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क्या मलकानगिरी जातीय हिंसा के बाद ओडिशा सरकार ने आदिवासियों की शिकायतों का समाधान किया?

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क्या मलकानगिरी जातीय हिंसा के बाद ओडिशा सरकार ने आदिवासियों की शिकायतों का समाधान किया?

सारांश

पिछले महीने मलकानगिरी में हुई जातीय हिंसा के बाद, ओडिशा सरकार ने कई निर्णय लिए हैं। इन निर्णयों में आदिवासियों की शिकायतों का समाधान करना, भूमि पट्टे देना और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान करना शामिल है। यह कदम आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए सहायक सिद्ध होगा।

मुख्य बातें

मलकानगिरी में जातीय हिंसा के बाद ओडिशा सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
भूमिहीन आदिवासी परिवारों को स्थायी भूमि पट्टे दिए जाएंगे।
आदिवासी भाषाओं में शिक्षा के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
जल संसाधनों के विकास के लिए कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना का लाभ आदिवासियों को मिलेगा।

भुवनेश्वर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पिछले महीने आदिवासी बहुल मलकानगिरी जिले में हुई गंभीर जातीय हिंसा के परिणामस्वरूप, ओडिशा सरकार ने गुरुवार को जिले के आदिवासियों की विभिन्न शिकायतों को हल करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में लोक सेवा भवन में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में ये निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह तय किया गया कि मलकानगिरी जिले के कलेक्टर सोमेश कुमार उपाध्याय हर पखवाड़े रेगुलेशन 2/56 (2002 में संशोधित) के तहत सैकड़ों लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही, इसकी प्रगति के विषय में दक्षिणी राजस्व संभागीय आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा और राज्य सरकार को जानकारी देंगे।

राज्य सरकार ने राज्य में भूमिहीन और बेघर आदिवासी परिवारों को स्थायी भूमि पट्टे देने का निर्णय भी लिया है।

सीएमओ ने आगे कहा, "एफआरए (वन अधिकार अधिनियम) और ओजीएलएस (ओडिशा सरकारी भूमि बंदोबस्त अधिनियम) के तहत स्थायी 'पट्टे' प्रदान करने के लिए शीघ्र व्यवस्था की जाएगी। जिला कलेक्टर हर महीने प्रगति की समीक्षा करेंगे और राज्य सरकार को सूचित करेंगे।"

ओडिशा सरकार ने मच्छकुंड सिंचाई परियोजना से विस्थापित परिवारों को स्थायी 'पट्टे' देने का भी संकल्प लिया है।

राज्य की उच्च-स्तरीय बैठक के निर्णयों के अनुसार, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, देवरंजन कुमार सिंह, मलकानगिरी जिले के सभी राजस्व संबंधी मामलों की तिमाही समीक्षा करेंगे और राज्य सरकार को रिपोर्ट देंगे।

सीएमओ ने कहा, "जल संसाधन विभाग आने वाले दिनों में जल निकायों के पास स्थित आदिवासी और अन्य समुदायों की ऊपरी कृषि भूमि को सिंचाई सुविधाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाएगा।"

राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की जाएगी कि आदिवासी आवेदक मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना, पीएमईजीपी (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम), और पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण) से लाभान्वित हो सकें।

राज्य स्कूल और जन शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक विद्यालय स्तर पर कोया, दिदायी और बोंडा आदिवासी भाषाओं में खाली बहुभाषी शिक्षा शिक्षक पदों को तुरंत भरा जाएगा।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने मलकानगिरी जिले के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अधिक सीटें बनाने का संकल्प लिया ताकि आदिवासी और अन्य छात्र कक्षा 10 के बाद अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

उठाए गए कदम सार्थक प्रतीत होते हैं। आदिवासी समुदाय की शिकायतों का समाधान करना और उन्हें भूमि अधिकार देना आवश्यक है। यह न केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी है, बल्कि एक संवैधानिक आवश्यकता भी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा सरकार ने मलकानगिरी में क्या निर्णय लिए हैं?
ओडिशा सरकार ने मलकानगिरी में आदिवासियों की शिकायतों का समाधान करने के लिए भूमि पट्टे, शिक्षा के अवसर, और जल संसाधनों में सुधार के निर्णय लिए हैं।
क्या आदिवासियों को स्थायी भूमि पट्टे दिए जाएंगे?
हाँ, ओडिशा सरकार ने भूमिहीन और बेघर आदिवासी परिवारों को स्थायी भूमि पट्टे देने का निर्णय लिया है।
क्या शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किया जाएगा?
जी हाँ, प्राथमिक विद्यालयों में आदिवासी भाषाओं में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अधिक सीटें बनाई जाएंगी।
राज्य सरकार के अन्य निर्णय क्या हैं?
राज्य सरकार ने मच्छकुंड सिंचाई परियोजना से विस्थापित परिवारों को भी स्थायी पट्टे देने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
आदिवासी आवेदक मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना और अन्य कार्यक्रमों से लाभान्वित हो सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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