नोएडा: तीन माह की बच्ची का अपहरण, 24 घंटे में तीन गिरफ्तार; बच्ची सुरक्षित बरामद
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-63 थाना क्षेत्र से तीन माह की एक बच्ची के अपहरण का पुलिस ने 22 सितंबर 2026 को खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही अपहृत बच्ची को भी सकुशल बरामद कर लिया। इस पूरी कार्रवाई में सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की निर्णायक भूमिका रही।
मामले का घटनाक्रम
21 सितंबर 2026 को थाना सेक्टर-63 में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी तीन माह की पुत्री को दो महिलाओं और एक पुरुष द्वारा बलपूर्वक अपने साथ ले जाया गया है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और थाना स्तर पर कई विशेष दलों का गठन किया।
पुलिस टीमों ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के ज़रिये संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी गई। लगातार निगरानी और जाँच के बाद पुलिस को आरोपियों के बारे में अहम सुराग हाथ लगे।
गिरफ्तारी और बरामदगी
22 सितंबर 2026 को सेक्टर-63 पुलिस ने कनावनी बस स्टैंड के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अभय कुमार, काजल उर्फ संगीता (अभय कुमार की पत्नी) और मनीषा (पत्नी राहुल) के रूप में हुई है। इनके कब्जे से तीन माह की बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया।
बरामदगी के बाद पुलिस ने बच्ची को अपने संरक्षण में लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
आरोपियों की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अभय कुमार (पुत्र महेन्द्र, उम्र करीब 36 वर्ष) मूल रूप से गाँव महथी, थाना उजियापुर, जिला समस्तीपुर, बिहार का रहने वाला है। घटना के समय वह गाँव हैबतपुर, थाना बिसरख, गौतमबुद्धनगर में रह रहा था।
दूसरी आरोपी काजल उर्फ संगीता (उम्र करीब 28 वर्ष) अभय कुमार की पत्नी है और उसी पते की निवासी है। तीसरी आरोपी मनीषा (उम्र करीब 23 वर्ष) पत्नी राहुल, मूल रूप से गाँव समसीपुर, थाना पचवाड़ा, जिला बेगुसराय, बिहार की निवासी है और वर्तमान में गाँव हैबतपुर, थाना बिसरख में रह रही थी।
आगे की जाँच
पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है। जाँच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बच्ची को किस उद्देश्य से ले जाया गया था और इस मामले में तीनों आरोपियों की क्या-क्या भूमिका रही। गौरतलब है कि अपहरण जैसे संवेदनशील मामलों में तेज़ कार्रवाई और तकनीकी सर्विलांस का यह उपयोग पुलिस की बदलती कार्यप्रणाली को दर्शाता है।