उत्तर कोरिया-रूस राजनयिक संबंधों के 78 साल पूरे, किम-पुतिन की 'अजेय मित्रता' का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता एक बार फिर दोहराई है, तथा दोनों देशों के बीच रिश्तों को 'अजेय मित्रता' की संज्ञा दी है। प्योंगयांग की सरकारी मीडिया ने सोमवार, 13 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। यह घोषणा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 78 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आई है।
समारोह और मुख्य घटनाक्रम
मॉस्को स्थित उत्तर कोरियाई दूतावास ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 78वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष स्वागत समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम में रूस के प्राकृतिक संसाधन मंत्री तथा उत्तर कोरिया-रूस अंतर-सरकारी सहयोग समिति के अध्यक्ष अलेक्जेंडर कोजलोव सहित रूसी सरकार और राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके समानांतर, उत्तर कोरिया में रूस के राजदूत आंद्रेई पोडेलिशेव ने भी प्योंगयांग में 78वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्वागत समारोह का आयोजन किया, जो इस द्विपक्षीय संबंध के दोनों देशों में महत्व को रेखांकित करता है।
राजदूत का बयान: 'अभूतपूर्व स्तर'
रूस में उत्तर कोरिया के राजदूत सिन होंग-चोल ने समारोह में कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों ने 'अभूतपूर्व स्तर' हासिल किया है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बने घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंधों को दिया।
कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, सिन ने यह भी कहा कि 2024 में दोनों नेताओं के बीच हुई शिखर बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में रूपांतरित कर दिया और उन्हें 'अजेय युद्ध-साथी संबंधों' के स्तर तक पहुँचाया।
रूसी मंत्री की प्रतिक्रिया
मंत्री कोजलोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जून 2024 में किम जोंग उन और पुतिन के बीच हस्ताक्षरित व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि दोनों देशों के आपसी सम्मान, विश्वास और साझा समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है।
रक्षा संधि की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया और रूस ने वर्ष 2024 में एक पारस्परिक रक्षा संधि पर भी हस्ताक्षर किए थे। इस संधि में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि दोनों में से किसी भी देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो दूसरा देश उसे सैन्य सहायता प्रदान करेगा। यह संधि पश्चिमी देशों और नाटो सहयोगियों की तीखी आलोचना का विषय रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ती निकटता वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है।
आगे क्या
दोनों देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था और विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग समिति की सक्रियता यह संकेत देती है कि आने वाले समय में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और विस्तार दिए जाने की योजना है। विश्लेषकों के अनुसार, इस गठजोड़ की दिशा पर पश्चिमी देश और संयुक्त राष्ट्र करीबी नज़र रख रहे हैं।