नोएडा: अस्पताल से नवजात अपहरण, 8 घंटे में बरामद; बागपत की उपासना गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के गौतमबुद्धनगर जिले में 9 अक्टूबर 2026 को एक महिला ने भंगेल स्थित अस्पताल से तीन दिन के नवजात शिशु का अपहरण कर लिया। आरोपी ने पहले सरकारी योजना के तहत ₹2,500 दिलाने का झांसा देकर बच्चे के परिजनों का विश्वास जीता और मौका पाते ही नवजात को लेकर फरार हो गई। थाना फेस-2 की पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और सीसीटीवी फुटेज की सहायता से महज आठ घंटे के भीतर बच्चे को सकुशल बरामद कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ अपहरण
पुलिस के अनुसार, पीड़ित परिवार की महिला ने 6 अक्टूबर 2026 को भंगेल स्थित एक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। इसके दो दिन बाद, 8 अक्टूबर की शाम को एक अज्ञात महिला अस्पताल में पहुँची और नवजात की माँ तथा उसकी नानी से परिचय बढ़ाया।
आरोप है कि उस महिला ने किसी सरकारी योजना के तहत ₹2,500 दिलाने का प्रलोभन देकर परिजनों का भरोसा हासिल किया। 9 अक्टूबर की सुबह वह पुनः अस्पताल पहुँची, नवजात को दुलाराने लगी और बातचीत में परिजनों को उलझाकर शिशु को अपने साथ ले गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही थाना फेस-2 की पुलिस हरकत में आई। टीम ने अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जाँच की और मैनुअल इंटेलिजेंस नेटवर्क को सक्रिय किया।
मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने एनएसईजेड मेट्रो स्टेशन के पास पहुँचकर आरोपी महिला को दबोच लिया। आठ घंटे के भीतर नवजात को सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। घटना में इस्तेमाल की गई बिना नंबर प्लेट की स्कूटी भी ज़ब्त की गई, जिसे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज किया गया है।
आरोपी की पहचान और मकसद
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार महिला की पहचान उपासना, पत्नी सोनू कुमार, उम्र करीब 26 वर्ष, निवासी ग्राम बावली, थाना बड़ौत, जिला बागपत के रूप में हुई है। उसका वर्तमान पता ग्राम भंगेल, गौतमबुद्धनगर बताया गया है।
पूछताछ में उपासना ने बताया कि उसकी बहन निःसंतान है, और वह अपनी बहन को बच्चा देने के उद्देश्य से अस्पताल से नवजात को उठा ले गई थी। इसके अलावा, एक बाल अपचारी (नाबालिग) को भी इस मामले में पुलिस संरक्षण में लिया गया है।
कानूनी कार्रवाई
थाना फेस-2, गौतमबुद्धनगर में मुकदमा अपराध संख्या 468/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और धारा 137(2) के तहत अभियोग पंजीकृत किया है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित सहयोगियों की जाँच जारी रखे हुए है।
आम जनता पर असर और संदेश
यह घटना अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि इस तरह के अपहरण के मामलों में अनजान व्यक्तियों द्वारा प्रसव-कक्ष के आसपास घूमना और परिजनों को प्रलोभन देना एक जानी-पहचानी चाल है।
पुलिस ने अस्पतालों में भर्ती मरीज़ों के परिजनों से अपील की है कि वे अजनबियों से सतर्क रहें और नवजात शिशुओं को अकेला न छोड़ें। पुलिस का त्वरित और प्रभावी कदम इस मामले में राहत की बात है, और आगे की जाँच में आरोपी के नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।