क्या ओडिशा ने वेदांता की सहायक कंपनी ईएसएल स्टील को 1,255.38 करोड़ रुपए का डिमांड नोटिस जारी किया?
सारांश
Key Takeaways
- ओडिशा सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
- ईएसएल स्टील के लिए यह एक चुनौती है।
- कंपनी ने कानूनी उपायों की योजना बनाई है।
- यह मामला अन्य कंपनियों के लिए सीखने का अवसर है।
- खनन नीतियों की सख्ती पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
मुंबई, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा सरकार ने वेदांता की सहायक कंपनी ईएसएल स्टील को 1,255.38 करोड़ रुपए का डिमांड नोटिस जारी किया है। इसका कारण राज्य में कंपनी को दी गई खदान में न्यूनतम लक्ष्य से कम उत्पादन होना बताया गया है। यह जानकारी कंपनी द्वारा रविवार को स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल किए गए डिस्क्लोजर में साझा की गई।
वेदांता ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि ईएसएल स्टील को 17 जनवरी, 2026 को खान उप निदेशक कार्यालय, कोइरा सर्कल से दो डिमांड नोटिस प्राप्त हुए हैं। 16 जनवरी, 2026 की तारीख वाले ये नोटिस, दो खनन पट्टों - बीआईसीओ और फीग्रेड खदान - के संचालन के चौथे वर्ष के लिए न्यूनतम उत्पादन और प्रेषण लक्ष्य (एमडीपीए लक्ष्य) को पूरा करने में कथित कमी से संबंधित हैं।
डिमांड नोटिस में संबंधित अवधि के लिए उत्पादन और प्रेषण में कथित कमी के लिए कुल 12,55,37,61,591 रुपए की मांग की गई है।
कंपनी ने फाइलिंग में कहा, "ईएसएल डिमांड नोटिसों और संबंधित गणनाओं का मूल्यांकन कर रहा है और मानता है कि ये नोटिस योग्यता के आधार पर मान्य नहीं हैं। ईएसएल डिमांड नोटिसों पर रोक लगाने एवं विवादित मांगों को रद्द करने के लिए उचित कानूनी उपायों का सहारा लेगी।"
कंपनी ने सेबी लिस्टिंग विनियमों के अनुसूची III के विनियम 30 के प्रावधानों के अनुरूप बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में यह डिस्क्लोजर दाखिल किया है।
ओडिशा सरकार के खनन विभाग के साथ हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार, दोनों खनन पट्टों से उत्पादन और प्रेषण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यह मांग नोटिस इसलिए जारी किया गया है क्योंकि कंपनी पर आरोप है कि उसने 15 नवंबर, 2021 के खान विकास एवं उत्पादन समझौते के तहत दोनों खनन पट्टों (बीआईसीओ और फीग्रेड खान) के संचालन के चौथे वर्ष के लिए खनिज (परमाणु और जलकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के नियम 12 (ए) के उप-नियम 1 के तहत निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया है।