दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह तोड़ा, 13 गिरफ्तार; 6 नवजात शिशु बचाए
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 18 जून 2026 को एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिल्ली, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश से 6 नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाया। गिरफ्तार आरोपियों में तस्कर, मध्यस्थ, खरीदार और एक अस्पताल मालिक शामिल हैं। यह गिरोह कथित तौर पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में व्यापक नेटवर्क के ज़रिए सक्रिय था।
ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई
पुलिस के मुताबिक, 5 जून को गुप्त सूचना मिलने के बाद पहाड़गंज इलाके के निकट आरके आश्रम मार्ग पर एक डिकॉय ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन में पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को उस वक्त रंगे हाथों दबोचा, जब वे एक नवजात शिशु को ग्राहकों को बेचने की कोशिश कर रहे थे। बचाया गया शिशु उस समय महज चार से पाँच दिन का था।
डिकॉय ऑपरेशन के दौरान पहले ₹20,000 की राशि ली गई, जबकि नवजात शिशु की खरीद के लिए ₹2,92,400 की माँग की गई थी। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से यही राशि बरामद भी की।
गिरोह का नेटवर्क और प्रमुख आरोपी
जाँच में सामने आया कि ज्योति इस गिरोह की मुख्य सूत्रधार थी। उसे नवजात शिशुओं की आपूर्ति करने वाले एक व्यक्ति की पहचान सायबाभाई ग़मर उर्फ कालिया के रूप में हुई, जो कथित तौर पर गुजरात और राजस्थान से शिशु प्राप्त करती थी। ज्योति से मिली जानकारी के आधार पर प्रतिभा और विपिन को भी गिरफ्तार किया गया, जो अन्य नवजात शिशुओं की व्यवस्था करने में लगे थे।
गुरुग्राम में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली ओमवती पर आरोप है कि उसने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और नवजात शिशुओं का इंतज़ाम कर उन्हें गिरोह को सौंपा। गौरतलब है कि यह गिरोह संतानहीन दंपतियों को निशाना बनाकर उन्हें अवैध तरीके से बच्चे उपलब्ध कराता था।
अस्पताल मालिक की संदिग्ध भूमिका
जाँच में बेगमपुर, दिल्ली स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के मालिक डॉ. विवेकी का नाम भी सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, इस अस्पताल का उपयोग शिशुओं को छिपाने और चिकित्सकीय देखरेख में रखने के लिए किया जाता था। कथित तौर पर डॉ. विवेकी अवैध गर्भपात में सहायता करते थे और नवजात शिशुओं के हस्तांतरण के लिए फर्ज़ी दस्तावेज़ तैयार करवाने में भी मदद करते थे।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह अस्पताल के रिकॉर्ड, प्रजनन संबंधी दस्तावेज़ और अन्य जाली कागज़ात तैयार करता था, ताकि शिशुओं का हस्तांतरण कानूनी दिखे। इस तरह संतानहीन दंपतियों को लाखों रुपये में बच्चे बेचे जाते थे।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(4), 61(2) और 3(5) तथा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत पहाड़गंज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है। इस जाँच का नेतृत्व सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशंस यूनिट की W/SI प्रगति को सौंपा गया था।
आगे की जाँच
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह आपूर्तिकर्ताओं, मध्यस्थों, वाहन चालकों और खरीदारों की एक सुव्यवस्थित श्रृंखला पर टिका था। राज्यों के विभिन्न इलाकों से शिशुओं को दिल्ली लाकर संभावित खरीदारों को अवैध रूप से सौंपा जाता था। जाँचकर्ता अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कितने और शिशु इस गिरोह के ज़रिए बेचे गए।