6 अक्टूबर 2026
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अहमदाबाद में 1 माह के नवजात की तस्करी की कोशिश: जेप्टो के 3 कर्मचारी समेत 4 पर कार्रवाई, ₹10 लाख में बिक्री का आरोप

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अहमदाबाद में 1 माह के नवजात की तस्करी की कोशिश: जेप्टो के 3 कर्मचारी समेत 4 पर कार्रवाई, ₹10 लाख में बिक्री का आरोप

सारांश

अहमदाबाद में एक माह के नवजात को ₹10 लाख में बेचने की साजिश नाकाम हो गई जब पुलिस ने 1,300 CCTV कैमरों और 100 जवानों की ताकत से घंटों में बच्चे को बचाया। मामले में जेप्टो के 3 कर्मचारी समेत 4 आरोपी हिरासत में, तस्करी नेटवर्क की जाँच जारी।

मुख्य बातें

2 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में 1 माह और 7 दिन के नवजात को अगवा किया गया; पुलिस ने कुछ ही घंटों में बच्चे को सुरक्षित बचाया।
आरोप है कि बच्चे को ₹10 लाख में बेचने की साजिश थी; तीन आरोपियों को ₹2-2 लाख और मास्टरमाइंड भानु जाटव को ₹4 लाख मिलने थे।
जेप्टो के 3 कर्मचारियों समेत कुल 4 आरोपी हिरासत में; 2 नाबालिगों को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया।
मुख्य आरोपी जीनल परमार (21) की पहचान 1,300 CCTV कैमरों की फुटेज और 100 पुलिसकर्मियों की टीम ने की।
गिरोह ने घटना से पहले सिविल हॉस्पिटल में भी रेकी की थी; पुलिस बाल तस्करी के अन्य मामलों से संभावित संबंध की जाँच कर रही है।

अहमदाबाद पुलिस ने 2 अक्टूबर 2026 को मात्र एक माह और सात दिन के एक नवजात शिशु को मानव तस्करी के प्रयास से सुरक्षित बचाया, जिसे कथित तौर पर ₹10 लाख में बेचने की साजिश रची गई थी। अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के अनुसार, इस मामले में त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्म जेप्टो से जुड़े तीन कर्मचारियों समेत कुल चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं।

घटनाक्रम: कैसे हुई बच्चे की चोरी

2 अक्टूबर की रात लगभग 2 बजे, जीनल परमार (21) नामक युवती — जो राणी क्षेत्र, अहमदाबाद की निवासी है — तालाब किनारे एक अस्थायी बस्ती में पहुँची जहाँ श्रमजीवी परिवार रोड पर निवास करते थे। जब बच्चे के माता-पिता सो रहे थे, उसने नवजात को उठाया और स्कूटी पर सवार होकर वहाँ से निकल गई। घटना की जानकारी सुबह लगभग 4 बजे पुलिस तक पहुँची।

पुलिस कमिश्नर गहलोत ने बताया कि इस गिरोह ने घटना से 4-5 घंटे पहले शहर के सिविल हॉस्पिटल में भी रेकी की थी — वहाँ नवजात न मिलने पर उन्होंने इस श्रमिक बस्ती को निशाना बनाया।

100 पुलिसकर्मियों की तैनाती, 1,300 कैमरे खंगाले

सूचना मिलते ही साबरमती पुलिस स्टेशन सक्रिय हो गया। तत्काल क्राइम ब्रांच को जानकारी दी गई और 10 टीमों — जिनमें 6 क्राइम ब्रांच से और शेष स्थानीय पुलिस व डीसीपी से — का गठन किया गया। कुल मिलाकर लगभग 100 अधिकारी और जवान तलाशी में लगाए गए।

कमांड कंट्रोल रूम ने शहर के 1,300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। एक कैमरे में जीनल परमार को बच्चे को उठाते और स्कूटी पर ले जाते स्पष्ट रूप से देखा गया। पुलिस ने रेलवे स्टेशन और बस स्टेशनों पर नाकाबंदी की, जिसके बाद जीनल परमार समेत दो नाबालिगों की पहचान हो सकी।

जेप्टो से कनेक्शन और ₹10 लाख की डील

पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी मूलतः उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वहीं से जेप्टो के साथ कर्मचारी के रूप में जुड़े थे। यूपी में ही वे नोएडा के रहने वाले भानु जाटव (22) के संपर्क में आए, जिसने उन्हें लगभग एक माह के नवजात लड़के को अगवा करने का 'टास्क' दिया था।

कथित सौदे के अनुसार, कुल ₹10 लाख की बोली लगाई गई थी — जिसमें ₹2-2 लाख तीनों कार्यकर्ताओं को और ₹4 लाख भानु जाटव को मिलने थे। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, इन आरोपियों के ऊपर और भी लोग हैं जो मानव तस्करी नेटवर्क को संचालित करते हैं।

बच्चा सुरक्षित, नेटवर्क की जाँच जारी

उल्लेखनीय है कि जीनल परमार ने पुलिस के सक्रिय होने की भनक लगते ही नवजात को उसी स्थान पर वापस रख दिया जहाँ से उसे उठाया था। बच्चा पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है। जीनल का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं पाया गया है।

चारों आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। दोनों नाबालिगों को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया है। पुलिस अब इस मामले को बाल तस्करी के अन्य संभावित मामलों से जोड़कर पूरे मानव तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में जाँच आगे बढ़ा रही है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्मों पर कर्मचारी सत्यापन प्रक्रियाओं को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आगे की जाँच यह तय करेगी कि यह नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ है और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी सिर्फ डिलीवरी तक सीमित नहीं रह सकती। इसके साथ ही यह मामला उस व्यापक मानव तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है जो सोशल और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को निशाना बनाता है — श्रमिक परिवारों के रोड पर सोते बच्चों तक इनकी पहुँच इस नेटवर्क की व्यापकता और नियोजन को दर्शाती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, किंतु असली परीक्षा इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुँचने में होगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद नवजात अपहरण मामले में क्या हुआ?
2 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में एक माह और सात दिन के नवजात शिशु को कथित तौर पर ₹10 लाख में बेचने के लिए अगवा किया गया था। अहमदाबाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित बचाया और चार आरोपियों को हिरासत में लिया।
इस मामले में जेप्टो का क्या कनेक्शन है?
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार चार आरोपियों में से तीन त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्म जेप्टो के कर्मचारी थे। ये तीनों उत्तर प्रदेश में जेप्टो से जुड़े थे और वहीं नोएडा के भानु जाटव के संपर्क में आए, जिसने उन्हें नवजात अगवा करने का 'टास्क' दिया था।
बच्चे को कैसे ढूँढा गया?
अहमदाबाद पुलिस ने 10 टीमों और लगभग 100 अधिकारियों को तैनात किया। कमांड कंट्रोल रूम ने शहर के 1,300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें मुख्य आरोपी जीनल परमार को बच्चे को स्कूटी पर ले जाते देखा गया। रेलवे और बस स्टेशनों की नाकाबंदी के बाद आरोपियों की पहचान हुई।
आरोपियों के बीच पैसे का बँटवारा कैसे तय था?
पुलिस पूछताछ के अनुसार, कुल ₹10 लाख में से तीन कार्यकर्ताओं में से प्रत्येक को ₹2-2 लाख मिलने थे और मास्टरमाइंड भानु जाटव को ₹4 लाख मिलने थे। पुलिस का कहना है कि इन सबके ऊपर भी कुछ लोग हैं जो इस तस्करी नेटवर्क को संचालित करते हैं।
क्या बच्चा सुरक्षित है और आगे क्या होगा?
हाँ, नवजात पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है — जीनल परमार ने पुलिस की सक्रियता की भनक लगते ही उसे उसी स्थान पर वापस रख दिया था। दो नाबालिग आरोपियों को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया है और पुलिस पूरे मानव तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में जाँच जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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