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राहुल गांधी के ओबीसी बयान पर एनडीए का पलटवार, भाजपा बोली- देश में अराजकता फैलाने की कोशिश

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राहुल गांधी के ओबीसी बयान पर एनडीए का पलटवार, भाजपा बोली- देश में अराजकता फैलाने की कोशिश

सारांश

राहुल गांधी के ओबीसी बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। भाजपा, शिवसेना और जेडीयू ने एक सुर में उन पर अराजकता भड़काने और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया — और कांग्रेस के छह दशक के शासन में ओबीसी उपेक्षा का हिसाब माँगा।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने कहा कि यदि ओबीसी समाज सड़कों पर उतरा तो सरकार को झुकना पड़ेगा।
सिंह ने इसे 'अराजकता फैलाने की कोशिश' बताया; भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने 'राजनीतिक स्टंट' कहा।
उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कांग्रेस से पूछा कि उसने अपने शासनकाल में पिछड़े समुदायों के लिए क्या किया।
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने 'तुष्टिकरण की राजनीति' का आरोप लगाया।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कांग्रेस के छह दशकों के शासन में ओबीसी सचिवों की संख्या पर सवाल उठाया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि ओबीसी समाज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आया तो सरकार को झुकना पड़ेगा, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने 19 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना और जनता दल (यूनाइटेड) — तीनों दलों के प्रवक्ताओं ने राहुल गांधी पर जातीय राजनीति और अस्थिरता भड़काने का आरोप लगाया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर. पी. सिंह ने कहा, 'सबसे पहली बात तो यह है कि ऐसा उनकी सरकार के समय नहीं हुआ था। ओबीसी आयोग का गठन मोदी सरकार ने ही किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी समुदाय का बहुत ध्यान रखते हैं, वे खुद भी ओबीसी वर्ग से आते हैं। लेकिन अब राहुल गांधी यह नया फार्मूला लेकर आए हैं कि हम सब कुछ सड़कों पर करेंगे। इससे पता चलता है कि वे देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं।'

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने इसे 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया। उन्होंने कहा, 'जिस तरह उन्होंने अपराधियों और असामाजिक तत्वों को लाकर दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शन को हाईजैक करने की कोशिश की और जिस तरह उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर हंगामा किया... इसलिए, यह अच्छा है कि इसे एक राजनीतिक स्टंट के तौर पर किया जा रहा है।' खटाना ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 70 सालों तक ओबीसी समुदाय को दबाकर रखा।

उत्तर प्रदेश सरकार की आपत्ति

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी लगातार लोगों को भड़काकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछड़े समाज, महिला शक्ति, दलित भाइयों और पसमांदा मुसलमानों के उत्थान के लिए अभूतपूर्व काम हुए हैं।' उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उसने अपने शासनकाल में पिछड़े समुदायों के लिए क्या किया।

शिवसेना और जेडीयू का सवाल

शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने राहुल गांधी पर 'तुष्टिकरण की राजनीति' का आरोप लगाते हुए कहा, 'वे ओबीसी समुदाय को उकसाते हैं और फिर कहते हैं कि सरकार को यह देखना चाहिए कि उनकी सुरक्षा कैसे की जाए। अगर आप सच में लोगों को सशक्त और सुरक्षित बनाना चाहते हैं, तो उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं।' उन्होंने जाति और धर्म आधारित राजनीति पर भी सवाल उठाए।

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि राहुल गांधी को बताना चाहिए कि जब केंद्र और राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं, उन छह दशकों के दौरान भारत सरकार में कितने ओबीसी सचिव थे।

वंदे मातरम पर खटाना का बयान

गुलाम अली खटाना ने वंदे मातरम के महत्व पर भी बात की और कहा, 'लाखों लोगों को वंदे मातरम से ऊर्जा और प्रेरणा मिली। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई के दौरान, जब माताओं ने आजादी के लिए अपने युवा बेटों को कुर्बान कर दिया, तो वंदे मातरम ही उनका आखिरी नारा और उनके होंठों पर रहने वाला गीत था।'

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ओबीसी आरक्षण और जनगणना में जाति-सर्वेक्षण को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सड़क — दोनों स्तरों पर राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि कांग्रेस 'सड़क पर उतरो' की भाषा से संस्थागत सुधार की बजाय टकराव को बढ़ावा देती दिखती है। असली सवाल — ओबीसी उप-वर्गीकरण, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के आँकड़े — इस शोर में गुम हो जाते हैं।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने ओबीसी को लेकर क्या बयान दिया?
राहुल गांधी ने कहा कि यदि ओबीसी समाज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आया तो सरकार को झुकना पड़ेगा। यह बयान एनडीए नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना।
भाजपा ने राहुल गांधी के बयान पर क्या कहा?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर. पी. सिंह ने कहा कि राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने इसे 'राजनीतिक स्टंट' बताया और कांग्रेस पर 70 सालों तक ओबीसी को दबाने का आरोप लगाया।
शिवसेना और जेडीयू ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने राहुल गांधी पर 'तुष्टिकरण की राजनीति' का आरोप लगाया और कहा कि समुदायों को उकसाने की बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कांग्रेस के छह दशक के शासन में ओबीसी सचिवों की संख्या पर सवाल उठाया।
ओबीसी आयोग का गठन कब और किसने किया?
भाजपा नेताओं के अनुसार, ओबीसी आयोग का गठन मोदी सरकार ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ऐसा कोई संस्थागत कदम नहीं उठाया गया था।
इस राजनीतिक विवाद का व्यापक संदर्भ क्या है?
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ओबीसी आरक्षण और जाति जनगणना को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज है। ओबीसी मतदाता कई राज्यों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिससे यह मुद्दा चुनावी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बन जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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