खड़गे की टिप्पणी पर NDA का पलटवार: 'बिहार में 50 साल से नहीं है कांग्रेस का वजूद'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के वरिष्ठ एनडीए (NDA) नेताओं ने 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव और जनता दल (यूनाइटेड) — जेडीयू — के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने एक साथ कांग्रेस की राजनीतिक प्रासंगिकता और आंतरिक कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब बिहार की राजनीति में NDA और विपक्षी गठबंधन के बीच वाकयुद्ध तेज़ हो रहा है।
मंत्री रामकृपाल यादव का हमला
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने खड़गे की टिप्पणी को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बयान कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष की सोच को उजागर करता है। उनके अनुसार, 'कांग्रेस की यही राजनीतिक संस्कृति है और इसी कारण पार्टी पहले ही अपना जनाधार खो चुकी है।'
यादव ने कांग्रेस की एक बैठक में कम उपस्थिति का हवाला देते हुए कहा कि खड़गे की बैठक में पार्टी के कार्यकर्ता तक नहीं पहुँचे और 'खाली कुर्सियाँ और बेंच दिखाई दे रही थीं।' उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में पिछले 50 वर्षों से कांग्रेस का कोई खास राजनीतिक वजूद नहीं रहा है।
जेडीयू का परिवारवाद पर आरोप
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस शुरू से ही परिवारवादी राजनीति में डूबी रही है और वह इससे कभी बाहर नहीं निकल सकती।'
रजक के अनुसार, कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष या अन्य महत्वपूर्ण पदों पर वही लोग पहुँच सकते हैं जो पार्टी के एक परिवार के प्रति समर्पित हों। उनका यह बयान कांग्रेस की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकता है।
दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्याम रजक ने कहा कि सनातन और हिंदू अलग-अलग विषय हैं और यह एक लंबी बहस का विषय है जिसे एक शब्द में नहीं समेटा जा सकता। रजक ने दिग्विजय सिंह को सलाह दी कि 'उन्हें राजनीति के माध्यम से परिपक्व होना चाहिए और शंकराचार्य बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।'
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि बिहार में कांग्रेस की स्थिति लंबे समय से कमज़ोर रही है और पार्टी यहाँ अपने दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है। NDA नेताओं की यह प्रतिक्रिया खड़गे की टिप्पणी को केंद्र में रखकर विपक्षी एकता पर सवाल उठाने की रणनीतिक कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। आने वाले समय में बिहार की राजनीति में इस बयानबाजी का असर देखना दिलचस्प होगा।