दुर्गा पूजा 2026: पश्चिम बंगाल में BJP लगाएगी 1,500 पुस्तक स्टॉल, मोदी के 25 साल पर किताबें होंगी उपलब्ध
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर पश्चिम बंगाल के प्रमुख पूजा पंडालों के निकट 1,500 पुस्तक स्टॉल स्थापित करने जा रही है। इन स्टॉलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासक के रूप में 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, हिंदू धर्म की शिक्षाओं और राष्ट्रवादी विचारधारा से संबंधित पुस्तकें प्रमुखता से रखी जाएंगी। BJP की राज्य समिति के एक सदस्य के अनुसार, यह पहल पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह बंगाल के सबसे बड़े त्योहार को राजनीतिक और वैचारिक जागरूकता का मंच बनाना चाहती है।
स्टॉलों पर क्या-क्या मिलेगा
BJP की राज्य समिति के सदस्य ने बताया कि पार्टी के पुस्तक स्टॉलों पर प्रायः हिंदू धर्म की शिक्षाओं, राष्ट्रवादी विचारधारा और पार्टी की वैचारिक पृष्ठभूमि से जुड़ी पुस्तकों की सर्वाधिक माँग रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर आधारित पुस्तकें भी स्टॉलों पर प्रदर्शित की जाएंगी।
इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल की BJP सरकार की विभिन्न परियोजनाओं एवं उपलब्धियों पर विशेष पुस्तिकाएँ तैयार की गई हैं, जिन्हें आगंतुकों के बीच निःशुल्क वितरित किया जाएगा।
पहले पाँच महीनों की उपलब्धियों का ब्यौरा
पश्चिम बंगाल में BJP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के पहले पाँच महीनों की उपलब्धियों को दर्शाने वाली पुस्तिकाएँ भी इन स्टॉलों पर उपलब्ध होंगी। पार्टी सदस्य के अनुसार इन पुस्तिकाओं में राज्य में आए निवेश, सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों की संख्या, प्रशासनिक सुधारों और महिला सुरक्षा तथा आर्थिक सशक्तीकरण पर किए गए कार्यों का विवरण दिया जाएगा। पार्टी का स्पष्ट उद्देश्य इन पुस्तिकाओं के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे आम नागरिकों तक पहुँचाना है।
माकपा भी मैदान में, बदलेगा पुस्तकों का दायरा
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा भी राज्य के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों के पास पुस्तक स्टॉल लगाने की तैयारी कर रही है। वामपंथी दलों के लिए त्योहारों के दौरान राजनीतिक साहित्य का प्रचार-प्रसार करना एक पुरानी परंपरा रही है। हालाँकि, इस बार माकपा परंपरागत मार्क्सवादी साहित्य के साथ-साथ लोकप्रिय बंगाली लेखकों की पुस्तकें भी स्टॉलों पर रखने की योजना बना रही है — यह उसके पाठक-आधार को व्यापक करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक संदेश और सांस्कृतिक मंच
गौरतलब है कि दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव है, जिसमें लाखों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए यह पंडाल-परिसर जनता से सीधे संवाद का सबसे सुलभ माध्यम बन जाता है। BJP और माकपा दोनों की एक साथ इस मैदान में उपस्थिति यह दर्शाती है कि बंगाल में वैचारिक प्रतिस्पर्धा का नया मोर्चा सांस्कृतिक उत्सवों के बीच खुलता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन स्टॉलों पर आमजन की प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है।