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क्या डॉ. राजवर्धन आजाद ने नेत्रदान के मिथक तोड़े और जागरूकता बढ़ाई?

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क्या डॉ. राजवर्धन आजाद ने नेत्रदान के मिथक तोड़े और जागरूकता बढ़ाई?

सारांश

राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा में डॉ. राजवर्धन आजाद ने नेत्रदान के महत्व और मिथकों पर गहराई से चर्चा की। जानें, कैसे यह प्रक्रिया समाज में जागरूकता बढ़ाती है और कॉर्नियल ब्लाइंडनेस को कम करने में मदद कर सकती है।

मुख्य बातें

नेत्रदान एक सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है।
हर उम्र के लोग इसे कर सकते हैं, कई स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद।
नेत्रदान से जुड़े मिथकों को समझना आवश्यक है।
भारत में 750 से अधिक आई बैंक हैं।
नेत्रदान से किसी अंधे व्यक्ति को नई रोशनी मिल सकती है।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हर वर्ष 25 अगस्त से 8 सितंबर तक पूरे देश में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और कॉर्नियल ब्लाइंडनेस (कॉर्निया से जुड़ी अंधता) को कम करना है।

इस अवसर पर समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से एक विशेष चर्चा में अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के अकादमिक और शोध सलाहकार, आईजीआईएमएस पटना के प्रोफेसर एमेरिटस और डॉ. आरपी सेंटर, एम्स नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. राजवर्धन झा आजाद ने कहा कि नेत्रदान एक सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है। मृत्यु के 6 से 8 घंटे के भीतर कॉर्निया निकालना आवश्यक होता है। इसके लिए केवल आई बैंक को कॉल करना होता है, जिसके बाद विशेषज्ञ टीम घर या अस्पताल पहुंचकर 20 से 30 मिनट में कॉर्निया निकालकर सुरक्षित कर लेती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे चेहरे की बनावट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

उन्होंने आगे बताया कि नेत्रदान के लिए सभी उम्र के लोग पात्र हैं। यहां तक कि चश्मा पहनने वाले, मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवा चुके लोग, मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। हालांकि एचआईवी, हेपेटाइटिस बी या सी, रेबीज, सक्रिय कैंसर और सेप्सिस से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते। इच्छुक व्यक्ति आई बैंक, एनजीओ या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संकल्प पत्र भरकर नेत्रदान के लिए पंजीकरण कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए मृत्यु के बाद परिवार की सहमति आवश्यक होती है।

डॉ. आजाद ने नेत्रदान से जुड़े मिथकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई लोग मानते हैं कि नेत्रदान से चेहरा खराब हो जाएगा, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल कॉर्निया निकाला जाता है और चेहरा सामान्य रहता है। कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि यह धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, जबकि सभी धर्म इसे पुण्य कार्य मानते हैं। यह धारणा भी गलत है कि नेत्रदान से अगले जन्म की दृष्टि प्रभावित होगी, क्योंकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसके अलावा, यह भी मिथक है कि नेत्रदान से अंतिम संस्कार में देरी होगी, जबकि पूरी प्रक्रिया केवल 20 से 30 मिनट में पूरी हो जाती है।

तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करते हुए डॉ. आजाद ने कहा कि कॉर्निया प्रत्यारोपण की सफलता दर एक साल बाद लगभग 79 प्रतिशत तक होती है। प्रत्यारोपित कॉर्निया 10 से 20 साल तक कार्य कर सकता है। भारत में लगभग 750 से अधिक आई बैंक मौजूद हैं, लेकिन मानकों के अनुसार सक्रिय रूप से काम करने वाले अपेक्षाकृत कम हैं। कॉर्निया को कॉर्निसोल और ऑप्टिसोल-जीएस जैसी तकनीकों से 14 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। भविष्य में कृत्रिम कॉर्निया और टिश्यू इंजीनियरिंग पर शोध जारी है, लेकिन फिलहाल नेत्रदान का कोई पूर्ण विकल्प उपलब्ध नहीं है।

डॉ. आजाद का मानना है कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि यह किसी अंधे व्यक्ति की ज़िंदगी को नई रोशनी दे सकता है। भारत जैसे विशाल देश में, जहां लाखों लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं, वहां नेत्रदान के प्रति जागरूकता और भी आवश्यक हो जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में एकता और सहानुभूति को भी बढ़ाता है। हमें चाहिए कि हम इस दिशा में आगे बढ़ें और अधिक से अधिक लोगों को इसके महत्व से अवगत कराएं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हर कोई नेत्रदान कर सकता है?
हाँ, सभी उम्र के लोग नेत्रदान कर सकते हैं, लेकिन कुछ स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग इस प्रक्रिया के लिए अयोग्य हो सकते हैं।
क्या नेत्रदान से चेहरे की बनावट पर असर पड़ता है?
नहीं, केवल कॉर्निया निकाला जाता है और चेहरे की बनावट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
क्या नेत्रदान करना धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है?
नहीं, सभी धर्म इसे पुण्य कार्य मानते हैं।
नेत्रदान के लिए पंजीकरण कैसे करें?
इच्छुक व्यक्ति आई बैंक, एनजीओ, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संकल्प पत्र भरकर पंजीकरण कर सकते हैं।
क्या नेत्रदान से अंतिम संस्कार में देरी होती है?
नहीं, नेत्रदान की प्रक्रिया केवल 20 से 30 मिनट की होती है।
राष्ट्र प्रेस
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