ओडिशा विजिलेंस का OCC इंजीनियर संजय किसपट्टा के 7 ठिकानों पर छापा, आय से अधिक संपत्ति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विजिलेंस ने 13 जुलाई 2026 को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में ओडिशा कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OCC) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजय कुमार किसपट्टा के 7 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। किसपट्टा कोरापुट में पूर्व असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर भी रह चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
स्पेशल जज (विजिलेंस), जेपोर की अदालत से जारी सर्च वारंट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। छापेमारी दल में 6 डीएसपी, 8 इंस्पेक्टर, 7 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर और अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल रहे।
तलाशी के दायरे में आए स्थानों में कोरापुट जिले में मुत्यालुम्मा मंदिर के पीछे स्थित किराए का घर, एक चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग, एक निर्माणाधीन रिहायशी घर, सुंदरगढ़ में पैतृक घर, एक निर्माणाधीन तीन मंजिला बिल्डिंग, तथा भुवनेश्वर और बलांगीर में रिहायशी क्वार्टर एवं ऑफिस चैंबर शामिल हैं।
पूर्व की कार्रवाइयाँ
यह छापेमारी ओडिशा विजिलेंस की हालिया कार्रवाइयों की एक कड़ी है। इससे पहले 8 जुलाई को विजिलेंस ने कटक फॉरेस्ट डिवीजन के अंतर्गत केंद्रपाड़ा फॉरेस्ट रेंज के फॉरेस्ट रेंजर रवींद्र कुमार नायक से जुड़े 4 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी।
नायक पर भी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है। उनके मुंडुली स्थित चार मंजिला रिहायशी इमारत, कटक जिले के सहदापाड़ा में पैतृक घर, केंद्रपाड़ा फॉरेस्ट रेंज ऑफिस और केंद्रपाड़ा में अस्थायी आवास पर तलाशी ली गई। इस दल में 5 डीएसपी, 9 इंस्पेक्टर और 5 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर शामिल थे।
इससे भी पहले 30 जून को विजिलेंस ने वीर सुरेंद्र साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (VIMSAR), बुर्ला, संबलपुर के दो अधिकारियों — एस्टेब्लिशमेंट ऑफिसर-कम-ऑफिस सुपरिटेंडेंट धनुर्धर बिस्वाल और स्टीवर्ड अश्विनी मेहेर — की संपत्तियों पर छापेमारी की थी।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में सरकारी भ्रष्टाचार के विरुद्ध विजिलेंस की सक्रियता बढ़ी है। एक महीने से भी कम समय में तीन अलग-अलग विभागों — निर्माण, वन और स्वास्थ्य — के अधिकारियों पर कार्रवाई यह दर्शाती है कि जाँच एजेंसी का दायरा व्यापक हो रहा है।
आगे क्या होगा
विजिलेंस के अनुसार संजय कुमार किसपट्टा के ठिकानों पर तलाशी अभी जारी है और आगे की जानकारी का इंतजार है। बरामद दस्तावेज़ों और संपत्ति के आकलन के बाद औपचारिक आरोप-पत्र दाखिल होने की संभावना है।