ओबीसी आरक्षण पर राहुल गांधी का पत्र 'राजनीतिक एजेंडा' — BJP नेता श्रीकांत भारती का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता श्रीकांत भारती ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा पलटवार करते हुए उनके ओबीसी आरक्षण संबंधी पत्र को 'पूरी तरह राजनीतिक एजेंडा' करार दिया। राहुल गांधी ने हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर एक पत्र लिखा था, जिसके बाद सियासी घमासान तेज हो गया है।
राहुल गांधी के पत्र पर भारती का हमला
श्रीकांत भारती ने सवाल उठाया, 'राहुल गांधी को ओबीसी की चिंता कब से होने लगी है? कांग्रेस पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड क्या है?' उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह पहले उन राज्यों में ओबीसी समुदाय के मुद्दे सुलझाए जहाँ वह सत्ता में है। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए पूछा कि अगर कांग्रेस वहाँ ओबीसी के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही, तो मध्य प्रदेश के मुद्दे उठाने का क्या औचित्य है।
भारती ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र सहित पूरे देश में ओबीसी समुदाय के लिए कांग्रेस की सरकारों से कहीं अधिक काम किया है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी को कुछ आत्मचिंतन करना चाहिए।'
अखिलेश यादव की 'पीडीए रथ यात्रा' पर तंज
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव की 'पीडीए रथ यात्रा' को लेकर भी BJP नेता ने कटाक्ष किया। भारती ने कहा कि अखिलेश यादव को 'आखिरकार हिंदुओं, हिंदू धर्म और हिंदू पूजा पद्धतियों में निहित शक्ति का एहसास हो गया है।' उन्होंने पूछा कि राम जन्मभूमि और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दों पर समाजवादी पार्टी कहाँ थी।
भारती ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ खड़ी है और 'बचकानी बातों' से लोगों को गुमराह नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के हिंदू मतदाता 'पूरी ताकत के साथ एनडीए के साथ' हैं।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों का जवाब
विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए जा रहे सवालों पर भारती ने कहा कि देश के 140 करोड़ लोग समझ चुके हैं कि यूपीए और कांग्रेस नेतृत्व संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास और नेतृत्व को जनता के अनुभव के आधार पर कटघरे में खड़ा किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब ओबीसी आरक्षण का मुद्दा कई राज्यों में चुनावी एजेंडे के केंद्र में है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में ओबीसी मतदाताओं की संख्या निर्णायक मानी जाती है, और सभी प्रमुख दल इस वर्ग को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस मुद्दे पर पत्राचार और बयानबाज़ी दोनों पक्षों की ओर से मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक रंग लेने की संभावना है।