नीति आयोग बैठक में CM रेखा गुप्ता ने पेश किया दिल्ली का विकास मॉडल, ₹1 लाख करोड़ की सड़क परियोजनाएं और 500 KM मेट्रो नेटवर्क हाईलाइट
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 12 जून 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में राष्ट्रीय राजधानी का समग्र विकास मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में दिल्ली की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक कल्याण क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक में स्पष्ट किया कि किसी विकसित राष्ट्र की पहचान केवल आर्थिक या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की क्षमता और उत्पादकता से भी तय होती है। उन्होंने कहा, "दिल्ली देश के परिवर्तन की एक मजबूत प्रेरक शक्ति बनकर उभरी है।" साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल पर दिल्लीवासियों की ओर से शुभकामनाएँ दीं।
बुनियादी ढाँचे में निवेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की सहायता से दिल्ली में लगभग ₹1 लाख करोड़ की लागत से सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। दिल्ली मेट्रो नेटवर्क अब लगभग 500 किलोमीटर तक पहुँच चुका है, जो देश के अन्य राज्यों के मेट्रो नेटवर्क से बड़ा है। परिवहन क्षेत्र में आधुनिकीकरण के तहत व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जाँच के लिए तीन नए स्वचालित परीक्षण केंद्र भी विकसित किए जा रहे हैं।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण
शिक्षा के मोर्चे पर रेखा गुप्ता ने बताया कि कक्षा 9 में छात्राओं के ड्रॉपआउट को कम करने के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं को मुफ्त साइकिल देने की योजना शुरू की गई है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार जल्द ही 'महिला हाट आउटलेट्स (रानी हाट)' शुरू करने जा रही है, जो आश्रय गृहों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए स्थायी बाज़ार उपलब्ध कराएगा।
बाल एवं मातृ कल्याण: 'समर्थ' पहल
बच्चों और माताओं के कल्याण के लिए 'समर्थ' नामक एक नई पहल शुरू की गई है, जिसके तहत आँगनवाड़ी केंद्रों का व्यापक रूपांतरण किया जाएगा। यह मॉडल छह प्रमुख स्तंभों — क्रेच, पोषण, शिक्षा, परिवार सहभागिता और महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण — पर आधारित है। गौरतलब है कि यह पहल आँगनवाड़ी प्रणाली को पारंपरिक पोषण केंद्र से बहुआयामी सामुदायिक संसाधन में बदलने का प्रयास है।
प्रशासनिक सुधार और पर्यावरण
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार के सभी विभागों में ई-फाइल प्रणाली और पूर्ण डिजिटलाइज़ेशन लागू किया गया है। नए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर स्थापित किए गए हैं और मिशन कर्मयोगी के तहत अधिकारियों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पर्यावरण के मोर्चे पर, प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पड़ोसी राज्यों के साथ एक विशेष समन्वय टीम गठित की गई है, जो यमुना नदी के अविरल प्रवाह को बहाल करने और प्रदूषण समस्या के समाधान के लिए काम कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब यमुना प्रदूषण वर्षों से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है और पिछली सरकारों पर ठोस कदम न उठाने के आरोप लगते रहे हैं।