लेकर निकल जाते थे और जहाँ रहने की व्यवस्था होती, वहीं रुक जाते थे। झाड़ू लगाना और अपने कपड़े खुद धोना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कोष्टी के अनुसार उस दौर में प्रवास के दौरान जो भोजन मिल जाता, मोदी उसी से संतुष्ट हो जाते थे।
कोष्टी ने यह भी उल्लेख किया कि जब वे दोनों साइकिल से घूमते थे, उस समय गुजरात में कांग्रेस का मजबूत जनाधार था। इसके बावजूद जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वोट प्रतिशत में मामूली बढ़ोतरी भी कार्यकर्ताओं के लिए खुशी का अवसर होती थी। गौरतलब है कि उस दौर में किसी ने नहीं सोचा था कि नरेंद्र मोदी एक दिन देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।
25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा पर भावुक प्रतिक्रिया
कोष्टी ने बताया कि 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और इसके बाद से सरकार के प्रमुख के तौर पर उन्होंने 25 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने इसे भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने वाला दिन बताया।
अपने पुराने मित्र को याद करते हुए भावुक हुए कोष्टी ने कहा, 'नरेंद्र मोदी को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मैं उन्हें बहुत आशीर्वाद देता हूँ। मैं अपनी आयु भी उन्हें देता हूँ। आज नरेंद्र भाई पूरे विश्व में चमक रहे हैं।' यह संस्मरण भारतीय राजनीति के सबसे लंबे सार्वजनिक करियरों में से एक की साधारण शुरुआत का दुर्लभ मानवीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।