9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एनएमएल के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन में डिजिटल हेल्थ संसाधनों पर जोर, 93 मेडिकल कॉलेजों से आगे विस्तार की वकालत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एनएमएल के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन में डिजिटल हेल्थ संसाधनों पर जोर, 93 मेडिकल कॉलेजों से आगे विस्तार की वकालत

सारांश

नई दिल्ली में एनएमएल के पाँचवें ईआरएमडी सम्मेलन ने एक साफ़ संदेश दिया — डिजिटल चिकित्सा ज्ञान अब केवल बड़े संस्थानों की विशेषाधिकार नहीं रह सकता। 93 मेडिकल कॉलेजों के नेटवर्क से आगे, एआई और 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' के ज़रिए हर कॉलेज तक पहुंच — यही विकसित भारत के स्वास्थ्य ढाँचे की अगली परीक्षा है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय (एनएमएल) ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ईआरएमडी कंसोर्टियम पर पाँचवाँ राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-सम्मेलन आयोजित किया।
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एनएमएल नेटवर्क के 93 मेडिकल कॉलेजों से आगे विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों के लिए।
सम्मेलन में क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन प्लेटफार्मों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कृष्णा ने एनईपी 2020 और 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' को डिजिटल स्वास्थ्य शिक्षा की धुरी बताया।
एनएमएल को एआई-आधारित व्यापक डिजिटल रोडमैप विकसित करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में एनएमएल न्यूजलेटर और स्मारिका का विमोचन भी हुआ।

राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय (एनएमएल) ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अपने परिसर में ईआरएमडी कंसोर्टियम पर पाँचवें राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-सम्मेलन का आयोजन किया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था — 'डिजिटल स्वास्थ्य संसाधन: पुस्तकालयों के माध्यम से पहुंच को पुनर्परिभाषित करना'।

उद्घाटन सत्र और प्रमुख उपस्थिति

उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव डॉ. विनोद कोटवाल और स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा उपस्थित रहे। एनएमएल के निदेशक डॉ. मुकेश पाठक और डीजीएचएस के डीडीजी डॉ. बी. श्रीनिवास भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सचिव श्रीवास्तव का संबोधन: विस्तार और अनुसंधान पर बल

पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सभा को संबोधित करते हुए एनएमएल नेटवर्क के वर्तमान में 93 मेडिकल कॉलेजों तक विस्तार का उल्लेख किया और कहा कि देश भर के सभी मेडिकल कॉलेजों — विशेष रूप से कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों के संस्थानों — तक गुणवत्तापूर्ण डिजिटल साहित्य और शिक्षण संसाधनों की समान पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र तेज़ी से बदल रहा है — नई बीमारियाँ सामने आ रही हैं, उपचार पद्धतियाँ उन्नत हो रही हैं और नैदानिक अभ्यास निरंतर परिष्कृत हो रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए भारत की स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया: 'हम अन्यत्र किए गए शोधों से काम चला सकते हैं, लेकिन केवल इससे हमारा अपना एक मजबूत शोध तंत्र बनाने का संकल्प पूरा नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि इसके लिए डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्रीवास्तव ने 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' पहल और ईआरएमडी कंसोर्टियम की पूरक भूमिका का उल्लेख किया और एनएमएल को एक विरासत संस्थान बताया, जिसकी जिम्मेदारी है कि वह ज्ञान के द्वार के रूप में विकसित भारत की परिकल्पना में सार्थक योगदान दे। उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका का पता लगाने सहित एक व्यापक डिजिटल रोडमैप विकसित करने का भी आह्वान किया।

डॉ. कोटवाल और डॉ. कृष्णा के विचार

डॉ. विनोद कोटवाल ने ज्ञान की विशेष प्रकृति रेखांकित की — कि जहाँ भौतिक संपदा खर्च करने से घटती है, वहीं ज्ञान साझा करने पर बढ़ता है। उन्होंने कहा कि एक मेडिकल कॉलेज के तीन आवश्यक स्तंभ हैं: संकाय, अवसंरचना और ज्ञान संसाधन — जिनमें पुस्तकें, पत्रिकाएँ और विद्वतापूर्ण सामग्री शामिल हैं।

डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने 2024 में ईआरएमडी कंसोर्टियम के विकास को ज्ञान तक सहयोगात्मक पहुंच की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' पहल का हवाला देते हुए कहा कि चिकित्सा पुस्तकालयों का भविष्य केवल सूचना प्रदान करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि 'सूचना को प्रमाण में, प्रमाण को ज्ञान में और ज्ञान को बेहतर स्वास्थ्य सेवा में' परिवर्तित करने पर केंद्रित होना चाहिए।

व्यावहारिक प्रशिक्षण और पैनल चर्चा

सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता रही चार ईआरएमडी संसाधन प्लेटफार्मों — क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन — पर व्यावहारिक प्रशिक्षण, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की इन डिजिटल माध्यमों से प्रासंगिक चिकित्सा साहित्य और नैदानिक जानकारी तक पहुंच की क्षमता बढ़ाना था।

'संरक्षक से नैदानिक भागीदार तक: चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्ष की अगली भूमिका' विषय पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित हुई, जिसमें पुस्तकालयाध्यक्षों की बदलती भूमिका — सूचना प्रबंधन से आगे नैदानिक टीमों, शोधकर्ताओं और छात्रों को साक्ष्य-आधारित ज्ञान में सक्रिय सहयोग — पर जोर दिया गया। सम्मेलन के दौरान श्रीवास्तव ने एनएमएल न्यूजलेटर और स्मारिका का विमोचन भी किया।

आगे की राह

सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों की पहुंच अब केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रह सकती। डॉ. कृष्णा ने हितधारकों से यह कल्पना करने का आग्रह किया कि एनएमएल और ईआरएमडी कंसोर्टियम अगले पाँच से दस वर्षों में किस रूप में विकसित हों — अधिक संयोजित, टिकाऊ, समावेशी और जिम्मेदार ज्ञान-आधारित प्रणाली के रूप में। इस दिशा में भविष्य के लक्षित सेमिनारों और व्यावसायिक कार्यक्रमों की योजना भी रेखांकित की गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में कुल मेडिकल संस्थानों की संख्या के मुकाबले यह अभी भी एक छोटा हिस्सा है — और यहीं असली खाई है जिसे पाटने की वकालत इस सम्मेलन ने की। 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' जैसी पहलें सही दिशा में हैं, लेकिन डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता और उनके वास्तविक उपयोग के बीच की दूरी — खासकर ग्रामीण और टियर-3 शहरों के संस्थानों में — को केवल सब्सक्रिप्शन से नहीं पाटा जा सकता। एआई साक्षरता और अनुसंधान संस्कृति की बात तो हुई, पर इसके लिए ठोस बजट आवंटन और जवाबदेही ढाँचे का कोई उल्लेख नहीं आया — और यही वह बिंदु है जहाँ नीति और क्रियान्वयन का अंतर सबसे बड़ा होता है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएमएल का ईआरएमडी कंसोर्टियम क्या है?
ईआरएमडी (ERMD) कंसोर्टियम राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय के तहत एक सहयोगी डिजिटल संसाधन नेटवर्क है, जिसे 2024 में विकसित किया गया। यह चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और नर्सिंग पेशेवरों को क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले विद्वतापूर्ण संसाधन उपलब्ध कराता है।
इस सम्मेलन में कौन-सी प्रमुख माँगें उठाई गईं?
सम्मेलन में एनएमएल नेटवर्क को मौजूदा 93 मेडिकल कॉलेजों से आगे, विशेष रूप से कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों के सभी मेडिकल कॉलेजों तक विस्तार देने की वकालत की गई। साथ ही एआई-आधारित व्यापक डिजिटल रोडमैप बनाने और 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' पहल को और सशक्त करने का आह्वान किया गया।
'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' पहल क्या है और इसका स्वास्थ्य शिक्षा से क्या संबंध है?
'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर के संस्थानों को विद्वानों के प्रकाशनों और शोध पत्रिकाओं तक एकीकृत पहुंच प्रदान करना है। स्वास्थ्य शिक्षा के संदर्भ में यह ईआरएमडी कंसोर्टियम के साथ मिलकर प्रमाण-आधारित नैदानिक अभ्यास और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक मानी जाती है।
डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों की पहुंच से मेडिकल शिक्षा को कैसे लाभ होगा?
डिजिटल संसाधनों की सुलभता से चिकित्सा छात्र, शोधकर्ता और पेशेवर नवीनतम नैदानिक जानकारी, उपचार प्रोटोकॉल और शोध सामग्री तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इससे साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होता है।
सम्मेलन में चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्षों की भूमिका पर क्या चर्चा हुई?
पैनल चर्चा में रेखांकित किया गया कि चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्षों की भूमिका अब केवल सूचना संसाधनों के प्रबंधन तक सीमित नहीं रह सकती। उन्हें नैदानिक टीमों, शोधकर्ताओं और छात्रों को साक्ष्य-आधारित ज्ञान तक पहुंचने और उसे लागू करने में सक्रिय 'नैदानिक भागीदार' की भूमिका निभानी होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले