अहमदाबाद में 1 माह के नवजात की तस्करी की कोशिश: जेप्टो के 3 कर्मचारी समेत 4 पर कार्रवाई, ₹10 लाख में बिक्री का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद पुलिस ने 2 अक्टूबर 2026 को मात्र एक माह और सात दिन के एक नवजात शिशु को मानव तस्करी के प्रयास से सुरक्षित बचाया, जिसे कथित तौर पर ₹10 लाख में बेचने की साजिश रची गई थी। अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के अनुसार, इस मामले में त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्म जेप्टो से जुड़े तीन कर्मचारियों समेत कुल चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुई बच्चे की चोरी
2 अक्टूबर की रात लगभग 2 बजे, जीनल परमार (21) नामक युवती — जो राणी क्षेत्र, अहमदाबाद की निवासी है — तालाब किनारे एक अस्थायी बस्ती में पहुँची जहाँ श्रमजीवी परिवार रोड पर निवास करते थे। जब बच्चे के माता-पिता सो रहे थे, उसने नवजात को उठाया और स्कूटी पर सवार होकर वहाँ से निकल गई। घटना की जानकारी सुबह लगभग 4 बजे पुलिस तक पहुँची।
पुलिस कमिश्नर गहलोत ने बताया कि इस गिरोह ने घटना से 4-5 घंटे पहले शहर के सिविल हॉस्पिटल में भी रेकी की थी — वहाँ नवजात न मिलने पर उन्होंने इस श्रमिक बस्ती को निशाना बनाया।
100 पुलिसकर्मियों की तैनाती, 1,300 कैमरे खंगाले
सूचना मिलते ही साबरमती पुलिस स्टेशन सक्रिय हो गया। तत्काल क्राइम ब्रांच को जानकारी दी गई और 10 टीमों — जिनमें 6 क्राइम ब्रांच से और शेष स्थानीय पुलिस व डीसीपी से — का गठन किया गया। कुल मिलाकर लगभग 100 अधिकारी और जवान तलाशी में लगाए गए।
कमांड कंट्रोल रूम ने शहर के 1,300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। एक कैमरे में जीनल परमार को बच्चे को उठाते और स्कूटी पर ले जाते स्पष्ट रूप से देखा गया। पुलिस ने रेलवे स्टेशन और बस स्टेशनों पर नाकाबंदी की, जिसके बाद जीनल परमार समेत दो नाबालिगों की पहचान हो सकी।
जेप्टो से कनेक्शन और ₹10 लाख की डील
पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी मूलतः उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वहीं से जेप्टो के साथ कर्मचारी के रूप में जुड़े थे। यूपी में ही वे नोएडा के रहने वाले भानु जाटव (22) के संपर्क में आए, जिसने उन्हें लगभग एक माह के नवजात लड़के को अगवा करने का 'टास्क' दिया था।
कथित सौदे के अनुसार, कुल ₹10 लाख की बोली लगाई गई थी — जिसमें ₹2-2 लाख तीनों कार्यकर्ताओं को और ₹4 लाख भानु जाटव को मिलने थे। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, इन आरोपियों के ऊपर और भी लोग हैं जो मानव तस्करी नेटवर्क को संचालित करते हैं।
बच्चा सुरक्षित, नेटवर्क की जाँच जारी
उल्लेखनीय है कि जीनल परमार ने पुलिस के सक्रिय होने की भनक लगते ही नवजात को उसी स्थान पर वापस रख दिया जहाँ से उसे उठाया था। बच्चा पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है। जीनल का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं पाया गया है।
चारों आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। दोनों नाबालिगों को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया है। पुलिस अब इस मामले को बाल तस्करी के अन्य संभावित मामलों से जोड़कर पूरे मानव तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में जाँच आगे बढ़ा रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्मों पर कर्मचारी सत्यापन प्रक्रियाओं को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आगे की जाँच यह तय करेगी कि यह नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ है और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।