7 अक्टूबर 2026
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अहमदाबाद में नवजात अपहरण: पुलिस ने ₹6 लाख के सौदे में तीन आरोपी दबोचे, मानव तस्करी की जाँच शुरू

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अहमदाबाद में नवजात अपहरण: पुलिस ने ₹6 लाख के सौदे में तीन आरोपी दबोचे, मानव तस्करी की जाँच शुरू

सारांश

अहमदाबाद के न्यू रानीप में मजदूर माँ-बाप के पास से सोते हुए नवजात को उठा ले जाने की साजिश महज ₹6 लाख के कथित सौदे पर टिकी थी। पुलिस की चौकसी ने बच्चे को बचाया और तीन आरोपियों को दबोचा — लेकिन UP में छिपे कथित मुख्य साजिशकर्ता की तलाश अभी बाकी है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद के न्यू रानीप से 2 अक्टूबर 2026 को तड़के 3:15 बजे एक महीने सात दिन के नवजात का अपहरण कथित तौर पर किया गया।
मुख्य आरोपी जिनाल परमार (21 वर्ष) को साबरमती रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया।
उत्तर प्रदेश के नोएडा में रह रहे भावेश्वर उर्फ भानु जाटव (बदायूँ निवासी) ने कथित तौर पर ₹6 लाख में बच्चा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था।
पुलिस ने दो नाबालिग सहयोगियों को भी पकड़ा; कुल तीन आरोपी साबरमती पुलिस को सौंपे गए।
बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया; BNS की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज, मानव तस्करी और आपराधिक साजिश की धाराएँ जोड़ी जा रही हैं।
क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम कथित मुख्य साजिशकर्ता की तलाश में उत्तर प्रदेश रवाना हुई।

अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके से एक महीने सात दिन के नवजात शिशु के अपहरण के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों में 21 वर्षीया जिनाल परमार और उत्तर प्रदेश से जुड़े दो अन्य व्यक्ति शामिल हैं। जाँचकर्ताओं के अनुसार इस कथित साजिश में ₹6 लाख के लेन-देन का प्रस्ताव था और मानव तस्करी के पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ अपहरण

पुलिस के अनुसार, 2 अक्टूबर 2026 को तड़के करीब रात 3:15 बजे नवजात का अपहरण किया गया, जब वह अहवाडिया झील के पास फुटपाथ पर अपने मजदूर माता-पिता के साथ सो रहा था। आरोप है कि अपहरण से पहले मुख्य आरोपी जिनाल परमार ने न्यू रानीप इलाके और सोला सिविल अस्पताल के आसपास पूर्व में रेकी भी की थी।

इस मामले में साबरमती पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। जाँचकर्ताओं के मुताबिक, मानव तस्करी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएँ भी जोड़ी जा रही हैं।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

शिकायत मिलने के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीमों ने साबरमती पुलिस की सर्विलांस टीम और जोन-2 व जोन-3 की लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) इकाइयों के साथ मिलकर सघन तलाश अभियान चलाया। जाँचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के साथ-साथ तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस इनपुट का भी उपयोग किया।

आरोपियों को शहर से बाहर जाने से रोकने के लिए रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और हवाई अड्डे पर कड़ी निगरानी रखी गई। सीसीटीवी फुटेज और इंटेलिजेंस के आधार पर जिनाल परमार की पहचान हुई और उसे साबरमती रेलवे स्टेशन के पास पकड़ा गया।

₹6 लाख का कथित सौदा और UP कनेक्शन

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि उत्तर प्रदेश के दो नाबालिगों ने जिनाल की मदद की थी। उसके मोबाइल फोन पर मिली तस्वीरों के ज़रिए उनका पता लगाया गया और उन्हें बस व रेलवे स्टेशनों से उत्तर प्रदेश रवाना होने से पहले ही दबोच लिया गया।

पुलिस ने इस मामले में बदायूँ के निवासी और नोएडा में रह रहे भावेश्वर उर्फ भानु जाटव को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, भानु ने जिनाल को किसी तीसरे व्यक्ति के लिए एक साल से कम उम्र का बच्चा उपलब्ध कराने के बदले ₹6 लाख देने का कथित प्रस्ताव दिया था। यह बात जाँचकर्ताओं के अनुसार सामने आई है।

बच्चे की सुरक्षित बरामदगी

पुलिस की कड़ी चेकिंग और निगरानी से घबराकर जिनाल ने बच्चे को न्यू रानीप इलाके में छोड़ दिया और भागने की कोशिश की। इसके बाद बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, इस बड़ी साजिश में शामिल अन्य संदिग्ध उत्तर प्रदेश में हो सकते हैं, जिसके मद्देनजर क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम वहाँ भेजी गई है। जाँचकर्ता अब कथित मुख्य साजिशकर्ता की पहचान और बच्चे के अवैध ट्रांसफर में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने में जुटे हैं।

आगे की जाँच

पुलिस भावेश्वर उर्फ भानु जाटव और अन्य आरोपियों से गहन पूछताछ जारी रखे हुए है। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जिसमें शिशुओं को अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर बेचने की साजिश रची जाती है। बच्चा सुरक्षित है और अब तक के सभी तीन गिरफ्तार आरोपियों को साबरमती पुलिस को सौंपा जा चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक कथित अंतरराज्यीय शिशु-तस्करी नेटवर्क की झलक है — जिसमें पूर्व-नियोजित रेकी, तय कीमत और अलग-अलग राज्यों के सहयोगी शामिल हैं। गौरतलब है कि फुटपाथ पर सोने को मजबूर मजदूर परिवारों के शिशु इस तरह के नेटवर्क के लिए सबसे आसान निशाना बनते हैं — यह एक सुरक्षा और सामाजिक न्याय दोनों का सवाल है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, पर जब तक कथित मुख्य साजिशकर्ता और खरीदार की पहचान नहीं होती, इस नेटवर्क की जड़ें बरकरार रहेंगी। जाँच का असली इम्तिहान UP में होगा।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में नवजात का अपहरण कब और कहाँ हुआ?
2 अक्टूबर 2026 को तड़के करीब 3:15 बजे अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में अहवाडिया झील के पास फुटपाथ पर अपहरण हुआ, जब बच्चा अपने मजदूर माता-पिता के साथ सो रहा था। बच्चे की उम्र उस समय एक महीने सात दिन थी।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया और कौन हैं वे?
पुलिस ने कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है — रानीप निवासी 21 वर्षीया जिनाल परमार (मुख्य आरोपी), उत्तर प्रदेश के दो नाबालिग सहयोगी, और बदायूँ निवासी भावेश्वर उर्फ भानु जाटव जो नोएडा में रह रहे थे। तीनों को साबरमती पुलिस को सौंप दिया गया है।
इस अपहरण में ₹6 लाख का सौदा क्या था?
पुलिस के मुताबिक, भावेश्वर उर्फ भानु जाटव ने जिनाल परमार को किसी तीसरे व्यक्ति के लिए एक साल से कम उम्र का बच्चा उपलब्ध कराने के बदले कथित तौर पर ₹6 लाख देने का प्रस्ताव दिया था। जाँचकर्ता इस मामले में मानव तस्करी के पहलुओं की भी जाँच कर रहे हैं।
बच्चे को कैसे सुरक्षित बरामद किया गया?
पुलिस की कड़ी चेकिंग और सर्विलांस से घबराकर मुख्य आरोपी जिनाल ने बच्चे को न्यू रानीप इलाके में छोड़ दिया और भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया।
क्या इस मामले में जाँच अभी जारी है?
हाँ, क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम कथित मुख्य साजिशकर्ता की तलाश में उत्तर प्रदेश रवाना हो गई है। BNS धारा 137(2) के साथ-साथ मानव तस्करी और आपराधिक साजिश की धाराएँ भी जोड़ी जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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