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शिल्पा कुमारी का ओलंपिक सपना: नीरज चोपड़ा से प्रेरित झारखंड की जैवलिन स्टार

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शिल्पा कुमारी का ओलंपिक सपना: नीरज चोपड़ा से प्रेरित झारखंड की जैवलिन स्टार

सारांश

गुमला के एक किसान परिवार की बेटी शिल्पा कुमारी ने नीरज चोपड़ा को टोक्यो में स्वर्ण जीतते देख जैवलिन थामी — और अब वह अंडर-17 नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं। डकार यूथ ओलंपिक्स 2026 उनका पहला बड़ा मंच होगा, और निशाना है ओलंपिक पोडियम।

मुख्य बातें

शिल्पा कुमारी झारखंड के गुमला जिले के किसान परिवार से हैं और महिला अंडर-17 जैवलिन में मौजूदा नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं।
उन्होंने 2025 के 69वें नेशनल स्कूल गेम्स में 55.62 मीटर का थ्रो दर्ज किया, लेकिन AFI ने इसे आधिकारिक मान्यता नहीं दी।
आधिकारिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2025 जूनियर नेशनल्स में 45.90 मीटर , जिसमें लगभग 10 मीटर का सुधार दर्ज हुआ।
कोच बिनोद सिंह ने तीन साल पहले रांची SAI सेंटर में ट्रायल के दौरान शिल्पा की प्रतिभा पहचानी।
समर यूथ ओलंपिक्स 2026 , 31 अक्टूबर से 13 नवंबर तक डकार, सेनेगल में, शिल्पा का निकटतम बड़ा लक्ष्य है।
शिल्पा ने कहा कि वे अपना ओलंपिक पदक नीरज चोपड़ा को समर्पित करेंगी।

झारखंड के गुमला जिले के एक सुदूर किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली युवा जैवलिन थ्रोअर शिल्पा कुमारी ने स्पष्ट शब्दों में अपना लक्ष्य घोषित किया है — ओलंपिक पदक जीतना और भारत की शीर्ष महिला जैवलिन एथलीट बनना। उनकी इस महत्वाकांक्षा की जड़ें उस ऐतिहासिक पल में हैं जब उन्होंने अपने गाँव की चौपाल पर टेलीविजन पर नीरज चोपड़ा को टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतते देखा था।

नीरज चोपड़ा से मिली प्रेरणा

शिल्पा ने बताया, 'मैंने नीरज चोपड़ा को ओलंपिक्स में स्वर्ण जीतते देखा। इससे मुझे जेवलिन खेलने की प्रेरणा मिली। मैं भी उनकी तरह ओलंपिक पदक जीतना चाहती हूँ। जब मैंने अपने गाँव के लोगों को नीरज चोपड़ा की जीत का जश्न मनाते देखा, तो मैंने तय कर लिया कि जैवलिन में ओलंपिक पदक जीतना ही मेरी ज़िंदगी का मकसद होगा।' यह वह क्षण था जिसने एक किसान की बेटी को एक एथलीट में बदल दिया।

साई सेंटर और कोच बिनोद सिंह की भूमिका

रांची स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) सेंटर में एक एथलेटिक्स ट्रायल के दौरान कोच बिनोद सिंह की नज़र शिल्पा पर पड़ी। सिंह ने कहा, 'जब मैंने तीन साल पहले हमारे SAI सेंटर में एक ट्रायल के दौरान उन्हें पहली बार देखा, तो मैं उनकी प्रतिभा से प्रभावित हुआ। उस समय, वह बिल्कुल नई थीं। लेकिन मैंने उन्हें इसलिए चुना क्योंकि उन्होंने बहुत अच्छी थ्रोइंग काबिलियत दिखाई।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं उनमें संभावना देख सकता था और मुझे एहसास हुआ कि वह भविष्य के लिए एक बहुत अच्छी उम्मीद हैं।'

कोच सिंह ने शिल्पा के परिवार की आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'शिल्पा के माता-पिता किसान हैं और उनके पास खेल करियर के लिए ज़रूरी मदद देने के साधन नहीं हैं। SAI की दी हुई सुविधाओं, ट्रेनिंग, उपकरण, डाइट वगैरह ने ही मुझे एक अनगढ़ रत्न को चमकते हीरे में बदलने में मदद की है।'

राष्ट्रीय रिकॉर्ड और आधिकारिक मान्यता का विवाद

शिल्पा ने 2025 में 69वें नेशनल स्कूल गेम्स में 55.62 मीटर का थ्रो दर्ज कर महिलाओं की अंडर-17 जैवलिन में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। यह प्रदर्शन हरियाणा की दीपिका द्वारा 2023 में बनाए गए अंडर-18 राष्ट्रीय रिकॉर्ड 55.19 मीटर से भी बेहतर था।

हालाँकि, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने इस प्रदर्शन को आधिकारिक मान्यता नहीं दी, क्योंकि वह प्रतियोगिता वर्ल्ड एथलेटिक्स द्वारा अनुमोदित नहीं थी। शिल्पा का आधिकारिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2025 जूनियर नेशनल्स में आया, जहाँ वह 45.90 मीटर के थ्रो के साथ पाँचवें स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा में उनके प्रदर्शन में लगभग 10 मीटर का उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

इस पर शिल्पा ने कहा, 'एक एथलीट के तौर पर मेरा फोकस सिर्फ अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। अगर फेडरेशन ने आधिकारिक रूप से मेरा थ्रो रजिस्टर नहीं किया है, तो मैं अपनी अगली आधिकारिक प्रतियोगिता में और भी बेहतर कोशिश करूँगी।'

यूथ ओलंपिक्स और आगे का लक्ष्य

शिल्पा की नज़र अभी समर यूथ ओलंपिक्स 2026 पर है, जो 31 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक सेनेगल के डकार में आयोजित होगा। उन्होंने कहा, 'अभी फिलहाल मेरा पहला लक्ष्य यूथ ओलंपिक्स में पोडियम पर फिनिश करना है। मेरा आखिरी लक्ष्य ओलंपिक पदक है। मैं अपना ओलंपिक पदक नीरज चोपड़ा को समर्पित करूँगी।' कोच बिनोद सिंह को भरोसा है कि शिल्पा सीनियर स्तर पर अपने अनाधिकारिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकती हैं। गौरतलब है कि नीरज चोपड़ा की सफलता के बाद भारत में जैवलिन थ्रो में युवा प्रतिभाओं की एक नई पीढ़ी उभरती दिख रही है, और शिल्पा उस पीढ़ी की सबसे चमकदार उम्मीदों में से एक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि SAI के ग्रामीण पहुँच कार्यक्रम की असली परीक्षा है — क्या संस्थागत समर्थन प्रतिभा को पोडियम तक पहुँचा सकता है? AFI द्वारा 55.62 मीटर के थ्रो को मान्यता न देना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल उठाता है: क्या फेडरेशन की प्रतियोगिता-अनुमोदन प्रक्रिया युवा प्रतिभाओं को उनका उचित श्रेय देने में बाधा बन रही है? नीरज चोपड़ा के बाद जैवलिन में रुचि बढ़ी है, लेकिन महिला वर्ग में अभी भी निवेश और अवसर का असंतुलन बना हुआ है — शिल्पा जैसी प्रतिभाएँ इस अंतर को उजागर करती हैं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिल्पा कुमारी कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
शिल्पा कुमारी झारखंड के गुमला जिले की युवा जैवलिन थ्रोअर हैं, जो महिला अंडर-17 जैवलिन में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं। नीरज चोपड़ा से प्रेरित होकर उन्होंने ओलंपिक पदक जीतने का लक्ष्य घोषित किया है।
शिल्पा कुमारी का नेशनल रिकॉर्ड क्यों आधिकारिक नहीं माना गया?
2025 के 69वें नेशनल स्कूल गेम्स में शिल्पा ने 55.62 मीटर का थ्रो दर्ज किया, लेकिन एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने इसे मान्यता नहीं दी क्योंकि वह प्रतियोगिता वर्ल्ड एथलेटिक्स द्वारा अनुमोदित नहीं थी। उनका आधिकारिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2025 जूनियर नेशनल्स में 45.90 मीटर है।
शिल्पा कुमारी का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
शिल्पा का निकटतम लक्ष्य समर यूथ ओलंपिक्स 2026 में पोडियम फिनिश करना है, जो 31 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक सेनेगल के डकार में आयोजित होगा। दीर्घकालिक लक्ष्य ओलंपिक पदक जीतना है।
शिल्पा कुमारी को जैवलिन में आने की प्रेरणा कैसे मिली?
शिल्पा ने अपने गाँव की चौपाल पर टेलीविजन पर नीरज चोपड़ा को टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतते देखा। गाँव के लोगों का जश्न देखकर उन्होंने जैवलिन में ओलंपिक पदक जीतने का संकल्प लिया।
SAI ने शिल्पा कुमारी के करियर में क्या भूमिका निभाई है?
रांची स्थित SAI सेंटर में कोच बिनोद सिंह ने तीन साल पहले ट्रायल के दौरान शिल्पा की प्रतिभा पहचानी। किसान परिवार से होने के कारण शिल्पा के पास निजी संसाधन सीमित थे; SAI की ट्रेनिंग, उपकरण और डाइट सुविधाओं ने उनके विकास में निर्णायक भूमिका निभाई है।
राष्ट्र प्रेस
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